आलू की खेती में नया मुनाफा कमाने का मौका! केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI), शिमला ने कुफ़री 3797 नाम की एक उन्नत प्रोसेसिंग किस्म विकसित की है, जो चिप्स और फ्रेंच फ्राई बनाने वाली कंपनियों की पहली पसंद बन रही है। यह किस्म 100 से 110 दिन में तैयार होकर 300 से 350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की बंपर पैदावार देती है। कम चीनी, ज्यादा ड्राई मैटर, और शानदार फ्राइंग रंग के साथ यह किस्म किसानों और प्रोसेसिंग उद्योग दोनों के लिए वरदान है। पंजाब से लेकर गुजरात तक, कुफ़री 3797 किसानों की कमाई को नई उड़ान दे रही है।
वैज्ञानिक रिसर्च से बना प्रोसेसिंग का हीरो
कुफ़री 3797 आलू को CPRI ने प्रोसेसिंग उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखकर हाइब्रिड सिलेक्शन तकनीक से तैयार किया है। इसके लंबे, अंडाकार कंदों का छिलका हल्का भूरा और गूदा क्रीम सफेद होता है। इसमें 21 से 23 प्रतिशत ड्राई मैटर और कम रिड्यूसिंग शुगर होती है, जो चिप्स और फ्रेंच फ्राई को क्रिस्पी और हल्का सुनहरा बनाती है। CPRI के वैज्ञानिक डॉ. संजय रावत बताते हैं कि इस किस्म को विशेष रूप से कम तापमान पर स्टोरेज और प्रोसेसिंग के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे 80 प्रतिशत तक कंद प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त होते हैं। यह किस्म बाजार में पारंपरिक किस्मों से 20 से 30 प्रतिशत ज्यादा दाम दिलाती है।
ये भी पढ़ें- कुफ़री आलंकार अगेती आलू की खेती: 75 दिन में तैयार, 2 लाख से ज्यादा मुनाफा
बुवाई का समय और तरीका
उत्तर भारत में कुफ़री 3797 की अगेती बुवाई अक्टूबर के पहले पखवाड़े में और सामान्य बुवाई अक्टूबर मध्य से नवंबर की शुरुआत तक करें। पहाड़ी क्षेत्रों में मार्च से मई तक बुवाई उपयुक्त है। प्रति हेक्टेयर 25 से 30 क्विंटल मध्यम आकार के अंकुरित कंदों की जरूरत होती है। बुवाई से पहले कंदों को कार्बेन्डाजिम (2 ग्राम प्रति किलो) और ट्राइकोडर्मा (5 ग्राम प्रति किलो) से उपचारित करें। कतारों में बुवाई करें, जिसमें पंक्तियों के बीच 60 सेंटीमीटर और पौधों के बीच 20 सेंटीमीटर की दूरी रखें। पंजाब के एक किसान, गुरदीप सिंह, ने बताया कि सही बीज उपचार और कतार बुवाई ने उनकी फसल को झुलसा रोग से बचाया और उपज 10 प्रतिशत बढ़ी।
खाद और पानी का प्रबंधन
खेत में 25 टन गोबर की खाद, 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 80 किलोग्राम फॉस्फोरस, और 100 किलोग्राम पोटाश डालें। नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के समय और बाकी कंद बनने के समय दें। पहली सिंचाई बुवाई के 7 दिन बाद करें, फिर हर 10 से 12 दिन पर पानी दें। फसल खुदाई से 10 दिन पहले सिंचाई बंद करें, ताकि कंदों की गुणवत्ता बनी रहे। CPRI की 2024 की रिसर्च के अनुसार, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग का इस्तेमाल पानी की 30 प्रतिशत बचत करता है और कंदों का आकार बढ़ाता है। यह प्रोसेसिंग के लिए कंदों को और उपयुक्त बनाता है।
रोग और कीटों से बचाव
कुफ़री 3797 आलू में झुलसा रोग (लेट ब्लाइट) और अर्ली ब्लाइट का खतरा रहता है। अर्ली ब्लाइट के लिए मैनकोजेब (2.5 ग्राम प्रति लीटर) और लेट ब्लाइट के लिए रिडोमिल गोल्ड या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (3 ग्राम प्रति लीटर) का छिड़काव करें। तेला और थ्रिप्स जैसे कीटों से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड (0.3 मिली प्रति लीटर) या डायमेथोएट का इस्तेमाल करें। वायरस से बचने के लिए प्रमाणित बीज और रोगग्रस्त पौधों को तुरंत हटाएँ। CPRI की सलाह है कि जैविक नियंत्रण, जैसे नीम तेल (5 मिली प्रति लीटर) और ट्राइकोडर्मा का नियमित उपयोग, रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करता है और पर्यावरण को सुरक्षित रखता है।
ये भी पढ़ें- कुफरी पुखराज आलू: सिर्फ 75 दिन में 300 क्विंटल/हेक्टेयर उपज, कमाई में नंबर-1
बाजार में माँग
कुफ़री 3797 आलू से प्रति हेक्टेयर 300 से 350 क्विंटल उपज मिलती है, जिसमें 80 प्रतिशत कंद प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त होते हैं। प्रोसेसिंग ग्रेड आलू का बाजार भाव 10 से 15 रुपये प्रति किलो रहता है, जिससे 3 से 5 लाख रुपये की कमाई हो सकती है। खेती की लागत, जिसमें बीज, खाद, और मजदूरी शामिल है, 1 से 1.5 लाख रुपये आती है। इस हिसाब से शुद्ध मुनाफा 2 से 3.5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर हो सकता है। CPRI की 2023 की स्टडी के अनुसार, कुफ़री 3797 की माँग भारत के फूड प्रोसेसिंग उद्योग में 15 प्रतिशत सालाना बढ़ रही है।
क्यों है खास कुफ़री 3797 आलू?
कुफ़री 3797 आलू प्रोसेसिंग उद्योग और किसानों के लिए एकदम सटीक है। इसका कम चीनी स्तर और उच्च ड्राई मैटर चिप्स, फ्रेंच फ्राई, और फ्लेक्स बनाने के लिए आदर्श है। यह किस्म उत्तर भारत (पंजाब, हरियाणा, यूपी), मध्य भारत (मध्य प्रदेश, गुजरात), और पहाड़ी क्षेत्रों (हिमाचल, उत्तराखंड) में सफलतापूर्वक उगाई जा रही है। CPRI ने इसे ठंडे और मध्यम तापमान (15-25°C) वाले क्षेत्रों के लिए अनुशंसित किया है। अगर आप इस किस्म की खेती शुरू करना चाहते हैं, तो CPRI या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से प्रमाणित बीज और तकनीकी सलाह लें। कुफ़री 3797 न सिर्फ खेतों को समृद्ध करता है, बल्कि किसानों को प्रोसेसिंग उद्योग का सितारा बनाता है।
ये भी पढ़ें- कुफरी अशोक आलू: सिर्फ 80 दिन में तैयार, 250 क्विंटल/हेक्टेयर तक उपज! अगैती खेती से मुनाफा ही मुनाफा