धान की खेती हमारे देश की रीढ़ है, और हर किसान चाहता है कि उसकी फसल हरी-भरी हो और अच्छा उत्पादन दे। रोपाई से पहले और दूसरी खाद डालने का समय फसल की सेहत के लिए बहुत मायने रखता है। सही खादों का इस्तेमाल करने से कल्ले मजबूत होते हैं और पैदावार बढ़ती है। आज हम धान की फसल को बेहतर बनाने के तरीकों पर बात करेंगे, खास तौर पर उन खादों पर जो जड़ों को ताकत देती हैं और कीटों से बचाती हैं। यह लेख किसानों के लिए है, जो अपनी मेहनत को स्वस्थ फसल और अच्छे दाम में बदलना चाहते हैं।
यूरिया का महत्व
Best Fertilizer for Paddy- यूरिया धान की फसल के लिए एक शक्तिशाली खाद है, जो पौधों को नाइट्रोजन की भरपूर मात्रा देती है। रोपाई से पहले 45 किलो यूरिया प्रति एकड़ का इस्तेमाल करना एक बढ़िया तरीका है, क्योंकि यह पौधों की वृद्धि को तेज करता है और पत्तियों को हरा-भरा बनाता है। इसे खेत में समान रूप से फैलाएं और हल्की जुताई करें ताकि यह मिट्टी में अच्छे से मिल जाए। दूसरी खाद के समय भी यूरिया को 45 किलो प्रति एकड़ की दर से पानी के साथ डालें, ताकि जड़ों तक आसानी से पहुंचे। सुबह के समय इसका इस्तेमाल करें, क्योंकि इस वक्त मिट्टी नमी को अच्छे से सोखती है। सही मात्रा और समय से यूरिया फसल की ग्रोथ को दोगुना कर सकता है।
ये भी पढ़ें – धान की फसल में डालें यह एक चीज़ जिससे होगी रिकॉर्ड पैदावार – जानिए किसानों का नया फॉर्मूला!”
जिंक सल्फेट का योगदान
जिंक सल्फेट धान की फसल के लिए एक जरूरी खाद है, जो मिट्टी में जिंक की कमी को पूरा करता है। रोपाई से पहले और दूसरी खाद के समय 10 किलो जिंक सल्फेट 21% प्रति एकड़ का इस्तेमाल करें। यह खाद पत्तियों को हरा-भरा रखती है और पौधों की जड़ों को मजबूती देती है। अगर मिट्टी में जिंक कम हो, तो पौधों की ग्रोथ रुक सकती है, लेकिन इस खाद से वह समस्या दूर होती है। इसे खेत में फैलाने के बाद हल्की सिंचाई करें, ताकि यह मिट्टी में गहराई तक जाए। दोपहर के बाद इसका इस्तेमाल करें, जब धूप कम हो, ताकि इसका असर बरकरार रहे।
मैग्नीशियम सल्फेट का फायदा
मैग्नीशियम सल्फेट एक ऐसी खाद है, जो धान की फसल की जड़ों और पत्तियों को पोषण देती है। रोपाई से पहले 5 किलो मैग्नीशियम सल्फेट प्रति एकड़ डालें, क्योंकि यह मिट्टी में मैग्नीशियम की कमी को पूरा करती है और पौधों की हरी पत्तियों को बनाए रखती है। यह खाद फोटोसिंथेसिस की प्रक्रिया को मजबूत करती है, जिससे फसल की ग्रोथ बेहतर होती है। इसे यूरिया और जिंक सल्फेट के साथ मिलाकर खेत में फैलाएं और हल्की जुताई करें। अगर पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगें, तो यह खाद और भी जरूरी हो जाती है। सही समय पर इस्तेमाल करने से इसका असर लंबे समय तक रहता है।
फेरस सल्फेट की भूमिका
फेरस सल्फेट धान की फसल के लिए एक खास खाद है, जो लोहा प्रदान करके पौधों की सेहत को बेहतर बनाती है। रोपाई से पहले 5 कilo फेरस सल्फेट प्रति एकड़ का इस्तेमाल करें, क्योंकि यह पत्तियों के पीले पड़ने को रोकता है और जड़ों को ताकत देता है। अगर मिट्टी में लोहा कम हो, तो पौधे कमजोर हो सकते हैं, लेकिन यह खाद उस कमी को दूर करती है। इसे खेत में फैलाने के बाद हल्की सिंचाई करें ताकि यह मिट्टी में अच्छे से मिल जाए। दोपहर के बाद इसका इस्तेमाल करना बेहतर है, ताकि धूप का असर खाद पर न पड़े। यह खाद फसल की ग्रोथ को संतुलित रखने में मदद करती है।
ये भी पढ़ें – इस तरह से कीजिए धान की फसल में उर्वरक प्रबंधन: शीघ्र, माध्यम, और संकर किस्मों के लिए, उत्पादन होगा जबदस्त
मिट्टी और पानी का संतुलन
धान की फसल को अच्छी पैदावार देने के लिए मिट्टी और पानी का संतुलन जरूरी है। इन खादों को डालने से पहले मिट्टी की नमी चेक करें। अगर मिट्टी सूखी है, तो हल्की सिंचाई कर लें ताकि खाद का असर सही हो। ज्यादा पानी न डालें, क्योंकि इससे खाद बह सकती है और पौधों को नुकसान हो सकता है। जैविक खाद जैसे गोबर की खाद को मिट्टी में मिलाने से यह और उपजाऊ बनती है, और रासायनिक खादों का असर भी बढ़ता है। हर 10-15 दिन में मिट्टी की हालत देखें और जरूरत पड़ने पर पानी दें।
फसल की सेहत और पैदावार
इन खादों के सही इस्तेमाल से धान की फसल की सेहत बेहतर होती है। यूरिया पौधों को नाइट्रोजन देता है, जिंक सल्फेट पत्तियों को हरा रखता है, और मैग्नीशियम व फेरस सल्फेट जड़ों को मजबूती प्रदान करते हैं। क्लोरपाइरिफॉस कीटों से फसल की रक्षा करता है, जिससे पत्तियां और दाने सुरक्षित रहते हैं। अगर यह सब सही समय और तरीके से किया जाए, तो पैदावार में 20-30% तक बढ़ोतरी हो सकती है। किसान भाई इस प्रक्रिया को ध्यान से फॉलो करें और अपने अनुभव को नोट करें।
ये भी पढ़ें – डीएपी नहीं मिल रहा? जानिए धान की रोपाई के लिए सबसे असरदार उर्वरक विकल्प!