बिस्वा में 3 मण! इस पुरानी किस्म में छुपा है नफा कमाने का नया फॉर्मूला

Nati Mansuri Dhan Ki Kheti: नाटी मंसूरी धान भारत के किसानों की पहली पसंद है, जो अपनी सुगंध, स्वाद, और अच्छी पैदावार के लिए मशहूर है। उत्तर प्रदेश, बिहार, और विंध्य क्षेत्र में यह खरीफ सीजन की प्रमुख फसल है, जिसे मई-जून में नर्सरी और जुलाई में रोपाई करके उगाया जाता है। इसकी पारंपरिक किस्म MTU-7029 60-70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर देती है, लेकिन नई किस्म सबौर मंसूरी 65-122 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार दे सकती है। यह प्रति बिस्वा 3 मण (120 किलो) उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने में मददगार है। यह फसल कम पानी, कम खाद, और वैज्ञानिक तरीकों से बंपर मुनाफा देती है। जाने इस किस्म के बारे में।

सुगंध का खजाना, नाटी मंसूरी क्यों खास?

नाटी मंसूरी का चावल महीन, सुगंधित, और स्वाद में लाजवाब होता है, जिसकी बाजार में मांग 25 सालों से बनी हुई है। यह धान 150-160 दिन में पकता है और 60-70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार देता है। इसका चावल 67-70% निकलता है, जो मध्यम आकार का और खाने में नरम होता है। पटना के किसान अजय कुमार कहते हैं, “नाटी मंसूरी का स्वाद और मुनाफा हाइब्रिड किस्मों से दोगुना है।” यह फसल ज्यादा पानी में अच्छी पैदावार देती है, लेकिन खाद की कम जरूरत होती है। नई किस्म सबौर मंसूरी ने इसे और उन्नत बनाया है, जो कम पानी में 122 क्विंटल तक पैदावार देती है। यह प्रति बिस्वा 3 मण (96 क्विंटल/हेक्टेयर) के लक्ष्य को संभव बनाती है।

नई किस्मों का जादू: सबौर मंसूरी और अन्य

नाटी मंसूरी की पारंपरिक किस्म MTU-7029 के अलावा नई किस्में उत्पादन को अगले स्तर पर ले जा रही हैं। इनमें शामिल हैं:

  • सबौर मंसूरी: बिहार कृषि विश्वविद्यालय की खोज, 135-140 दिन में पकती है। औसत पैदावार 65-70 क्विंटल, अधिकतम 122 क्विंटल प्रति हेक्टेयर। कम पानी, कम खाद, और सीधी बुआई के लिए उपयुक्त।web:2,5,19

  • PR-121: पंजाब की किस्म, 135 दिन में तैयार, 70 क्विंटल/हेक्टेयर, महीन और सुगंधित चावल।

  • सांभा मंसूरी: कम पानी में 50-60 क्विंटल/हेक्टेयर, 150-160 दिन में तैयार।

सबौर मंसूरी की खासियत है कि इसके पौधे में 18-20 कल्ले और 300 से ज्यादा दाने वाली 29 सेंटीमीटर की बालियां होती हैं। इसका दाना सुनहरा और नाटी मंसूरी जैसा होता है। यह झुलसा रोग, तना छेदक, और भूरे पत्ती लपेटक कीट के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है, जिससे कीटनाशक की लागत कम होती है।web:5,22

सही माहौल: जलवायु और मिट्टी

नाटी मंसूरी और सबौर मंसूरी के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु (25-35°C) आदर्श है। खरीफ सीजन में मई-जून में नर्सरी और जुलाई में रोपाई उपयुक्त है। दोमट, चिकनी, या रेतीली मिट्टी (pH 5.5-7.5) अच्छी है। जल निकासी जरूरी है, लेकिन नाटी मंसूरी ज्यादा पानी में बेहतर पैदावार देती है। खेत को 2-3 बार जुताई करके समतल करें और 5-10 टन गोबर की खाद डालें। मिट्टी की जांच स्थानीय कृषि केंद्र से करवाएं।

बुआई का मंत्र: वैज्ञानिक रोपाई

मई के अंत या जून के पहले सप्ताह (रोहिणी नक्षत्र) में नर्सरी डालें। प्रति हेक्टेयर 30-40 किलो बीज पर्याप्त हैं। बीज को 24 घंटे पानी में भिगोएं और बाविस्टिन (2 ग्राम/किलो) से उपचारित करें। 20-25 दिन बाद (आद्रा नक्षत्र, जून अंत) रोपाई करें। सबौर मंसूरी के लिए सीधी बुआई भी संभव है, जिसमें 50-60 किलो बीज प्रति हेक्टेयर डालें। पौधों के बीच 20×15 सेंटीमीटर दूरी रखें। रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें।

खाद और उर्वरक, सिंचाई

इसकी खेती के लिए 10-12 टन गोबर की खाद या 5 टन वर्मीकम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर डालें। रासायनिक खाद के लिए NPK (120:60:40 किलो/हेक्टेयर) उपयोग करें। नाइट्रोजन को तीन हिस्सों में डालें: 50% बुआई पर, 25% 30 दिन बाद, 25% फूल आने पर। नीम खली (2 टन/हेक्टेयर) कीटों से बचाव करती है। सबौर मंसूरी कम खाद में भी अच्छी पैदावार देती है, जिससे लागत 20% कम होती है।

नाटी मंसूरी को नियमित पानी चाहिए, खासकर कल्ले निकलने और फूल आने के समय। खेत में 3-5 सेंटीमीटर पानी बनाए रखें। सबौर मंसूरी कम पानी में उगती है, जिसके लिए ड्रिप या वैकल्पिक गीला-सूखा विधि उपयुक्त है। मानसून पर निर्भरता कम करें और ड्रिप सिंचाई से 30% पानी बचाएं। जलभराव से बचें, वरना जड़ सड़न हो सकती है।

कीटों से रक्षा, रोगमुक्त खेती

सबौर मंसूरी झुलसा रोग, तना छेदक, और भूरे पत्ती लपेटक के प्रति सहनशील है। फिर भी, नीम तेल (5 मिली/लीटर) का छिड़काव हर 15 दिन में करें। फेरोमोन ट्रैप (5/हेक्टेयर) तना छेदक को नियंत्रित करते हैं। चूर्णिल फफूंदी के लिए मैनकोज़ेब (2 ग्राम/लीटर) उपयोग करें। खरपतवार को 30 दिन तक नियमित हटाएं। जैविक खेती में ट्राइकोडर्मा (5 किलो/हेक्टेयर) मिट्टी में मिलाएं।

बंपर फसल का मंत्र, कटाई और पैदावार

नाटी मंसूरी 150-160 दिन और सबौर मंसूरी 135-140 दिन में कटाई के लिए तैयार होती है। जब 80% दाने सुनहरे और सख्त हों, कटाई करें। सबौर मंसूरी से 65-122 क्विंटल/हेक्टेयर मिलता है, जो 3 मण/बिस्वा (96 क्विंटल/हेक्टेयर) के लक्ष्य को पूरा करता है। कटाई सुबह करें और दानों को 12% नमी पर सुखाएं।

प्रति हेक्टेयर खेती में लागत 50,000-60,000 रुपये आती है, जिसमें बीज (5,000 रुपये), खाद (10,000 रुपये), मजदूरी (20,000 रुपये), और सिंचाई (15,000 रुपये) शामिल हैं। सबौर मंसूरी से 96 क्विंटल/हेक्टेयर पर 25 रुपये/किलो की दर से 2,40,000 रुपये की आय हो सकती है। लागत हटाने के बाद 1.8-2 लाख रुपये मुनाफा संभव है। जैविक चावल को 35-40 रुपये/किलो बेचकर मुनाफा 3 लाख तक बढ़ सकता है।

आज से शुरू: खेत को समृद्ध करें

नाटी मंसूरी और सबौर मंसूरी की खेती भारत के किसानों के लिए सुगंध और मुनाफे का खजाना है। प्रति बिस्वा 3 मण उत्पादन का लक्ष्य अब वैज्ञानिक तरीकों और नई किस्मों से संभव है। चाहे आप चावल बेचें या निर्यात करें, यह आपकी आय दोगुनी करेगा। आज ही अपने नजदीकी कृषि केंद्र से संपर्क करें, उन्नत बीज लें, और खेती शुरू करें। यह आपके गाँव की समृद्धि का आधार बनेगा।

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  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

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