बुवाई के 72 घंटे बाद मक्का के खेत में डाल दें 60 ग्राम ये दवा, खरपतवार हो जाएंगे छूमंतर

Maize Farming Tips: मार्च का महीना आते ही उत्तर प्रदेश में आलू और सरसों की कटाई खत्म हो जाती है और किसान भाई मक्के की बुवाई में जुट जाते हैं। मक्का कम दिनों में अच्छी पैदावार देता है, लेकिन इसके खेतों में खरपतवार बड़ी मुसीबत बनते हैं। अगर बुवाई के बाद सही उपाय किए जाएँ, तो खरपतवार की समस्या से आसानी से निजात पाई जा सकती है। ये खरपतवार मक्के के पौधों के साथ पानी, पोषण और रोशनी के लिए लड़ते हैं, जिससे 30% तक उत्पादन घट सकता है। आइए, मक्के की खेती में खरपतवार से बचाव के आसान टिप्स को समझते हैं।

खरपतवार का नुकसान

खरपतवार मक्के के पौधों के लिए बिन बुलाए मेहमान हैं। ये पौधों के साथ पानी, खाद और सूरज की रोशनी की जंग लड़ते हैं। इससे मक्के की बढ़त रुक जाती है, पत्तियाँ पीली पड़ने लगती हैं और पैदावार पर बुरा असर पड़ता है। अगर इन्हें शुरू में ही काबू न किया जाए, तो 30% तक उत्पादन कम हो सकता है। बुवाई के वक्त सही कदम उठाएँ, तो ये परेशानी खेत में सिर नहीं उठा पाएगी।

खरपतवार रोकने का आसान उपाय

मक्के के खेत में खरपतवार को रोकने के लिए “पायरोक्सासल्फोन 85% डब्ल्यू.जी.” नाम का खरपतवारनाशी बढ़िया काम करता है। ये दवा खरपतवार को उगने से पहले ही खत्म कर देती है। बुवाई के 72 घंटे के अंदर इसका छिड़काव करें। 60 ग्राम दवा को 250 लीटर पानी में घोलकर खेत में छिड़क दें। ये मिट्टी के ऊपर एक परत बनाती है, जिससे खरपतवार के बीज जम ही नहीं पाते। अगर कोई खरपतवार उग भी जाए, तो पहली सिंचाई में वो खुद मर जाता है।

छिड़काव का सही तरीका

पायरोक्सासल्फोन का छिड़काव करते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखें। बुवाई के 3 दिन के अंदर इसे इस्तेमाल करें, ताकि खरपतवार शुरू से ही काबू में रहे। छिड़काव के दौरान साइड की ओर या पीछे की तरफ चलते हुए दवा डालें, जिससे मिट्टी की परत न टूटे। ये परत खरपतवार के बीज को अंकुरित होने से रोकती है। साफ मौसम में छिड़काव करें और पूरे खेत में एकसमान दवा पहुँचाएँ। ये तरीका मक्के को खरपतवार से आजाद रखेगा।

खेत की तैयारी और देखभाल

मक्के की बुवाई से पहले खेत को मिट्टी पलटने वाले हल से जोतें। फिर डिस्क हैरो और रोटावेटर से भुरभुरा करें। 35 किलो नाइट्रोजन, 25 किलो फॉस्फोरस और 25 किलो पोटाश प्रति एकड़ डालें। गोबर की खाद 5 टन मिलाएँ। बुवाई के 72 घंटे बाद पायरोक्सासल्फोन का छिड़काव करें। पहली सिंचाई 10-12 दिन बाद करें, ताकि खरपतवार मुरझा जाए। ये उपाय पैदावार को 30% तक बचा सकते हैं।

बंपर पैदावार का रास्ता

मक्के की फसल 80-90 दिनों में तैयार हो जाती है। खरपतवार से बचाव करें, तो प्रति हेक्टेयर 50-60 क्विंटल तक उपज मिल सकती है। गर्मियों में इसका भाव 20-25 रुपये प्रति किलो रहता है, जिससे एक एकड़ से 40-50 हजार रुपये की कमाई हो सकती है। लागत 15-20 हजार के आसपास आती है। ये टिप्स फसल को खरपतवार से बचाकर मेहनत का पूरा फल दिलाएँगे।

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  • Shashikant

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