किसान भाइयों, आलू भारत की सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसलों में से एक है, जो हर रसोई का हिस्सा है। अगर आप अक्टूबर में बुवाई कर जल्दी फसल और मुनाफा चाहते हैं, तो कुफ़री आलंकार अगेती आलू आपके लिए बेहतरीन साथी है। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI), शिमला द्वारा विकसित यह अगेती किस्म 70-75 दिन में पककर 250-280 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज देती है।
इसके हल्के क्रीमी छिलके और सफेद गूदे वाले कंद खाने के लिए शानदार हैं। उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, और हरियाणा में यह किस्म खूब लोकप्रिय है। बिहार के पटना के किसान रमेश चौधरी ने बताया कि इसकी खेती से उनकी फसल दिसंबर में तैयार हुई और 11 रुपये/किलो के दाम से 2 लाख रुपये का मुनाफा हुआ। यह किस्म तेज़ अंकुरण और समान कंदों के साथ किसानों का भरोसा जीत रही है।
कुफ़री आलंकार की अनमोल खूबियाँ
कुफ़री आलंकार अगेती आलू की सबसे बड़ी ताकत इसकी जल्दी पकने की क्षमता है। यह 70-75 दिन में कटाई के लिए तैयार हो जाती है, जिससे किसान दिसंबर-जनवरी में बाजार में ऊँचे दाम पा सकते हैं। इसके कंद अंडाकार, समान आकार के, और हल्के क्रीमी छिलके वाले होते हैं, जबकि सफेद गूदा उबालने और सब्जी बनाने के लिए आदर्श है। यह प्रसंस्करण (जैसे चिप्स या फ्राइज़) के लिए कम उपयुक्त है, लेकिन घरेलू खपत के लिए बाजार में खूब बिकता है।
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यह वायरस Y और अर्ली ब्लाइट के प्रति आंशिक सहनशील है, साथ ही झुलसा रोग से भी मध्यम सुरक्षा देती है। अनुकूल परिस्थितियों में यह 300 क्विंटल/हेक्टेयर तक उपज दे सकती है। पंजाब के जालंधर में किसानों ने इसकी खेती से प्रति हेक्टेयर 2.5 लाख रुपये तक कमाए। इसका तेज़ अंकुरण और समान कंद बाजार में इसकी मांग बढ़ाते हैं।
खेती की सटीक रणनीति
कुफ़री आलंकार अगेती आलू की खेती के लिए दोमट या रेतीली दोमट मिट्टी उपयुक्त है। खेत को दो-तीन बार जोतकर समतल करें और 20-25 टन गोबर खाद प्रति हेक्टेयर डालें। बुवाई के लिए 25-30 क्विंटल प्रमाणित बीज प्रति हेक्टेयर लें। बीज को कार्बेन्डाजिम (2 ग्राम/किलो) और मैनकोज़ेब (3 ग्राम/किलो) से उपचारित करें, ताकि बीजजनित रोगों से बचाव हो। अक्टूबर के पहले सप्ताह तक अगेती बुवाई करें। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45-60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 15-20 सेंटीमीटर रखें।
उर्वरक के लिए 120 किलो नाइट्रोजन, 80 किलो फॉस्फोरस, 100 किलो पोटाश, और 20 किलो सल्फर प्रति हेक्टेयर डालें। आधी नाइट्रोजन बुवाई के समय और बाकी 30 दिन बाद टॉप ड्रेसिंग में दें। पहली सिंचाई बुवाई के 7 दिन बाद करें, फिर हर 10-12 दिन पर हल्की सिंचाई करें। खुदाई से 10 दिन पहले सिंचाई रोक दें। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में इस तकनीक से उपज 25% बढ़ी।
कीट और रोगों से रक्षा
कुफ़री आलंकार अर्ली ब्लाइट और वायरस Y के प्रति आंशिक सहनशील है, लेकिन सावधानी जरूरी है। अर्ली ब्लाइट के लिए मैनकोज़ेब (2.5 ग्राम/लीटर) का छिड़काव 35-40 दिन बाद करें। झुलसा रोग के लिए रिडोमिल गोल्ड (2 ग्राम/लीटर) या मैनकोज़ेब का 10-15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें। वायरल रोगों से बचाव के लिए रोगग्रस्त पौधों को उखाड़कर नष्ट करें और स्वस्थ बीज लें। सफेद मक्खी और एफिड के लिए इमिडाक्लोप्रिड (0.3 मिली/लीटर) का छिड़काव करें।
कटवा कीड़े से बचाव के लिए अंतिम जुताई में क्यूनालफॉस (1.5% चूर्ण, 25 किलो/हेक्टेयर) मिलाएँ। निराई-गुड़ाई 25-30 दिन बाद करें और मिट्टी चढ़ाएँ, ताकि कंद हरे न हों। हरियाणा के सोनीपत में इन उपायों से उपज 20% बढ़ी। फसल को 70-75 दिन में काटें, जब पत्तियाँ पीली पड़ने लगें।
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बाजार में मांग
कुफ़री आलंकार के कंदों का सफेद गूदा और हल्का क्रीमी छिलका इसे घरेलू खपत के लिए खास बनाता है। यह प्रसंस्करण के लिए कम उपयुक्त है, लेकिन सब्जी और उबालने के लिए बाजार में खूब बिकता है। इसके कंद 2-3 महीने तक सामान्य भंडारण में बिना अंकुरण या सिकुड़न के रहते हैं। दिसंबर-जनवरी में आलू की कमी के कारण यह 10-12 रुपये/किलो का दाम पाता है। बिहार के मुजफ्फरपुर में किसानों ने इसके बाजार मांग और भंडारण की तारीफ की।
मुनाफे का बड़ा मौका
कुफ़री आलंकार अगेती आलू की बुवाई से किसान दिसंबर-जनवरी में फसल बेचकर 10-12 रुपये/किलो का दाम पा सकते हैं। 250-280 क्विंटल/हेक्टेयर उपज से 2.5-3.4 लाख रुपये की कमाई हो सकती है। लागत 80,000-1 लाख रुपये/हेक्टेयर आती है, जिसमें बीज, खाद, और मजदूरी शामिल है। शुद्ध मुनाफा 1.5-2.4 लाख रुपये तक हो सकता है।
CPRI के एक अध्ययन के अनुसार, इस किस्म ने उत्तर भारत में अगेती आलू की खेती को 18% अधिक लाभकारी बनाया। पंजाब के लुधियाना में किसानों ने इसकी तेजी और रोग सहनशीलता की सराहना की। किसान भाई CPRI, शिमला, या नजदीकी कृषि विश्वविद्यालय से प्रमाणित बीज और सलाह लें। कुफ़री आलंकार से कम समय में बड़ा मुनाफा कमाएँ।
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