Kitchen Gardening: धनिया, भारतीय रसोई का दिल है। इसकी ताज़ी खुशबू और स्वाद हर खाने को लज़ीज़ बना देता है। लेकिन बाजार से लाया गया धनिया जल्दी सूख जाता है या सड़ जाता है, जिससे बार-बार बाजार जाना पड़ता है। घर पर धनिया उगाना इसका आसान और सस्ता हल है। यह न सिर्फ़ ताज़ा और जैविक होगा, बल्कि पैसे और समय की बचत भी करेगा। धनिया उगाना इतना आसान है, बस थोड़ी सी मेहनत, सही गमला, और देखभाल से आप अपनी बालकनी, छत, या खिड़की पर हर मौसम में हरा-भरा धनिया तैयार कर सकते हैं। आइए, जानते हैं कि इसे कैसे उगाएँ।
सही गमले का चयन
धनिया उगाने के लिए सबसे पहले सही गमले या कंटेनर की ज़रूरत होती है। ऐसा गमला चुनें, जिसकी गहराई 6 से 8 इंच हो, और चौड़ाई जितनी ज़्यादा हो, उतना बेहतर। चौड़ा गमला धनिया के पौधों को फैलने में मदद करता है। अगर गमला नहीं है, तो पुरानी बाल्टी, प्लास्टिक ट्रे, या कोई डिब्बा भी काम आएगा। बस ध्यान रखें कि गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छोटे-छोटे छेद हों, ताकि पानी जमा न हो। धनिया की जड़ें ज्यादा गहरी नहीं जातीं, इसलिए गहराई से ज़्यादा चौड़ाई मायने रखती है। गमले को साफ करें और उसमें छोटे कंकड़ बिछाएँ, ताकि मिट्टी का ड्रेनेज बेहतर हो।
ये भी पढ़ें – Gardening Tips: घर पर उगाएं शुद्ध हरा धनिया बिना खर्च के, बस अपनाएं ये आसान घरेलू तरीका
मिट्टी की सही तैयारी
धनिया के लिए मिट्टी का भुरभुरा और पोषक तत्वों से भरपूर होना ज़रूरी है। सामान्य बगीचे की मिट्टी में गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिलाएँ, जो पौधों को पोषण देती है। साथ ही, थोड़ी रेत या कोकोपीट डालें, ताकि मिट्टी हल्की रहे और पानी जमा न हो। मिट्टी का मिश्रण ऐसा हो कि वह नमी तो बनाए रखे, लेकिन गीला न रहे। मिट्टी तैयार करते समय 50% मिट्टी, 30% गोबर खाद, और 20% रेत या कोकोपीट का अनुपात रखें। अगर मिट्टी बहुत सख्त है, तो उसे अच्छे से भुरभुरा करें। तैयार मिट्टी को गमले में डालें और ऊपर से हल्का दबाएँ, ताकि वह समतल हो जाए।
सही बीज का चयन और बुआई
धनिया के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले बीज चुनें। बाजार में धनिया के बीज आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन देसी धनिया के बीज ज़्यादा टिकाऊ और स्वादिष्ट होते हैं। बीजों को बुआई से पहले 4-5 घंटे पानी में भिगो लें, ताकि अंकुरण तेज़ हो। गमले में मिट्टी भरने के बाद, बीजों को 1-2 इंच की दूरी पर छिटककर बोएँ। बीजों को ज्यादा गहरा न दबाएँ, बस आधा इंच मिट्टी से ढकें। बुआई के बाद हल्का पानी छिड़कें, ताकि मिट्टी नम रहे। गमले को ऐसी जगह रखें, जहाँ सुबह की हल्की धूप आए। तेज़ धूप से बचाएँ, क्योंकि इससे पौधे जल सकते हैं। 6-7 दिन में छोटे-छोटे पौधे दिखने लगेंगे।
ये भी पढ़ें – जबरदस्त खुशबु, होटलों और बाजार में बढ़ रही है मांग, कीजिए इस विदेशी धनिया की खेती, होगी छप्परफाड़ कमाई
देखभाल और पानी की जरुरत
धनिया के पौधों को नियमित देखभाल की ज़रूरत होती है। हर सुबह और शाम हल्का पानी छिड़कें, ताकि मिट्टी नम रहे। पानी ज़्यादा न डालें, वरना जड़ें सड़ सकती हैं। अगर मौसम गर्म है, तो दिन में एक बार पानी देना काफी है। पौधों को 4-5 घंटे हल्की धूप मिलनी चाहिए, लेकिन दोपहर की तेज़ धूप से बचाएँ। अगर पौधे बहुत घने हो गए हैं, तो कुछ कमज़ोर पौधों को हटाकर जगह बनाएँ, ताकि बाकी पौधे अच्छे से बढ़ सकें। 3-4 हफ्तों में धनिया की पत्तियाँ तोड़ने लायक हो जाएँगी। सिर्फ़ ऊपरी पत्तियाँ तोड़ें, ताकि पौधा बढ़ता रहे।
कीट और रोगों से बचाव के तरीके
धनिया के पौधों को कीट और रोगों से बचाना ज़रूरी है। चीटियाँ, तेला (एफिड्स), या छोटे कीड़े धनिया को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इनसे बचने के लिए नीम के तेल का घोल (2 मिली प्रति लीटर पानी) बनाकर हफ्ते में एक बार छिड़कें। यह जैविक और सुरक्षित तरीका है। अगर पत्तियाँ पीली पड़ रही हैं, तो मिट्टी में गोबर खाद की मात्रा बढ़ाएँ। फफूंदी से बचने के लिए मिट्टी में पानी जमा न होने दें। जैविक खाद और नीम का तेल धनिया को स्वस्थ रखते हैं और रासायनिक दवाओं की ज़रूरत कम करते हैं।
ताज़ा धनिया, मुनाफे का रास्ता
घर पर धनिया उगाना न सिर्फ़ आसान है, बल्कि यह रसोई को ताज़गी और खाने को स्वाद देता है। सही गमला, पोषक मिट्टी, और थोड़ी देखभाल से आप हर मौसम में जैविक धनिया तैयार कर सकते हैं। यह न सिर्फ़ बाजार के खर्चे बचाता है, बल्कि पर्यावरण को भी स्वच्छ रखता है। अगर आप ज़्यादा धनिया उगाएँ, तो इसे स्थानीय बाजार में बेचकर अतिरिक्त कमाई भी कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें – हाइड्रोपोनिक सीलेंट्रो(धनिया), बिना मिट्टी के धनिया उगाने का देसी तरीका