ट्रांसप्लांटर मशीन से करें धान की खेती आसान, जानें लागत, लाभ और सब्सिडी पाने का तरीका

गांवों में धान की खेती सबसे ज्यादा होती है, लेकिन रोपाई का काम हमेशा से किसानों के लिए बड़ी चुनौती रहा है। पहले जहाँ 10-15 मजदूर दिनभर मेहनत करते थे, वहीं अब एक राइस ट्रांसप्लांटर मशीन अकेले वही काम चुटकियों में कर देती है। ये मशीन न सिर्फ समय बचाती है, बल्कि मेहनत और पैसों की भी जबरदस्त बचत करती है।

चाहे आप खुद मशीन खरीदें या किराए पर लें, ये धान की खेती को आसान और फायदेमंद बना देती है। आज के दौर में जब मजदूर मिलना मुश्किल हो गया है, ये मशीन किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। आइए जानते हैं कि राइस ट्रांसप्लांटर मशीन क्या है, इसके फायदे क्या हैं और इसे कैसे इस्तेमाल करें।

राइस ट्रांसप्लांटर मशीन क्या है?

राइस ट्रांसप्लांटर मशीन एक खास तरह की मशीन है, जो पहले से तैयार धान की नर्सरी को खेत में लाइन से रोप देती है। ये इस तरह डिज़ाइन की गई है कि पौधे सही दूरी पर, सही गहराई में और बराबर लाइन में लगते हैं। इससे न सिर्फ खेत की शक्ल-सूरत अच्छी दिखती है, बल्कि फसल की देखभाल करना भी आसान हो जाता है। मशीन के ज़रिए रोपाई होने से पौधों को बढ़ने के लिए सही जगह मिलती है और पैदावार भी बढ़ती है। ये मशीन छोटे और बड़े, दोनों तरह के खेतों के लिए मुफीद है।

ट्रांसप्लांटर मशीन से करें धान की खेती आसान, जानें लागत, लाभ और सब्सिडी पाने का तरीका
राइडिंग ट्रांसप्लांटर 

मशीन के फायदे

राइस ट्रांसप्लांटर मशीन के इस्तेमाल से कई फायदे हैं। सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये कम समय में ज़्यादा काम कर देती है। एक दिन में 1-1.5 एकड़ की रोपाई आसानी से हो सकती है, जो पहले कई दिनों का काम था। दूसरा, मजदूरों की ज़रूरत लगभग खत्म हो जाती है। जहाँ पहले 10-15 लोग लगते थे, अब सिर्फ 2 लोग मशीन चलाकर काम निपटा सकते हैं।

तीसरा, लाइन से रोपाई होने से खरपतवार निकालना आसान हो जाता है। चौथा, पानी की बचत होती है, क्योंकि समतल और लाइन में रोपाई से पानी बराबर फैलता है और बर्बादी कम होती है। सबसे खास बात, पौधों को पूरा पोषण मिलता है, जिससे फसल की पैदावार बढ़ती है। ये सब मिलकर किसानों की मेहनत और खर्च, दोनों को कम करते हैं।

मशीन की कीमत और उपलब्धता

भारत में राइस ट्रांसप्लांटर मशीन दो तरह की मिलती है। पहली है वॉक-बिहाइंड ट्रांसप्लांटर, जो छोटी होती है और इसकी कीमत 1.5 लाख से 2 लाख रुपये के बीच है। दूसरी है राइडिंग ट्रांसप्लांटर, जो बड़ी और तेज़ होती है, और इसकी कीमत 2.5 लाख से 4 लाख रुपये तक जाती है। आप इसे कृषि यंत्र केंद्र, Krishi Vigyan Kendra (KVK), या प्राइवेट कंपनियों से खरीद सकते हैं। अगर खरीदना मुमकिन न हो, तो कई जगह ये मशीन किराए पर भी मिलती है। कुछ कृषि ऐप्स और वेबसाइट्स जैसे ट्रैक्टर जंक्शन पर भी किराए की सुविधा उपलब्ध है। अपने नज़दीकी ब्लॉक या डीलर से पता करें।

सरकारी सब्सिडी का फायदा

सरकार इस मशीन को बढ़ावा देने के लिए अच्छी सब्सिडी देती है। पीएम कृषि यंत्र योजना के तहत 40% से 80% तक सब्सिडी मिल सकती है, जो राज्य के नियमों पर निर्भर करती है। सब्सिडी पाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल या नज़दीकी कृषि विभाग में आवेदन करना होगा। इसके लिए आधार कार्ड, खसरा नंबर, बैंक पासबुक और जमीन की रसीद जैसे दस्तावेज़ चाहिए। अगर आप SC/ST या महिला किसान हैं, तो अतिरिक्त छूट भी मिल सकती है। ये सब्सिडी मशीन की कीमत को बहुत कम कर देती है, जिससे छोटे किसानों के लिए भी इसे लेना आसान हो जाता है।

ट्रांसप्लांटर मशीन से करें धान की खेती आसान, जानें लागत, लाभ और सब्सिडी पाने का तरीका
वॉक-बिहाइंड ट्रांसप्लांटर

नर्सरी तैयार करने का तरीका

राइस ट्रांसप्लांटर मशीन से रोपाई के लिए खास तरह की नर्सरी चाहिए, जिसे मैट टाइप नर्सरी कहते हैं। इसे प्लास्टिक ट्रे या जमीन पर पॉलिथिन बिछाकर बनाया जाता है। पहले धान के बीज को अंकुरित करें। फिर इन अंकुरों को ट्रे या मैट में डालें और मिट्टी से ढक दें। 12 से 15 दिन में ये पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं। नर्सरी बनाते वक्त ध्यान रखें कि मिट्टी में नमी बनी रहे और बीज अच्छी क्वालिटी के हों। सही नर्सरी से ही रोपाई का काम आसान और सटीक होता है।

छोटे किसानों के लिए विकल्प

अगर आपके पास खुद मशीन खरीदने के लिए पैसा नहीं है, तो परेशान होने की ज़रूरत नहीं। आप कृषि यंत्र किराया सेवा या FPO (किसान प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइज़ेशन) से मशीन किराए पर ले सकते हैं। एक एकड़ की रोपाई के लिए 1000 से 1500 रुपये तक किराया लगता है। कई ब्लॉक स्तर पर भी मशीनें किराए पर दी जाती हैं। इससे छोटे किसान भी इस तकनीक का फायदा उठा सकते हैं और अपनी खेती को आसान बना सकते हैं।

मशीन के प्रकार और कीमत का टेबल

यहाँ राइस ट्रांसप्लांटर मशीन के प्रकार और उनकी कीमत की जानकारी टेबल में दी गई है:

मशीन का प्रकार कीमत (लाख रुपये में) रोपाई क्षमता (एकड़/दिन) खासियत
वॉक-बिहाइंड ट्रांसप्लांटर 1.5 – 2 1-1.2 छोटे खेतों के लिए
राइडिंग ट्रांसप्लांटर 2.5 – 4 1.2-1.5 बड़े खेतों के लिए

राइस ट्रांसप्लांटर मशीन धान की खेती को नया रंग दे रही है। गांवों में जहाँ रोपाई के लिए मजदूरों की कमी और मेहनत बड़ी समस्या थी, वहाँ ये मशीन समय, पैसा और मेहनत, तीनों की बचत कर रही है। चाहे आप इसे खरीदें या किराए पर लें, ये आपकी फसल को बेहतर बनाएगी और पैदावार बढ़ाएगी। सरकार की सब्सिडी का फायदा उठाकर इसे और सस्ता किया जा सकता है। तो इस बार धान की रोपाई के लिए राइस ट्रांसप्लांटर मशीन आज़माएँ और खेती को आसान बनाएँ। ज़्यादा जानकारी के लिए अपने नज़दीकी कृषि विभाग से संपर्क करें।

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  • Rahul Maurya

    मेरा नाम राहुल है। मैं उत्तर प्रदेश से हूं और मैंने संभावना इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में शिक्षा प्राप्त की है। मैं Krishitak.com का संस्थापक और प्रमुख लेखक हूं। पिछले 3 वर्षों से मैं खेती-किसानी, कृषि योजनाएं, और ग्रामीण भारत से जुड़े विषयों पर लेखन कर रहा हूं।

    Krishitak.com के माध्यम से मेरा उद्देश्य है कि देशभर के किसानों तक सटीक, व्यावहारिक और नई कृषि जानकारी आसान भाषा में पहुँचे। मेरी कोशिश रहती है कि हर लेख पाठकों के लिए ज्ञानवर्धक और उपयोगी साबित हो, जिससे वे खेती में आधुनिकता और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सकें।

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