भारत के खेतों से लेकर वैश्विक बाजार तक, सब्जी बीज उद्योग तेजी से चमक रहा है। साल 2024 में वैश्विक सब्जी बीज बाजार 8.45 अरब डॉलर का हो चुका है, और विशेषज्ञों का मानना है कि भारत सही नीतियों और नवाचारों के साथ 2030 तक इस क्षेत्र में दुनिया का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है। दिल्ली में हाल ही में हुए एक राष्ट्रीय सम्मेलन में कृषि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, और बीज उद्योग के दिग्गजों ने बताया कि भारत का सब्जी बीज बाजार 2023-24 में 74 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2030 तक 97 करोड़ डॉलर तक पहुँच सकता है। यह लेख बताता है कि कैसे यह क्षेत्र किसानों की जिंदगी बदल रहा है और भारत को वैश्विक बीज हब बनाने की राह पर है।
सब्जी बीज बाजार की उड़ान
दिल्ली में आयोजित ‘भारत को वैश्विक बीज हब बनाने में सब्जी बीज क्षेत्र की भूमिका’ सम्मेलन में संघीय बीज उद्योग संघ (FSII) ने बताया कि भारत का सब्जी बीज बाजार 4.6% की वार्षिक वृद्धि दर के साथ 2030 तक 97 करोड़ डॉलर तक पहुँचने की राह पर है। देश में 300 से ज्यादा बीज कंपनियाँ काम कर रही हैं, जो बाजार के 80-85% हिस्से को संभालती हैं और हर साल 20 करोड़ डॉलर से ज्यादा अनुसंधान में खर्च करती हैं। ये कंपनियाँ नई तकनीकों और उन्नत बीजों के जरिए किसानों को ज्यादा पैदावार और बेहतर मुनाफा दिला रही हैं। मध्य प्रदेश के एक किसान, रमेश यादव, ने बताया कि नई किस्म के सब्जी बीजों से उनकी टमाटर और मिर्च की फसल की उपज 20% बढ़ी है।
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सरकार का साथ
कृषि मंत्रालय के आयुक्त डॉ. पी.के. सिंह ने सम्मेलन में कहा कि भारत की बागवानी में तरक्की का राज हमारी समृद्ध जैव विविधता, अलग-अलग जलवायु, और निजी-सार्वजनिक क्षेत्रों का निवेश है। लेकिन वैश्विक स्तर पर अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है। सरकार ने बागवानी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं, जिनमें राष्ट्रीय बागवानी मिशन शामिल है। यह मिशन किसानों को संरक्षित खेती के लिए 50% अनुदान देता है, जिससे टमाटर, मिर्च, और हरी सब्जियों की खेती आसान हो रही है। इसके अलावा, सरकार ‘साथी’ डिजिटल मंच के जरिए QR कोड आधारित बीज ट्रेसबिलिटी शुरू कर रही है, ताकि किसानों को सही और प्रमाणित बीज मिल सकें।
नीतिगत सुधारों की जरूरत
FSII के उपाध्यक्ष राजवीर राठी ने सुझाव दिया कि भारत को बीज क्षेत्र में और आगे बढ़ने के लिए ‘वन नेशन, वन लाइसेंस’ नीति और सिंगल विंडो निर्यात मंजूरी सिस्टम लागू करना होगा। अभी 100 से ज्यादा कीट जोखिम विश्लेषण (PRA) 2016 से लंबित हैं, जिससे 5.5 करोड़ डॉलर का व्यापार अटका हुआ है। लाइसेंस की अवधि बढ़ाने और डिजिटल मंजूरी शुरू करने से बीज कंपनियों को कारोबार में आसानी होगी। यह सुधार न सिर्फ निर्यात बढ़ाएँगे, बल्कि किसानों को भी बेहतर बीज सस्ते दामों पर मिलेंगे। इससे छोटे और मझोले किसानों को बड़ा फायदा होगा, जो अपनी फसलों को बाज़ार में बेहतर कीमत पर बेच सकेंगे।
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निर्यात और रोजगार का मौका
भारत हर साल 12 करोड़ डॉलर के सब्जी बीज दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य पूर्व को निर्यात करता है। अगर लंबित PRA को जल्द पूरा किया जाए, तो यह व्यापार दोगुना-तिगुना हो सकता है। यह क्षेत्र ग्रामीण भारत में एक लाख से ज्यादा रोजगार देता है, खासकर महिला किसानों को। बायोफोर्टिफाइड सब्जियाँ छिपी भूख (पोषक तत्वों की कमी) से लड़ने में मदद करती हैं, जिससे स्वास्थ्य और आर्थिक लाभ दोनों मिलते हैं। उदाहरण के लिए, बिहार की एक महिला किसान, सरिता देवी, ने बताया कि बायोफोर्टिफाइड गाजर की खेती से उनकी आय बढ़ी और परिवार की सेहत भी सुधरी।
किसानों के लिए सुनहरा भविष्य
सब्जी बीज उद्योग न सिर्फ खेती को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती जनसंख्या की चुनौतियों से भी लड़ रहा है। नई तकनीकों जैसे जीन एडिटिंग और जलवायु प्रतिरोधी बीजों से फसलें कीटों और मौसम की मार से बची रहती हैं। सरकार और निजी कंपनियों का सहयोग इस क्षेत्र को और मजबूत करेगा। अगर आप भी अपने खेतों में उन्नत बीजों का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें और ‘साथी’ मंच पर बीजों की जानकारी लें। भारत का यह बीज उद्योग किसानों की मेहनत को वैश्विक मंच पर ले जाएगा।
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