सर्दियों का मौसम भिंडी की खेती का सुनहरा समय बन सकता है। सामान्य तौर पर भिंडी गर्मियों की फसल है, लेकिन अगर जनवरी-फरवरी में सही तरीके से रोपाई की जाए तो मार्च-अप्रैल में बाजार में पहली खेप पहुंचाकर 2 से 3 गुना ज्यादा दाम मिल सकते हैं। इस दौरान भिंडी की मांग बहुत तेज रहती है क्योंकि गर्मियों की पुरानी फसल खत्म हो जाती है और नई फसल अभी नहीं आती। कई किसान इस मौके का फायदा उठाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि ऑफ-सीजन भिंडी की खेती में शुरुआती खर्च ज्यादा लगता है लेकिन रिटर्न भी बहुत ज्यादा मिलता है। एक एकड़ में 20-30 हजार रुपये का निवेश करके 80-100 क्विंटल तक पैदावार ली जा सकती है। मार्च-अप्रैल में भाव 40 से 60 रुपये किलो तक पहुंच जाते हैं, जिससे एक एकड़ से 3-5 लाख रुपये तक की कमाई संभव है। ये फसल कम समय में तैयार होती है और बाजार में जल्दी बिक जाती है।
ऑफ-सीजन भिंडी की खेती के लिए सही समय और तरीका
जनवरी के दूसरे हफ्ते से फरवरी के पहले हफ्ते तक नर्सरी तैयार करें। बीज को 12 घंटे पानी में भिगोकर उपचारित करें। अच्छी तरह तैयार मिट्टी में बीज बोएं और नर्सरी में पॉलीथीन या लो-टनल से ढक दें। पौधे 20-25 दिन के होने पर मुख्य खेत में रोपाई करें। रोपाई के लिए 60 गुणा 45 सेंटीमीटर की दूरी रखें ताकि पौधों को हवा और धूप अच्छी मिले।
खेत में गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट जरूर मिलाएं। भिंडी को ज्यादा पानी नहीं चाहिए लेकिन नमी बनी रहनी चाहिए। लो-टनल या पॉलीहाउस का इस्तेमाल करने से अंदर का तापमान 5-8 डिग्री ज्यादा रहता है और पाला से फसल सुरक्षित रहती है। पॉलीहाउस में पैदावार और भी ज्यादा होती है।
रोग और कीट से बचाव के आसान उपाय
सर्दियों में भिंडी पर येलो वीन मोज़ेक वायरस और फ्रूट बोरर का खतरा रहता है। शुरुआत में नीम तेल या नीम आधारित कीटनाशक का छिड़काव करें। अगर वायरस दिखे तो प्रभावित पौधों को तुरंत उखाड़कर जला दें। फफूंद रोग से बचने के लिए बोर्डो मिक्सचर या ट्राइकोडर्मा का इस्तेमाल करें। पौधों की नियमित जांच करें और समय पर निराई-गुड़ाई करें।
बाजार में मांग और कमाई
मार्च-अप्रैल में नवरात्रि, रामनवमी और गर्मी की शुरुआत के कारण भिंडी की मांग बहुत तेज रहती है। मंडियों में भाव 40 से 60 रुपये किलो तक पहुंच जाते हैं। अगर फसल अच्छी क्वालिटी की हुई तो सीधे होटलों, सुपरमार्केट या एक्सपोर्ट के लिए भी बेची जा सकती है। कई किसान भाई इस मौके से लाखों रुपये कमा रहे हैं।
ये भी पढ़ें- करेला की यह किस्म किसानों को बना रही है मालामाल, 200 क्विंटल तक उत्पादन, प्रतिएकड़ 3 लाख मुनाफा