उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में खरीफ फसलों की बुवाई का समय है, लेकिन यूरिया खाद की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सहकारी केंद्रों पर कहीं लंबी कतारें लगी हैं तो कहीं गोदामों के शटर बंद हैं। किसानों का कहना है कि यूरिया ब्लैक में बिक रही है, जिससे उन्हें सरकारी रेट पर खाद नहीं मिल पा रही। धान, बाजरा, और मक्का जैसी फसलों के लिए यूरिया की जरूरत तुरंत है, लेकिन इसकी कमी से फसल बर्बाद होने का डर सता रहा है। दूसरी ओर, अधिकारी दावा कर रहे हैं कि खाद की कोई कमी नहीं है।
सहकारी केंद्रों पर लंबी कतारें
गाजीपुर के कई सहकारी केंद्रों पर किसान सुबह से लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन कई बार खाद खत्म होने की बात कहकर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। खड़बाडीह सहकारी केंद्र पर गोदाम बंद मिलने से किसानों में नाराजगी है। उनका कहना है कि खाद की खेप यहां पहुंची ही नहीं। गाजीपुर मुख्यालय के सहकारी वितरण केंद्र पर यूरिया तो उपलब्ध है, लेकिन वहां भी लंबी लाइनों में पुरुष और महिलाएं अपनी बारी का इंतजार करते दिखते हैं।
जखनियां विधानसभा के मनिहारी ब्लॉक के खड़बाडीह गांव के किसान मनोज पाल और रामावतार यादव जैसे कई किसानों ने बताया कि पास के मोहब्बतपुर गांव में खाद बांटी गई, लेकिन उनके केंद्र पर वितरण नहीं हुआ। कुछ किसानों को वाहन का इंतजाम करके दूर से खाद लानी पड़ी।
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कालाबाजारी ने बढ़ाई मुश्किलें
किसानों का सबसे बड़ा आरोप है कि यूरिया की कालाबाजारी हो रही है। सहकारी केंद्रों पर यूरिया 280 रुपये प्रति बोरी मिलती है, लेकिन निजी दुकानों पर यह 500 से 600 रुपये तक बिक रही है। कई किसानों ने बताया कि सुबह से भूखे-प्यासे लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाद मिलना मुश्किल है। उनका सवाल है कि अगर अधिकारियों के मुताबिक खाद की कोई कमी नहीं है, तो सहकारी केंद्र बंद क्यों हैं? कुछ किसानों का मानना है कि खाद को जानबूझकर ब्लैक में बेचा जा रहा है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। गाजीपुर के कई गांवों में किसानों ने प्रशासन से कालाबाजारी रोकने की मांग की है।
खरीफ फसलों पर खतरा
खरीफ का मौसम धान, बाजरा, और मक्का जैसी फसलों के लिए बहुत अहम है। इन फसलों को समय पर यूरिया नहीं मिला तो पैदावार कम हो सकती है। गाजीपुर में इस साल मॉनसून अच्छा होने से बुवाई का रकबा बढ़ा है, लेकिन यूरिया की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अगर खाद समय पर नहीं मिली, तो फसल बर्बाद होने का खतरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना पर्याप्त नाइट्रोजन के धान और मक्का की पैदावार 20-30% तक कम हो सकती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होगा।
अधिकारियों का दावा और हकीकत
गाजीपुर के जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार का कहना है कि जिले में यूरिया की कोई कमी नहीं है। उनके अनुसार, अब तक 30,486 मीट्रिक टन यूरिया बांटा जा चुका है और नई खेप लगातार आ रही है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि रबी फसलों के लिए अभी से खाद जमा न करें और जरूरत के हिसाब से ही लें।
लेकिन किसानों का कहना है कि हकीकत कुछ और है। कई केंद्रों पर खाद की उपलब्धता अनियमित है, और कालाबाजारी के कारण छोटे किसानों को परेशानी हो रही है। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भी दावा किया है कि राज्य में 6 लाख मीट्रिक टन यूरिया का स्टॉक है और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।