फसलों की पैदावार बढ़ाने में उन्नत बीजों की भूमिका बहुत बड़ी है। मक्का की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है कि चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने मक्का की उच्च गुणवत्ता वाली हाइब्रिड किस्म HQPM-29 विकसित की है। इस किस्म के बीज को ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुँचाने के लिए विश्वविद्यालय ने ग्लोबल एग्रो साइंस प्राइवेट लिमिटेड, पटना, बिहार के साथ समझौता किया है। यह किस्म 71.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार दे सकती है। किसानों के अनुभव बताते हैं कि HQPM-29 न केवल मुनाफा बढ़ाता है, बल्कि जैविक खेती के लिए भी उपयुक्त है। आइए जानें कि यह किस्म कैसे किसानों की किस्मत बदल सकती है।
HQPM-29 की खासियतें
HQPM-29 मक्का की एकल संकर किस्म है, जिसे हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के करनाल क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र ने विकसित किया है। वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार, यह किस्म जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र, मेघालय, सिक्किम, त्रिपुरा, नागालैंड, मणिपुर, और अरुणाचल प्रदेश के लिए अनुमोदित है। इसकी खास बात यह है कि यह मक्का की मुख्य बीमारियों जैसे मेडिस पत्ती झुलसा रोग और कीटों जैसे फॉल आर्मी वर्म के प्रति प्रतिरोधी है। किसानों के अनुभव बताते हैं कि इसकी पैदावार 71.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है, जो सामान्य किस्मों से कहीं ज्यादा है। यह खाने और पशु चारे के लिए बेहतरीन है और कुपोषण दूर करने में मदद करता है।
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ग्लोबल एग्रो साइंस के साथ समझौता
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने HQPM-29 के बीजों को किसानों तक पहुँचाने के लिए ग्लोबल एग्रो साइंस प्राइवेट लिमिटेड, पटना के साथ समझौता किया है। कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने बताया कि निजी कंपनियों के साथ ऐसे समझौते ज्यादा से ज्यादा किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे हैं। इस समझौते के तहत कंपनी HQPM-29 के बीज तैयार करेगी और बिहार सहित अन्य राज्यों में किसानों तक पहुँचाएगी। समझौते पर विश्वविद्यालय की ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग और कंपनी की ओर से डॉ. सितांशु कुमार ने हस्ताक्षर किए। किसानों के अनुभव बताते हैं कि विश्वसनीय बीजों की उपलब्धता से उनकी लागत कम होती है और मुनाफा बढ़ता है।
जैविक खेती के साथ तालमेल
HQPM-29 की खेती जैविक तरीकों के लिए भी उपयुक्त है। वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार, यह किस्म कम रासायनिक उर्वरकों के साथ अच्छी पैदावार देती है। गोबर की खाद (10-15 टन प्रति हेक्टेयर) और वर्मी कंपोस्ट का उपयोग करने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। नीम आधारित कीटनाशक, जैसे नीम तेल (5 मिली/लीटर पानी), का छिड़काव कीटों को नियंत्रित करता है। किसानों के अनुभव बताते हैं कि जैविक उर्वरक जैसे जायटॉनिक पोटाश के साथ इसकी खेती करने से फसल की गुणवत्ता बढ़ती है और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होता। यह किस्म मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को संतुलित रखती है, जिससे लंबे समय तक खेत उपजाऊ रहता है।
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खेती का सही तरीका
HQPM-29 की खेती के लिए दोमट मिट्टी और 6-7 pH उपयुक्त है। बुवाई से पहले खेत की अच्छी जुताई करें और 10 टन गोबर की खाद डालें। बीजों को 60×20 सेंटीमीटर की दूरी पर बोएँ। वैज्ञानिक सलाह के अनुसार, ड्रिप इरिगेशन से पानी की बचत होती है और जड़ें स्वस्थ रहती हैं। बुवाई का सही समय मार्च से जून तक है। किसानों के अनुभव बताते हैं कि नियमित निराई-गुड़ाई और जैविक कीटनाशकों का उपयोग फसल को रोग-मुक्त रखता है। फसल 90-100 दिनों में तैयार हो जाती है।
किसानों के लिए फायदे
इस की खेती से किसानों को कई फायदे हैं। इसकी उच्च पैदावार और रोग प्रतिरोधक क्षमता लागत कम करती है। बाज़ार में मक्का की बढ़ती मांग, खासकर खाद्य और पशु चारा उद्योगों में, किसानों को अच्छा दाम दिलाती है। वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार, यह किस्म कुपोषण से लड़ने में मदद करती है, जिससे बाज़ार में इसकी मांग और बढ़ रही है। किसानों के अनुभव बताते हैं कि ग्लोबल एग्रो साइंस जैसे विश्वसनीय स्रोतों से बीज लेने से फसल की गुणवत्ता बनी रहती है।
पशुपालकों के लिए लाभ
HQPM-29 का उपयोग पशु चारे के लिए भी किया जा सकता है। इसकी पत्तियाँ और दाने पौष्टिक होते हैं, जो दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं। वैज्ञानिक सलाह के अनुसार, इसकी खेती के साथ अंतर-फसलें जैसे मूंग या उड़द उगाने से अतिरिक्त आय हो सकती है। किसानों के अनुभव बताते हैं कि यह किस्म पशुओं में प्रोटीन की कमी को पूरा करती है, जिससे पशुपालकों का मुनाफा बढ़ता है।
इसकी खेती शुरू करने से पहले स्थानीय कृषि केंद्र से संपर्क करें और प्रमाणित बीज लें। मिट्टी की जाँच करवाएँ और जैविक खाद का उपयोग करें। छोटे स्तर पर शुरुआत करें और परिणाम देखकर बढ़ाएँ। ग्लोबल एग्रो साइंस जैसे विश्वसनीय स्रोतों से बीज खरीदें। किसानों के अनुभव बताते हैं कि सही समय पर बुवाई और नियमित देखभाल से HQPM-29 की खेती मुनाफे का शानदार जरिया बन सकती है।
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