इस सब्जी की खेती कीजिए, सबसे कम लागत में हो जाती है तैयार, एक एकड़ में कमाई होगी 3 लाख

किसान भाइयों, कुंदरू की खेती कम लागत में मोटी कमाई का बेहतरीन जरिया है, कुंदरू, जिसे आइवी गॉर्ड या टेंडली भी कहते हैं, एक बहुवर्षीय लता वाली सब्जी है, जो एक बार लगाने पर 4-5 साल तक फल देती है, इसके छोटे, हरे, खट्टे-मीठे फल बाजार में 40-80 रुपये प्रति किलो बिकते हैं, और गर्मियों, मॉनसून में डिमांड बढ़ने से दाम 100 रुपये तक पहुँचते हैं, ये बिहार, यूपी, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक में खूब उगाया जाता है, 45-50 दिन में फसल तैयार होती है, और एक हेक्टेयर से 300-450 क्विंटल तक पैदावार मिलती है, छोटे खेतों, बगीचों में शुरू करें, और इस सब्जी से अपनी आय को दोगुना करें।

खेत की सही तैयारी

कुंदरू की खेती (Kundru Ki Kheti)  के लिए खेत को सही तरीके से तैयार करना जरूरी है, बलुई दोमट, भुरभुरी मिट्टी जिसमें जल निकासी अच्छी हो, इसके लिए बेस्ट है, मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए, खेत की गहरी जुताई करें, 8-10 टन गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर डालें, अप्रैल-मई या जुलाई- अगस्त में खेत तैयार करें, क्योंकि मॉनसून इसका सबसे अच्छा समय है, 25-35 डिग्री तापमान पौधों की वृद्धि के लिए उपयुक्त है, खरपतवार हटाने के लिए जुताई के बाद हल्की सिंचाई करें, मचान विधि के लिए 1-1.5 मीटर ऊँचे बाँस, तार का ढाँचा बनाएँ, सही तैयारी से पैदावार बढ़ती है, और लागत 20-30% कम होती है।

बीज और रोपण का तरीका

इसकी खेती बीज या कटिंग से की जा सकती है, उन्नत किस्में जैसे इंदिरा कुंदरू-5, सुलभा (सीजी-23), काशी भरपूर (VRSIG-9) चुनें, प्रति हेक्टेयर 2-3 किलो बीज या 2000-2500 कटिंग काफी हैं, बीज को नर्सरी में 1-2 सेमी गहराई पर बोएँ, या 10-20 सेमी लंबी, 5-7 गांठ वाली कटिंग 45 डिग्री कोण पर लगाएँ, जुलाई- अगस्त में रोपाई करें, पौधों की दूरी 1 मीटर (लाइन) और 40-50 सेमी (पौधे) रखें, 10 मादा पौधों पर 1 नर पौधा लगाएँ, ताकि परागण अच्छा हो, बीज को जीवामृत (500 मिलीलीटर प्रति किलो) से उपचारित करें, 15-30 दिन में अंकुरण होता है, सही रोपण से फल 40-50 दिन में आने शुरू होते हैं।

देखभाल और सिंचाई कैसे करें

कुंदरू की देखभाल आसान है, लेकिन सही तरीके जरूरी हैं, गर्मी में 4-5 दिन, सर्दी में 8-10 दिन के अंतर पर सिंचाई करें, ड्रिप सिस्टम से पानी की 20-30% बचत होती है, हर 15 दिन में जीवामृत (200 लीटर प्रति हेक्टेयर) छिड़कें, 2 टन वर्मी कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर डालें, मचान पर बेल चढ़ाएँ, ताकि फल जमीन को न छुएँ, कीट जैसे फल मक्खी, लाल भृंग से बचाने के लिए नीम का तेल (5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी) या गोमूत्र (10% घोल) छिड़कें, फफूंद रोग के लिए 0.1% बाविस्टिन का घोल उपयोग करें, 20-25 दिन बाद गुड़ाई करें, खरपतवार हटाएँ, सही देखभाल से एक पौधा 20-25 किलो फल देता है।

कटाई का उचित समय

इसकी पहली कटाई 45-50 दिन में शुरू होती है, जब फल हरे, चमकदार, 2-5 सेमी लंबे हों, सुबह के समय काटें, ताकि ताजगी बनी रहे, हर 4-5 दिन में कटाई करें, लाल होने से पहले तोड़ें, वरना स्वाद बदल जाता है, एक हेक्टेयर से 300-450 क्विंटल फल मिलते हैं, कटाई के बाद फलों को छाया में बंडल करें, और 2-3 दिन में बाजार भेजें, क्योंकि ये जल्दी खराब हो सकते हैं, साल में 8-10 महीने (मार्च-नवंबर) उत्पादन मिलता है, सही समय पर कटाई से बाजार में 40-80 रुपये प्रति किलो दाम मिलता है, ये मेहनत का सबसे बड़ा इनाम है।

मुनाफा और बाजार का हिसाब

कुंदरू की खेती से मोटी कमाई संभव है, एक हेक्टेयर में लागत 20-30 हजार रुपये लगती है, और 300-450 क्विंटल फल मिलते हैं, 40-80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से 12-36 लाख रुपये की कमाई हो सकती है, लागत निकालकर 11-35 लाख मुनाफा बचता है, मंडियों में 3000-5000 रुपये प्रति क्विंटल का रेट मिलता है, लोकल मार्केट, सुपरमार्केट, या ऑनलाइन बेचें, ऑर्गेनिक कुंदरू की डिमांड बढ़ रही है, जिससे दाम 20-30% ज्यादा मिलते हैं, सरकार की बागवानी सब्सिडी, प्रशिक्षण का फायदा उठाएँ, छोटे स्तर पर 500-1000 पौधों से शुरू करें, ये खेती लंबे समय तक कमाई का जरिया बनती है।

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  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

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