खेती के साथ-साथ अब मुर्गी पालन किसानों की कमाई का नया रास्ता बन रहा है। बाजार में अंडे और चिकन की बढ़ती माँग ने इस धंधे को और आकर्षक बना दिया है। इस बीच, वनराजा नस्ल की मुर्गी किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। यह देसी नस्ल की मुर्गी अपने पौष्टिक मांस और ज्यादा अंडे देने की खासियत के लिए जानी जाती है। रायबरेली के पशु चिकित्सक और किसान इस नस्ल को अपनाकर अपनी आय दोगुनी कर रहे हैं। कम लागत और कम मेहनत में यह नस्ल बंपर मुनाफा दे रही है।
वनराजा की खासियत
वनराजा नस्ल को हैदराबाद के डायरेक्टरेट ऑफ पोल्ट्री रिसर्च (डीपीआर) ने विकसित किया है। यह मुर्गी दिखने में आकर्षक और कत्थई रंग की होती है, जिसके अंडे और मांस की बाजार में भारी माँग है। रायबरेली के राजकीय पशु चिकित्सालय शिवगढ़ के प्रभारी डॉ. इंद्रजीत वर्मा बताते हैं कि यह नस्ल अन्य मुर्गियों की तुलना में ज्यादा अंडे देती है और इसका पालन आसान है। यह पाँच महीने की उम्र में ही अंडे देना शुरू कर देती है, जो सामान्य नस्लों से दो महीने पहले है। एक मुर्गी साल में 120 से 140 अंडे दे सकती है, और इसका मांस पौष्टिक होने के कारण 600 से 700 रुपये प्रति किलो तक बिकता है।
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कम लागत, ज्यादा मुनाफा
वनराजा नस्ल का पालन बैकयार्ड तरीके से किया जा सकता है, जिसमें ज्यादा जगह या बड़े खर्च की जरूरत नहीं पड़ती। अगर आप 20 से 30 मुर्गियों से शुरुआत करते हैं, तो शुरुआती लागत 50,000 से 1 लाख रुपये तक आ सकती है। रायबरेली के एक मुर्गी पालक, रामू यादव, ने बताया कि उन्होंने 25 मुर्गियों से शुरुआत की और एक साल में 1.5 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई की। एक चूजे का वजन 35 से 40 ग्राम होता है, जो 12 हफ्तों में 1.8 से 2 किलो तक बढ़ जाता है। बाजार में तैयार मुर्गी की अच्छी कीमत मिलती है, जिससे लागत का दोगुना से ज्यादा मुनाफा हो सकता है।
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रोगों से लड़ने की ताकत
वनराजा नस्ल की सबसे बड़ी खूबी है इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता। यह जल्दी बीमार नहीं पड़ती, जिससे दवाइयों और रखरखाव का खर्च कम रहता है। डॉ. वर्मा सलाह देते हैं कि रानीखेत जैसी बीमारियों से बचाने के लिए हर छह महीने में टीकाकरण जरूरी है। इसके अलावा, 2 से 3 महीने में आंतरिक परजीवियों की दवा देनी चाहिए। मुर्गियों को कुत्तों, बिल्लियों, और साँपों से बचाने के लिए सुरक्षित शेड बनाना जरूरी है। यह नस्ल कम देखभाल में भी अच्छा उत्पादन देती है, जो छोटे और मझोले किसानों के लिए फायदेमंद है।
कैसे शुरू करें पालन
वनराजा मुर्गी पालन के लिए ज्यादा संसाधनों की जरूरत नहीं है। आप इसे छोटे स्तर पर घर के आँगन में या बड़े स्तर पर पोल्ट्री फार्म में शुरू कर सकते हैं। चूजों को खरीदने के लिए नजदीकी पशु चिकित्सालय या डीपीआर हैदराबाद से संपर्क करें। सही आहार और साफ-सफाई का ध्यान रखें। चूजों को शुरुआत में गर्म जगह और संतुलित दाना देना चाहिए। रायबरेली में कई किसान इस नस्ल को अपनाकर हर महीने 50,000 से 2 लाख रुपये तक कमा रहे हैं। अगर आप भी इस धंधे में उतरना चाहते हैं, तो अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या पशु चिकित्सालय से सलाह लें।
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