Litchi Cultivation Tips : किसान साथियों, लीची की मिठास का हर कोई दीवाना है, लेकिन यही मिठास कीटों को भी अपनी ओर खींचती है। जब लीची के फल बनने शुरू होते हैं, तो कीट इनमें घुसकर अपना घर बना लेते हैं। बाहर से फल साफ-सुथरा दिखता है, पर अंदर से खराब हो जाता है। इसका वजन कम रहता है, साइज छोटा हो जाता है, और मेहनत बेकार चली जाती है।
यूपी का सहारनपुर जिला फलों की बागवानी के लिए मशहूर है, और यहाँ के किसान अब लीची की खेती की ओर बढ़ रहे हैं। जिले के कई इलाकों में लीची के बाग तैयार हो चुके हैं, और इनमें बौर भी खूब आया है। बौर के बाद अब फल बनने का वक्त है, लेकिन यही वो समय है जब कीटों का हमला शुरू होता है। अगर अभी से सावधानी न बरती, तो फसल को बड़ा नुकसान हो सकता है।
कीट क्यों बनते हैं मुसीबत?
सहारनपुर के कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी प्रोफेसर डॉ. आईके कुशवाहा बताते हैं कि इस बार लीची के पेड़ों पर बौर अच्छा आया है, और जल्द ही ये फल में बदल जाएगा। लेकिन फल बनते वक्त एक खास कीट पेड़ से फल में चला जाता है, और उसे अंदर से खराब कर देता है। पिछले साल जिन बागों में ये कीट दिखा था, वहाँ इस बार खतरा ज्यादा है। बाहर से लीची ठीक लगती है, पर अंदर से खोखली हो जाती है, जिससे वजन और साइज पर असर पड़ता है। ये कीट लीची की मिठास और नमी को पसंद करता है, इसलिए फल बनते ही इसमें घुस जाता है।
कीटों से बचाव के कारगर तरीके
डॉ. कुशवाहा कहते हैं कि कीटों से लीची को बचाने के लिए अभी से कीटनाशक का छिड़काव शुरू करें। आधा ग्राम इमामेक्टिन को एक लीटर पानी में मिलाकर पेड़ों पर छिड़कें। इससे कीट मर जाएँगे, और फल सुरक्षित रहेंगे। इसके अलावा एक और तरीका है कि प्रोफेनोफॉस को एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। ये दोनों तरीके आजमाने से निश्चित फायदा होगा। वेब सर्च से पता चला कि नीम का तेल भी कीटों को भगाने में कारगर है। पाँच मिलीलीटर नीम तेल को एक लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें, ये कुदरती तरीका है और फल को नुकसान भी नहीं करता। फल बनने से पहले ये सारे काम शुरू कर दें, ताकि कीटों को मौका ही न मिले।
बाग की देखभाल कैसे करें?
पिछले साल जिन बागों में कीट दिखे थे, वहाँ रोज पेड़ों की जाँच करें। अगर पत्तियाँ पीली पड़ रही हों या फल छोटे रह जाएँ, तो समझ लें कि कीट लग गया है। बाग में साफ-सफाई भी जरूरी है। सूखे पत्ते और गंदगी हटाएँ, क्योंकि कीट इन्हीं में छिपकर पनपते हैं। नीम तेल के साथ-साथ बाग के आसपास पानी जमा न होने दें, ये भी कीटों को रोकने में मदद करता है। सहारनपुर में लीची की बागवानी इसलिए खास है, क्योंकि यहाँ की मिट्टी और मौसम इसके लिए बहुत अच्छा है। बौर का आना दिखाता है कि फसल शानदार हो सकती है।
फायदा क्या होगा?
कीटों से बचाव करके लीची का वजन और साइज अच्छा रहेगा। फल मिठास से भरपूर होगा, और बाजार में अच्छा दाम मिलेगा। मेहनत का पूरा फल हाथ आएगा, और खेती में नया जोश आएगा। सहारनपुर की लीची को कीटों से बचाना मतलब अपनी कमाई को सुरक्षित करना है। अब वक्त है कि बाग की देखभाल शुरू करें। बौर से फल बनने तक नजर रखें, और कीटनाशक तैयार करें। कीटों को मौका न दें, ताकि आपकी लीची की मिठास हर घर तक पहुँचे।
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