Maharashtra Kisan Andolan 2025: महाराष्ट्र के नागपुर में हाल ही में एक बड़ा किसान आंदोलन ने जोर पकड़ा है, जहाँ हजारों किसान नेशनल हाईवे पर जाम करके बैठ गए हैं। यह प्रदर्शन पंजाब-हरियाणा तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के किसानों की एकजुट आवाज का प्रतीक बन गया है। पूर्व मंत्री बच्चू काडू के नेतृत्व में शुरू हुए ‘महा-एल्गार मोर्चा’ में किसान MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) गारंटी कानून, सोयाबीन की खरीद, कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन की मांग कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्रियों के उस बयान का यह सीधा जवाब है, जिसमें कहा गया था कि MSP का मुद्दा सिर्फ पंजाब-हरियाणा तक सीमित है। हकीकत यह है कि आज पूरे देश का किसान परेशान है, और यदि सभी एकजुट होकर सड़क पर उतर आएं, तो सरकार को 24 घंटों में घुटनों पर आना पड़ सकता है। आइए, सम्मानजनक और सरल भाषा में जानें कि नागपुर का यह आंदोलन क्या है, किसान क्या मांग रहे हैं और इसका राष्ट्रीय महत्व क्या है।
नागपुर आंदोलन का उदय, महाराष्ट्र के किसानों का गुस्सा
महाराष्ट्र में किसानों का यह आंदोलन 27 अक्टूबर को अमरावती के चंदूरबाजार से शुरू हुआ और 28 अक्टूबर को नागपुर पहुँचकर जोर पकड़ लिया। बच्चू काडू की प्रहार जनशक्ति पार्टी के नेतृत्व में हजारों किसान ट्रैक्टरों और बैलगाड़ियों पर सवार होकर नागपुर-हैदराबाद नेशनल हाईवे (NH-44) पर जाम कर बैठे। प्रदर्शनकारियों ने सड़कें अवरुद्ध कर दीं, जिससे ट्रैफिक जाम हो गया। काडू ने कहा, “हम 100% कर्ज माफी, सोयाबीन के लिए ₹6,000 प्रति एकड़ सहायता, हर फसल पर 20% MSP बोनस और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों का पूर्ण कार्यान्वयन चाहते हैं।” आंदोलन में NCP (शरद पवार गुट), किसान सभा और राजू शेट्टी जैसे नेता शामिल हैं। किसानों ने कहा कि असमय वर्षा से सोयाबीन फसल बर्बाद हो गई, लेकिन सरकार की भावांतर योजना से कोई राहत नहीं मिली।
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MSP गारंटी कानून की मांग, सिर्फ पंजाब-हरियाणा का मुद्दा नहीं
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय मंत्रियों के उस बयान का सीधा जवाब दिया, जिसमें कहा गया था कि MSP गारंटी कानून का मुद्दा पंजाब-हरियाणा तक सीमित है। बच्चू काडू ने कहा, “यह पूरे देश का किसान है, जो MSP की कानूनी गारंटी चाहता है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में भी सोयाबीन, मूंगफली और अन्य फसलों का सही मूल्य नहीं मिल रहा।” किसान MSP को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाने की मांग कर रहे हैं, ताकि व्यापारियों की मनमानी न हो। महाराष्ट्र में सोयाबीन का उत्पादन 90% महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में होता है, लेकिन भावांतर योजना से किसान ठगे जा रहे हैं।
कर्ज माफी और फसल नुकसान का मुआवजा, किसानों की पुकार
आंदोलन की दूसरी प्रमुख मांग है कर्ज माफी। महाराष्ट्र में असमय वर्षा से लाखों हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई। लातूर के किसान सुरेश चौहान ने बताया, “दो दिनों की भारी बारिश से सोयाबीन की फसल डूब गई, लेकिन मुआवजा नहीं मिला।” काडू ने मांग की है कि पूर्ण कर्ज माफी हो, जिसमें वित्तीय रूप से सक्षम किसानों को छोड़कर गरीब किसानों को प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा, कर्ज माफी के लिए 9 सदस्यीय कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया है, जो अप्रैल 2026 तक रिपोर्ट देगी। कर्ज माफी जून 2026 तक लागू होगी।
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आंदोलन का रूप और प्रभाव
आंदोलन में ट्रैक्टर मार्च और सड़क जाम के माध्यम से किसानों ने अपनी एकजुटता दिखाई। नागपुर में NH-44 पर जाम से ट्रैफिक प्रभावित हुआ, लेकिन पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से संभाला। काडू ने कहा, “हम मुंबई नहीं जाएँगे, नागपुर में ही बात करेंगे।” आंदोलन को NCP (शरद पवार गुट), किसान सभा और राजू शेट्टी का समर्थन मिल रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसान नेताओं से 2 घंटे की बैठक की और कमेटी गठित करने का आश्वासन दिया। यह आंदोलन महाराष्ट्र के किसानों की लंबे समय की पीड़ा को उजागर कर रहा है।
राष्ट्रीय स्तर का महत्व, पूरे देश का किसान एकजुट
नागपुर का यह आंदोलन साबित करता है कि MSP का मुद्दा पंजाब-हरियाणा तक सीमित नहीं। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के किसान भी कर्ज, फसल नुकसान और सही मूल्य के लिए लड़ रहे हैं। काडू ने कहा, “आज पूरे देश का किसान परेशान है। यदि सभी एकजुट हो जाएँ, तो सरकार झुक जाएगी।” यह आंदोलन स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग को मजबूत कर रहा है। नागपुर का किसान आंदोलन महाराष्ट्र के किसानों की एकजुट आवाज है। MSP गारंटी कानून, कर्ज माफी और फसल नुकसान का मुआवजा – ये मांगें पूरे देश के किसानों की हैं।
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