कपास की फसल में गुलाबी सूंडी का अटैक? जानिए असरदार देसी और सस्ते समाधान

भारत में कपास की खेती बड़े पैमाने पर होती है, लेकिन गुलाबी सूंडी (Pink Bollworm) इस फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। ये छोटा सा कीट फूलों और टिंडों (बॉल) में घुसकर दानों को खा जाता है, जिससे कपास की मात्रा और क्वालिटी दोनों खराब हो जाती है। नतीजा, किसान भाइयों की मेहनत और कमाई पर पानी फिर जाता है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं। 2025 में कुछ देसी और आसान उपायों से आप बिना महंगे केमिकल के इस कीट पर काबू पा सकते हैं। आइए, जानते हैं कैसे।

गुलाबी सूंडी को कैसे पहचानें- kapas ki fasal me gulabi soondi ka deshi upay

खेत में अगर गुलाबी सूंडी का हमला हो, तो कुछ साफ लक्षण दिखते हैं। इन पर नजर रखें, ताकि सही समय पर कदम उठाया जा सके। सबसे पहले, फूल बिना वजह मुरझाने लगते हैं और जल्दी गिर जाते हैं। टिंडों का विकास रुक जाता है या वे अंदर से सड़ने लगते हैं। अगर आप टिंडा खोलकर देखें, तो दाने काले पड़ चुके होते हैं या गायब हो जाते हैं। टिंडे के अंदर गुलाबी रंग की छोटी-छोटी सूंडियां भी नजर आती हैं। ये संकेत देखते ही सतर्क हो जाएं।

देसी उपायों से गुलाबी सूंडी पर काबू

कपास को गुलाबी सूंडी से बचाने के लिए कुछ पुराने और आजमाए हुए देसी नुस्खे हैं, जो सस्ते होने के साथ-साथ बेहद असरदार भी हैं। इनका इस्तेमाल करके आप अपनी फसल को बचा सकते हैं।

नीम का काढ़ा: कीटों का काल

नीम की पत्तियों का काढ़ा गुलाबी सूंडी को भगाने में बहुत कारगर है। इसे बनाना आसान है। दो किलो नीम की ताजी पत्तियां लें और 10 लीटर पानी में अच्छे से उबाल लें। जब पानी ठंडा हो जाए, तो इसे छानकर किसी बोतल या डिब्बे में भर लें। अब इस काढ़े को खेत में पौधों पर छिड़कें। ये न सिर्फ सूंडी को भगाएगा, बल्कि दूसरे छोटे कीटों को भी दूर रखेगा। इसे हर 10-15 दिन में दोहराएं।

गोबर और गोमूत्र का देसी घोल

देसी गाय का गोबर और गोमूत्र आपके खेत का सबसे बड़ा हथियार हो सकता है। एक लीटर गोमूत्र और एक किलो ताजा गोबर लें। इसे 10 लीटर पानी में अच्छे से मिलाएं और किसी बर्तन में ढककर दो दिन तक रख दें। दो दिन बाद इस मिश्रण को छान लें और पौधों पर छिड़काव करें। ये घोल पौधों को ताकत देता है और गुलाबी सूंडी जैसे कीटों को पास नहीं आने देता। ये पूरी तरह जैविक है और फसल को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता।

फेरोमोन ट्रैप: सूंडी को जाल में फंसाएं

गुलाबी सूंडी को पकड़ने का एक बढ़िया तरीका है फेरोमोन ट्रैप। ये ट्रैप नर कीड़ों को अपनी ओर खींचते हैं और फंसा लेते हैं। इससे कीटों का प्रजनन रुक जाता है और अगली पीढ़ी कमजोर पड़ती है। अपने खेत में हर हेक्टेयर में 4-5 ट्रैप लगाएं। ये ट्रैप बाजार में आसानी से मिल जाते हैं और इनका इस्तेमाल भी आसान है। इसे लगाने से पहले अपने नजदीकी कृषि केंद्र से सलाह ले लें।

गहरी जुताई और खेत की सफाई

फसल कटाई के बाद खेत को अच्छे से साफ करना बहुत जरूरी है। गुलाबी सूंडी के लार्वा डंठलों और बचे हुए टिंडों में छिपे रहते हैं। इसलिए खेत की गहरी जुताई करें, ताकि ये लार्वा मिट्टी के नीचे दब जाएं या खत्म हो जाएं। बचे हुए डंठल, फूल या टिंडों को खेत में न छोड़ें। इन्हें इकट्ठा करके जला दें। ये छोटा सा कदम अगले सीजन में कीटों को कम करने में बड़ा काम करता है।

साथी फसल: कीटों को भटकाएं

कपास के साथ कुछ दूसरी फसलें लगाने से गुलाबी सूंडी का हमला कम हो सकता है। मसलन, अरहर, मूंग या उड़द जैसी दालों को कपास के बीच में बोएं। ये फसलें कीटों को भ्रम में डालती हैं, जिससे वे कपास पर कम हमला करते हैं। ये तरीका न सिर्फ कीटों को रोकता है, बल्कि खेत की मिट्टी को भी ताकत देता है और आपको अतिरिक्त फसल का फायदा मिलता है।

किसानों के लिए खास सलाह

गुलाबी सूंडी से बचाव के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। छिड़काव हमेशा सुबह जल्दी या शाम को करें, ताकि घोल का असर ज्यादा हो। हर 15-20 दिन में इन देसी उपायों को दोहराते रहें। खेत में हर हफ्ते जाकर पौधों की जांच करें। अगर कहीं टिंडे में छेद या सूंडी दिखे, तो उसे तुरंत हटाकर नष्ट कर दें। साथ ही, अपने आसपास के किसानों से भी बात करें और एक साथ मिलकर ये उपाय अपनाएं, ताकि पूरे इलाके में कीट कम हो।

इन फसलों पर दें खास ध्यान

गुलाबी सूंडी खास तौर पर कपास को निशाना बनाती है। अगर आप बीटी कॉटन या देसी कॉटन की खेती करते हैं, तो इस कीट पर पहले से नजर रखें। शुरुआती लक्षण दिखते ही देसी उपाय शुरू कर दें, वरना नुकसान बढ़ सकता है।

जैविक खेती है सही रास्ता

गुलाबी सूंडी से निपटने के लिए केमिकल की जगह देसी और जैविक उपाय ज्यादा फायदेमंद हैं। ये न सिर्फ सस्ते हैं, बल्कि मिट्टी, पानी और इंसानों को भी नुकसान नहीं पहुंचाते। खेती को टिकाऊ और कम लागत वाला बनाने के लिए ये उपाय अपनाएं। इससे आपकी फसल भी बचेगी और जेब पर बोझ भी नहीं पड़ेगा। थोड़ी सी सावधानी और मेहनत से आप कपास की अच्छी पैदावार ले सकते हैं।

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  • Rahul Maurya

    मेरा नाम राहुल है। मैं उत्तर प्रदेश से हूं और मैंने संभावना इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में शिक्षा प्राप्त की है। मैं Krishitak.com का संस्थापक और प्रमुख लेखक हूं। पिछले 3 वर्षों से मैं खेती-किसानी, कृषि योजनाएं, और ग्रामीण भारत से जुड़े विषयों पर लेखन कर रहा हूं।

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