Spices Export: भारत के मसालों ने विदेशों में मचाया धमाल! 4.72 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निर्यात, दुनियाभर में बिखरी देशी खुशबू

Spices Export: भारत के मसाले दुनिया में धूम मचा रहे हैं। हल्दी, जीरा, काली मिर्च और इलायची की खुशबू ने न सिर्फ़ विदेशी रसोइयों को दीवाना बनाया, बल्कि देश की कमाई को भी नई ऊँचाई दी। इस साल 2024-25 में मसालों का निर्यात 4.72 अरब डॉलर तक पहुँच गया, जो पिछले साल से 6% ज़्यादा है। मेहनती किसान, जिनके खेतों में ये मसाले उगते हैं, इस सफलता की असली ताकत हैं। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक मसाला निर्यात 10 अरब डॉलर और 2047 तक 25 अरब डॉलर तक ले जाएँ। आइए, जानें कि कैसे भारतीय मसाले दुनिया में छा रहे हैं और किसानों को इसका फायदा कैसे मिल सकता है।

मिर्च का जलवा, पर कीमतों में चुनौती

मिर्च भारत के मसाला निर्यात का सबसे बड़ा सितारा है। ये कुल निर्यात का एक-चौथाई हिस्सा है। इस साल मिर्च का निर्यात 1.34 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल के 1.50 अरब डॉलर से 11% कम है। कीमतों में थोड़ी गिरावट आई, लेकिन मिर्च की माँग दुनिया में कम नहीं हुई। इस साल 7.15 लाख टन मिर्च विदेश भेजी गई, जो पिछले साल से 19% ज़्यादा है। मिर्च उगाने वाले किसान भाइयों को कीमतों को स्थिर करने के लिए सरकार और मंडियों से बेहतर समर्थन की ज़रूरत है, ताकि मेहनत का पूरा फल मिले।

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जीरा और हल्दी ने दिखाया दम

जीरा मसाला निर्यात में दूसरा बड़ा नाम है। इस साल 732.35 मिलियन डॉलर का जीरा विदेश भेजा गया, जो पिछले साल से 5% ज़्यादा है। 6.17 लाख टन जीरा निर्यात हुआ, यानी मात्रा में 6% की बढ़ोतरी। हल्दी ने तो और भी कमाल किया। इसके स्वास्थ्य लाभों की वजह से दुनिया में इसकी माँग आसमान छू रही है। 341 मिलियन डॉलर की हल्दी निर्यात हुई, जो 51% की ज़बरदस्त उछाल है। 1.76 लाख टन हल्दी विदेश गई, जो 9% की बढ़ोतरी है। किसानों के लिए ये मौका है कि हल्दी और जीरे की खेती को और बढ़ाएँ, क्योंकि इनकी माँग दिन-ब-दिन बढ़ रही है।

काली मिर्च और इलायची की धूम

काली मिर्च और छोटी इलायची ने भी दुनिया में भारत का नाम रौशन किया। काली मिर्च का निर्यात 40% बढ़कर 124.54 मिलियन डॉलर हो गया, और 20,830 टन माल विदेश गया। छोटी इलायची ने 53% की उछाल के साथ 184.65 मिलियन डॉलर का निर्यात किया, और 6,727 टन माल भेजा गया। इन मसालों की खास सुगंध और स्वाद की वजह से विदेशी बाज़ारों में भारत की साख बढ़ रही है। किसान भाई, जो इन मसालों को उगाते हैं, उनकी मेहनत अब दुनिया भर में मशहूर हो रही है।

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मसाला तेल और करी पाउडर की बढ़ती माँग

मसाला तेल और ओलियोरेसिन जैसे नए उत्पाद भी दुनिया में छा रहे हैं। इनका इस्तेमाल खाने और कॉस्मेटिक्स में होता है। इस साल 535.92 मिलियन डॉलर के मसाला तेल निर्यात हुए, जो 8% की बढ़ोतरी है। 4.53 लाख टन माल भेजा गया, यानी 12% की उछाल। करी पाउडर और पेस्ट ने 247.59 मिलियन डॉलर का निर्यात किया, जो 17% ज़्यादा है। पुदीना उत्पादों ने भी 417.8 मिलियन डॉलर की कमाई की। ये सब भारतीय खाने की वैश्विक लोकप्रियता का सबूत है। किसानों को इन नए मसाला उत्पादों की खेती पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इनका बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है।

मसाला निर्यात का बड़ा सपना

भारत का मसाला उद्योग अब बड़े-बड़े सपने देख रहा है। 2030 तक 10 अरब डॉलर और 2047 तक 25 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य है। इसके लिए सरकार गुणवत्ता पर सख्ती, कीमतों को स्थिर करने, और नए बाज़ारों तक पहुँचने की कोशिश कर रही है। जैविक मसालों और मसाला तेलों की माँग बढ़ रही है, जो किसानों के लिए सुनहरा मौका है। अगर मसाला उगाने वाले किसान भाई जैविक खेती और बेहतर बीजों का इस्तेमाल करें, तो उनकी कमाई कई गुना बढ़ सकती है। नज़दीकी कृषि केंद्र से संपर्क करके मसाला खेती की नई तकनीकों की जानकारी ले सकते हैं।

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  • Shashikant

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