May Mein Ageti Dhan Ki Kheti: किसान भाइयों, धान हमारी खेती का दिल है, और अगर बात अगेती धान की हो तो ये सोने पे सुहागा है। अगेती धान की खेती से न सिर्फ फसल जल्दी तैयार होती है, बल्कि खेत भी जल्दी खाली हो जाता है, ताकि आप दूसरी फसल उगा सकें। मई का महीना इस खेती की नींव रखने का सबसे सही समय है। इस समय खेत की तैयारी, सही बीज का चुनाव और पौधशाला की व्यवस्था करके आप बंपर पैदावार पा सकते हैं। तो चलिए, देसी अंदाज़ में जानते हैं कि मई में अगेती धान की खेती कैसे शुरू करें और मुनाफा कैसे बढ़ाएं।
अगेती धान की खेती – May Mein Ageti Dhan Ki Kheti
अगेती धान की खेती किसानों के लिए वरदान है। ये 90-120 दिन में पककर तैयार हो जाती है, जिससे आप मानसून के बीच में ही फसल काट लेते हैं। इससे खेत जल्दी खाली होता है, और आप रबी की फसल या सब्जियाँ उगा सकते हैं। अगेती धान की उन्नत किस्में रोगों और कीटों से लड़ने में माहिर होती हैं, जिससे दवाइयों का खर्च बचता है। मई में शुरू की गई खेती जुलाई-अगस्त तक फसल दे देती है, और बाजार में इस समय धान के अच्छे दाम मिलते हैं। ये खेती छोटे और बड़े, दोनों तरह के किसानों के लिए फायदेमंद है।
उन्नत किस्मों का चयन
मई में अगेती धान की खेती के लिए ऐसी किस्में चुनें, जो कम समय में पकें और आपके इलाके की मिट्टी और मौसम के लिए मुफीद हों। नीचे कुछ शानदार किस्मों की जानकारी दी गई है, जो अलग-अलग इलाकों में कमाल करती हैं।
PR-121: पंजाब और हरियाणा की शान
PR-121 अगेती धान की एक भरोसेमंद किस्म है, जो खास तौर पर पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए बनाई गई है। ये 90-100 दिन में पककर तैयार हो जाती है और बंपर पैदावार देती है। इसकी खासियत ये है कि ये बेक्टीरियल ब्लाइट जैसे रोगों से लड़ने में माहिर है। इसके दाने लंबे, चमकदार और बाजार में खूब पसंद किए जाते हैं।
IR-64 Early: झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा का भरोसा
IR-64 Early झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के किसानों के लिए कमाल की किस्म है। ये 95-105 दिन में पककर तैयार हो जाती है और कम पानी में भी अच्छी उपज देती है। ये रोगों और कीटों से लड़ने में माहिर है, जिससे दवाइयों का खर्च कम रहता है। इसके दाने मध्यम आकार के और स्वादिष्ट होते हैं, जो लोकल मंडियों में अच्छा दाम लाते हैं।
MTU-1010: आंध्र और तेलंगाना का सितारा
MTU-1010 आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के किसानों के लिए वरदान है। ये 100-110 दिन में पकती है और कम पानी वाली मिट्टी में भी लहलहाती है। ये किस्म सूखा और रोगों को झेलने में सक्षम है। इसके दाने पतले, लंबे और चावल के व्यापार में खूब बिकते हैं। ये उन किसानों के लिए बेस्ट है, जो कम लागत में ज्यादा मुनाफा चाहते हैं।
विकास (IET-4094): पूर्वी भारत की पसंद
विकास, जिसे IET-4094 भी कहते हैं, पूर्वी भारत के लिए शानदार किस्म है। ये 90-100 दिन में पककर तैयार हो जाती है और बंपर पैदावार देती है। ये बाढ़ और रोगों से लड़ने में माहिर है, जिससे बरसात के मौसम में भी फसल सुरक्षित रहती है। इसके दाने छोटे लेकिन स्वादिष्ट होते हैं, जो स्थानीय बाजारों में खूब पसंद किए जाते हैं।
मई में खेत की तैयारी
अगेती धान की खेती की शुरुआत खेत की मजबूत नींव से होती है। मई की गर्मी में खेत की गहरी जुताई करें, ताकि पुराने खरपतवार और कीटों के अंडे नष्ट हो जाएं। प्रति एकड़ 8-10 टन सड़ी गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालें, ताकि मिट्टी को ताकत मिले। खेत को समतल करने के लिए लेजर लैंड लेवलर का इस्तेमाल करें, जिससे पानी बराबर बंटे और बहाव न हो। मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई करें। ये सारी तैयारी मई में पूरी कर लें, ताकि जून में पौधशाला और रोपाई आसानी से हो सके।
बीज की तैयारी और देसी उपचार
अच्छी फसल के लिए बीज का स्वस्थ होना जरूरी है। अगेती धान के बीजों को 6-12 घंटे पानी में भिगोएं, ताकि अंकुरण तेजी से हो। इसके बाद बीजों को 24 घंटे छाया में रखें, जिससे छोटे-छोटे अंकुर फूटने लगें। बीजों को जैविक फफूंदनाशक ट्राइकोडर्मा और एजोटोबैक्टर से उपचारित करें, ताकि फफूंद और कीटों से बचाव हो। देसी नुस्खे के तौर पर बीजों को गौमूत्र में 2-3 घंटे भिगोएं, इससे पौधे मजबूत बनते हैं। उपचारित बीज ही पौधशाला में बोएं, ताकि शुरुआत से फसल ताकतवर रहे।
पौधशाला की देसी व्यवस्था
अगेती धान की पौधशाला मई के आखिरी हफ्ते या जून के पहले हफ्ते में तैयार करें। इसके लिए खेत के ऊंचे हिस्से को चुनें, ताकि बारिश में जलभराव न हो। प्रति एकड़ के लिए 800-1000 वर्ग मीटर की पौधशाला काफी है। इसमें 20-25 किलो बीज बोएं। पौधशाला में गोबर की खाद और नीम की पत्तियाँ मिलाएं, ताकि दीमक और फफूंद से बचाव हो। बीज बोने के बाद हल्की मिट्टी की परत चढ़ाएं और सूखी घास से ढक दें। हर 2-3 दिन में हल्की सिंचाई करें, ताकि नमी बनी रहे। 20-25 दिन में पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाएंगे।
जल प्रबंधन और खरपतवार नियंत्रण
पौधशाला में पानी का खास ख्याल रखें। हर 2-3 दिन में हल्की सिंचाई करें, ताकि मिट्टी सूखे नहीं। ज्यादा पानी से बचें, वरना पौधे कमजोर हो सकते हैं। खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए हाथ से निराई करें। देसी तरीके के तौर पर नीम की खली या जैविक खरपतवार नाशक का छिड़काव करें। अगर खरपतवार ज्यादा हों, तो अपने कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें। खेत में सप्तधातु जैविक घोल डालने से मिट्टी की ताकत बढ़ती है और खरपतवार भी कम होते हैं। ये सारे काम मई में शुरू कर दें, ताकि रोपाई समय पर हो।
मई में अगेती धान की खेती किसानों के लिए समय और पैसे, दोनों बचाने का देसी तरीका है। सही किस्मों का चयन, खेत की तैयारी, बीज उपचार और पौधशाला की व्यवस्था से आप बंपर पैदावार पा सकते हैं। ये खेती न सिर्फ जल्दी फसल देती है, बल्कि खेत को दूसरी फसल के लिए भी तैयार करती है। देसी नुस्खों और वैज्ञानिक तरीकों को मिलाकर आप अपनी मेहनत को सोने में बदल सकते हैं। तो देर किस बात की? इस मई में अगेती धान की खेती शुरू करें, और देखें कि कैसे आपके खेत लहलहाते हैं।
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