Litchi Farming Subsidy: किसान भाइयों, अगर आप अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं, तो बिहार की मशहूर शाही लीची की खेती आपके लिए सुनहरा मौका है। बिहार सरकार उद्यान निदेशालय, कृषि विभाग के जरिए एकीकृत बागवानी मिशन (MIDH) के तहत लीची की खेती के लिए 50% सब्सिडी दे रही है। इतना ही नहीं, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो इरिगेशन तकनीकों के लिए 80% तक अनुदान भी मिलेगा। भारत में 70% लीची का उत्पादन अकेले बिहार में होता है, और इसका निर्यात देश-विदेश में होता है। जुलाई-अगस्त में लीची का बाग लगाकर और सरकार की सब्सिडी का फायदा उठाकर आप मोटा मुनाफा कमा सकते हैं। आइए, जानें लीची की खेती की तैयारी, सब्सिडी, और आवेदन का तरीका।
लीची की खेती पर 50% सब्सिडी का लाभ
बिहार सरकार लीची की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को एकीकृत बागवानी मिशन के तहत 50% सब्सिडी दे रही है। लीची का बाग लगाने में प्रति हेक्टेयर करीब 2 लाख रुपये की लागत आती है। इस योजना में आपको 1 लाख रुपये तक का अनुदान मिलेगा, यानी आधी लागत सरकार उठाएगी।
ये सब्सिडी बिहार के 23 जिलों में लागू है, जिनमें मुजफ्फरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, वैशाली, पूर्वी चम्पारण, पश्चिम चम्पारण, और भागलपुर जैसे जिले शामिल हैं। लीची की खेती से न सिर्फ़ ताज़ा फल बेचकर कमाई हो सकती है, बल्कि जूस, जैम, और स्क्वैश जैसे प्रोसेस्ड उत्पाद बनाकर भी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। बिहार की शाही लीची की माँग विदेशों में भी है, जो आपकी कमाई को और बढ़ा सकती है।
जुलाई-अगस्त में लगाएँ लीची का बाग
उत्तर भारत, खासकर बिहार में, जुलाई और अगस्त का समय लीची का बाग लगाने के लिए सबसे सही है। इस दौरान बारिश का मौसम पौधों को जमने में मदद करता है। पौधे लगाने के बाद पहले 15 दिन तक रोज़ पानी दें, ताकि जड़ें मज़बूत हों। इसके बाद मौसम और मिट्टी की नमी के हिसाब से हफ्ते में एक या दो बार सिंचाई करें।
देसी किसान पौधों के चारों ओर सूखी घास या पुआल बिछाते हैं, जिससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और खरपतवार कम उगते हैं। कुछ किसान गोबर की खाद और नीम की खली को गड्ढों में मिलाते हैं, जो पौधों को शुरुआती पोषण देता है। पौधों को 8-10 मीटर की दूरी पर लगाएँ, ताकि बाग में हवा और धूप अच्छे से आए।
खेत की तैयारी का तरीका
लीची का बाग लगाने से पहले खेत को अच्छे से तैयार करना ज़रूरी है। सबसे पहले खेत की गहरी जुताई करें, ताकि पुरानी जड़ें और बहुवर्षीय झाड़ियाँ निकल जाएँ। अगर खेत समतल हो या हल्का ढलान वाला हो, तो दो बार जुताई करें। गड्ढे 1 मीटर गहरे और 1 मीटर चौड़े खोदें। हर गड्ढे में 20-25 किलो गोबर की सड़ी खाद, 2 किलो नीम की खली, और 1 किलो राख मिलाएँ।
किसान अक्सर गड्ढों में थोड़ा गोमूत्र छिड़कते हैं, जो मिट्टी को कीटों से बचाता है। गड्ढों को 15 दिन तक खुला छोड़ दें, ताकि मिट्टी में हवा लगे। इसके बाद पौधे लगाएँ और मिट्टी से अच्छे से ढक दें। ये देसी तरीका पौधों को मज़बूत बनाता है और खर्चा भी कम करता है।
माइक्रो इरिगेशन पर 80% अनुदान
लीची की खेती में पानी की सही व्यवस्था बहुत ज़रूरी है। बिहार सरकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो इरिगेशन तकनीकों को अपनाने वाले किसानों को 80% तक अनुदान दे रही है। ये तकनीक पानी की बचत करती है और पौधों को सही मात्रा में नमी देती है। इससे फल बड़े, रसीले, और ज़्यादा मीठे होते हैं। एक हेक्टेयर में ड्रिप सिस्टम लगाने की लागत करीब 50,000-60,000 रुपये है, जिसमें आपको सिर्फ़ 10,000-12,000 रुपये खर्च करने होंगे, बाकी सरकार देगी। ये तकनीक खासकर मुजफ्फरपुर और दरभंगा जैसे इलाकों में लीची की खेती को आसान बनाती है।
लीची की खेती से मुनाफे के रास्ते
बिहार में लीची की खेती मुनाफे का सौदा है, क्योंकि ये फल स्थानीय मंडियों से लेकर विदेशी बाजारों तक बिकता है। एक हेक्टेयर में 200-250 पौधे लगाए जा सकते हैं, और 5-6 साल बाद हर पौधा 50-100 किलो फल देता है। बाजार में शाही लीची 100-200 रुपये प्रति किलो बिकती है। अगर आप प्रोसेसिंग यूनिट लगाएँ, तो जूस, जैम, या स्क्वैश बनाकर कमाई दोगुनी कर सकते हैं। बिहार की लीची को GI टैग मिला है, जिससे इसका निर्यात बढ़ रहा है। देसी किसान फल को ताज़ा रखने के लिए बाँस की टोकरियों में पुआल के साथ पैक करते हैं, जो लागत कम रखता है। सब्सिडी का फायदा उठाकर आप लागत घटा सकते हैं और मुनाफा बढ़ा सकते हैं।
ऑनलाइन आवेदन का आसान तरीका
लीची की खेती और माइक्रो इरिगेशन की सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट http://horticulturebihar.gov.in पर जाएँ। होमपेज पर “Schemes” या “योजनाएँ” के विकल्प पर क्लिक करें। यहाँ आपको “Integrated Horticulture Mission” या “मुख्यमंत्री बागवानी मिशन” का विकल्प मिलेगा। इसके बाद “Apply Online” पर क्लिक करें। अपना DBT रजिस्ट्रेशन नंबर डालें और आवेदन फॉर्म में ज़रूरी जानकारी, जैसे नाम, आधार नंबर, और खेत का विवरण, भरें। ज़मीन के कागज़, आधार कार्ड, और बैंक खाता विवरण जैसे दस्तावेज़ अपलोड करें। फॉर्म चेक करके “Submit” बटन दबाएँ। प्रिंटआउट रख लें। अगर आपको दिक्कत हो, तो नज़दीकी उद्यान अधिकारी या सामान्य सेवा केंद्र (CSC) से संपर्क करें।
लीची की खेती बरतें ये सावधानियां
लीची की खेती में कुछ सावधानियाँ बरतें। पौधों को कीटों, खासकर स्टिंक बग, से बचाने के लिए नीम तेल और लहसुन का घोल छिड़कें। हर 15 दिन में जीवामृत, जिसमें गोमूत्र, गोबर, और गुड़ मिलाया जाता है, डालें। ये पौधों को पोषण देता है और फल की मिठास बढ़ाता है। अगर बारिश ज्यादा हो, तो गड्ढों के आसपास नाली बनाएँ, ताकि पानी जमा न हो। फल पकने के समय पक्षियों से बचाव के लिए जाल लगाएँ। देसी किसान पौधों के तने पर गोबर और मिट्टी का लेप लगाते हैं, जो कीटों को दूर रखता है। सही समय पर पौधे लगाएँ और सब्सिडी के लिए जल्दी आवेदन करें, क्योंकि ये योजना “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर है।
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