आजकल जैविक खेती और उत्पादों की माँग ने जैविक खाद के कारोबार को गाँव के किसानों के लिए सुनहरा अवसर बना दिया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, और राजस्थान में किसान गोबर, गोमूत्र, और कचरे से वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, और पंचगव्य बनाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं। ये कारोबार 15,000-30,000 रुपये की लागत से घर, खेत, या गौशाला से शुरू हो सकता है। एक छोटी यूनिट से 30,000-60,000 रुपये और बड़े स्तर (10 बेड) पर 5 लाख रुपये सालाना मुनाफा संभव है। जैविक खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है, जिससे फसल की गुणवत्ता और दाम 20-30% बढ़ते हैं। आइए जानें इसे कैसे शुरू करें।
जैविक खाद का महत्व
जैविक खाद प्राकृतिक सामग्री जैसे गोबर, गोमूत्र, सूखी पत्तियाँ, और रसोई के जैविक कचरे से बनती है। रासायनिक खादों के उलट, ये मिट्टी की सेहत सुधारती है, लाभकारी सूक्ष्मजीव बढ़ाती है, और फसलों को पोषक बनाती है। वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, और पंचगव्य की माँग भारत और विदेश में बढ़ रही है। ये सस्ती (8-15 रुपये/किलो) और पर्यावरण के लिए सुरक्षित है। जैविक खाद से फसल उत्पादन 10-20% बढ़ता है, और जैविक उत्पादों की ऊँची कीमत (20-30% ज्यादा) किसानों की आय बढ़ाती है। ये कारोबार छोटे-सीमांत किसानों के लिए आदर्श है।
एक आम किसान कैसे शुरू करे यह कारोबार?
अगर आपके पास 2-3 गाय या भैंस हैं, तो आप आसानी से जैविक खाद बनाने का काम शुरू कर सकते हैं। इसके लिए ज्यादा बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होती। बस एक छोटा सा शेड बनाइए जहां खाद बन सके। गोबर, गोमूत्र, सुखी पत्तियाँ, रसोई का जैविक कचरा आदि मिलाकर आप वर्मी कम्पोस्ट या साधारण जैविक खाद बना सकते हैं। इसके लिए 10×10 फीट का एक बेड बनाकर उसमें सामग्री डालें और उसमें केंचुए डाल दिए जाएं तो 45 से 60 दिन में जैविक खाद तैयार हो जाती है।
कारोबार शुरू करने का तरीका
किसान 2-3 गाय-भैंस या छोटी गौशाला से जैविक खाद बना सकता है। शुरुआत के लिए:
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10×10 फीट का शेड (5,000-10,000 रुपये) बनाएँ, जहाँ खाद तैयार हो।
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1×3 मीटर का बेड बनाएँ, गोबर, पत्तियाँ, और कचरा डालें।
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केंचुए (500-1,000 रुपये/किलो) डालें; 45-60 दिन में वर्मी कम्पोस्ट तैयार।
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जीवामृत (गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन) के लिए 200-लीटर ड्रम (2,000 रुपये) लें।
नमी (50-60%) और साफ-सफाई बनाए रखें। ICAR, KVK, या स्थानीय कृषि केंद्र से प्रशिक्षण लें। छोटे किसान 1-2 बेड से शुरू कर सकते हैं। जीवामृत और पंचगव्य बनाने में 7-10 दिन लगते हैं। प्रक्रिया सरल और कम मेहनत वाली है, जिसे गाँव की महिलाएँ भी आसानी से कर सकती हैं।
लागत और मुनाफे का हिसाब
एक वर्मी कम्पोस्ट बेड की लागत (शेड, केंचुए, सामग्री) 15,000-30,000 रुपये है। एक बेड से सालाना 2-3 टन खाद (8-15 रुपये/किलो) मिलती है, यानी 16,000-45,000 रुपये कमाई। 10 बेड से 20-30 टन खाद, 1.6-4.5 लाख रुपये आय। रखरखाव (10,000-20,000 रुपये/साल) घटाकर 1.5-4.3 लाख रुपये मुनाफा। जीवामृत और पंचगव्य (20-50 रुपये/लीटर) बेचकर 50,000-1 लाख रुपये अतिरिक्त कमाई हो सकती है। बड़े स्तर (20 बेड) पर 8-10 लाख रुपये सालाना मुनाफा संभव। दूसरी फसल से लागत और कम होती है, क्योंकि केंचुए दोबारा उपयोगी हैं।
बाजार और बिक्री के रास्ते
जैविक खाद की बिक्री स्थानीय किसानों, नर्सरियों, और कृषि केंद्रों को करें। 10-50 किलो बैग में ब्रांडेड पैकिंग से दाम बढ़ते हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (Amazon, Flipkart, IndiaMART) और सोशल मीडिया (WhatsApp, Instagram) पर बेचें। जैविक खेती करने वाले FPO, सहकारी समितियों, और आयुर्वेदिक दुकानों से संपर्क करें। जीवामृत और पंचगव्य की माँग जैविक स्टोर और हर्बल दुकानों में है। अच्छी क्वालिटी और मार्केटिंग से नियमित ऑर्डर मिलते हैं। निर्यात के लिए APEDA से रजिस्ट्रेशन लें। गाँव में डिलीवरी नेटवर्क बनाएँ।
सरकारी सहायता और सुझाव
राष्ट्रीय जैविक खेती मिशन, AIF, और PMKSY योजनाएँ वर्मी कम्पोस्ट यूनिट के लिए 30-50% सब्सिडी और 2 करोड़ तक लोन (3% ब्याज सब्सिडी) देती हैं। कई राज्यों में मुफ्त केंचुए, ट्रे, और प्रशिक्षण मिलता है। FPO बनाकर सब्सिडी और मार्केटिंग आसान करें। KVK, NABARD, या स्थानीय कृषि अधिकारी से सलाह लें। साफ-सफाई और नमी का ध्यान रखें। 1-2 बेड से शुरू करें। जैविक खाद का कारोबार गाँव में कम लागत से लाखों की कमाई का रास्ता है। इसकी बढ़ती माँग का फायदा उठाएँ और आय को नई ऊँचाइयों तक ले जाएँ।
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