हरियाणा के कर्नाल स्थित नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर ऑर्गेनिक फार्मिंग (NRCOF) ने किसानों के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्र ने 7 नई मसाला और सब्जी की वैरायटी जारी की हैं, जो रोग-प्रतिरोधी हैं और पैदावार में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दे सकती हैं। ये वैरायटी हल्दी, लहसुन, प्याज, टमाटर, बैंगन, मिर्च और धनिया की हैं। इनका मुख्य फोकस ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देना और रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल कम करना है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि इन नई वैरायटी को कई सालों की रिसर्च और फील्ड ट्रायल के बाद विकसित किया गया है। ये वैरायटी उत्तर भारत के मौसम और मिट्टी के लिए खासतौर पर तैयार की गई हैं। इनमें रोग-प्रतिरोधक क्षमता बहुत ज्यादा है, जिससे किसानों को फफूंद, वायरस और कीटों से होने वाले नुकसान से राहत मिलेगी। साथ ही पैदावार में अच्छी बढ़ोतरी होने से किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी।
हल्दी की नई वैरायटी
हल्दी की नई वैरायटी ‘NRCOF Turmeric-1’ और ‘NRCOF Turmeric-2’ में कुरकुमिन की मात्रा 6-7 प्रतिशत तक है, जो सामान्य वैरायटी से 1.5 से 2 गुना ज्यादा है। ये दोनों वैरायटी राइजोम रॉट और लीफ ब्लॉच रोग से काफी हद तक मुक्त हैं। फसल की अवधि 8-9 महीने है और औसत पैदावार 250-280 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंचती है। किसानों को कम दवाइयों में अच्छी क्वालिटी की हल्दी मिलेगी, जिसके दाम बाजार में भी ज्यादा मिलते हैं।
लहसुन और प्याज की वैरायटी
लहसुन की ‘NRCOF Garlic-1’ वैरायटी में क्लोव्स की संख्या 12-15 होती है और ये पर्पल ब्लॉच और व्हाइट रॉट रोग से प्रतिरोधी है। स्टोरेज में 8-9 महीने तक अच्छी रहती है। प्याज की ‘NRCOF Onion-1’ वैरायटी में प्याज की त्वचा पतली लेकिन मजबूत होती है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन में नुकसान कम होता है। ये वैरायटी पर्पल ब्लॉच और डाउनी मिल्ड्यू से काफी हद तक सुरक्षित है।
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टमाटर, बैंगन और मिर्च की वैरायटी
टमाटर की ‘NRCOF Tomato-1’ वैरायटी में फल बड़े और गूदे वाले होते हैं। ये टमाटर लीफ कर्ल वायरस और बैक्टीरियल विल्ट से प्रतिरोधी है। बैंगन की ‘NRCOF Brinjal-1’ वैरायटी में फल चमकदार और लंबे होते हैं। ये फ्रूट एंड शूट बोरर और बैक्टीरियल विल्ट से काफी हद तक मुक्त है। मिर्च की ‘NRCOF Chilli-1’ वैरायटी में तीखापन मध्यम से तेज होता है और ये वायरस तथा थ्रिप्स से प्रतिरोधी है।
धनिया की वैरायटी
धनिया की ‘NRCOF Coriander-1’ वैरायटी में पत्तियां ज्यादा हरी और चमकदार होती हैं। ये पाउडरी मिल्ड्यू और एफिड्स से काफी हद तक सुरक्षित है। फसल की अवधि 50-55 दिन है और पैदावार 15-18 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंचती है।
इन वैरायटी से किसानों को क्या फायदा
ये नई वैरायटी रोगों से बचाव के साथ-साथ पैदावार बढ़ाने में मदद करेंगी। ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसानों के लिए ये सबसे बढ़िया विकल्प हैं, क्योंकि इनमें रासायनिक दवाओं की जरूरत बहुत कम पड़ती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन वैरायटी को अपनाने से किसानों की लागत 15-20 प्रतिशत तक कम हो सकती है और मुनाफा बढ़ सकता है।
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