किसान भाइयों, पीला कद्दू या जुकिनी की जैविक खेती कम समय में मोटी कमाई का शानदार तरीका है, ये सब्जियाँ सलाद, सूप, सब्जी, बेकिंग में खूब चलती हैं, और बाजार में 40-80 रुपये प्रति किलो बिकती हैं, जैविक होने से दाम 20-30% ज्यादा मिलते हैं, ये 45-60 दिन में तैयार हो जाती हैं, और एक हेक्टेयर से 20-30 टन पैदावार देती हैं, भारत में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली के आसपास इसकी माँग बढ़ रही है, कम पानी, कम लागत में ये छोटे-बड़े किसानों के लिए वरदान है, अप्रैल-मई या जुलाई-अगस्त में शुरू करें, और अपनी खेती को मुनाफेदार बनाएँ।
मिट्टी और जलवायु की नींव
जैविक खेती के लिए सही मिट्टी जरूरी है, बलुई दोमट, भुरभुरी मिट्टी जिसमें जल निकासी अच्छी हो, पीले कद्दू या जुकिनी के लिए बेस्ट है, मिट्टी का pH 6-7 होना चाहिए, ये 20-35 डिग्री तापमान में अच्छे उगते हैं, ज्यादा गर्मी (40 डिग्री से ऊपर) में छायादार जाल लगाएँ, खेत की गहरी जुताई करें, 10-12 टन गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर डालें, अप्रैल-मई या जुलाई में खेत तैयार करें, नीम की खली (500 किलो प्रति हेक्टेयर) मिलाएँ, रासायनिक उर्वरकों से बचें, हल्की सिंचाई करें, ताकि नमी बनी रहे, सही मिट्टी, जलवायु से पौधे स्वस्थ रहते हैं, और पैदावार बढ़ती है।
बीज और बुआई सही शुरुआत
जैविक खेती के लिए प्रमाणित बीज चुनें, पीले कद्दू की किस्में जैसे पूसा विवेक, अर्का सूर्य, या जुकिनी की डायनमिक, डायमंड, गोल्ड रश उपयुक्त हैं, प्रति हेक्टेयर 2-3 किलो बीज काफी है, बीज को जीवामृत (500 मिलीलीटर प्रति किलो) से उपचारित करें, अप्रैल-मई या जुलाई-अगस्त में बुआई करें, 2×1 मीटर की दूरी पर 2-3 सेमी गहराई में 2-3 बीज बोएँ, 7-10 दिन में अंकुरण शुरू होता है, कमजोर पौधे हटाएँ, और प्रति गड्ढा एक स्वस्थ पौधा रखें, मचान या बेल के लिए बाँस का सहारा बनाएँ, सही बुआई से पौधे जल्दी फल देना शुरू करते हैं, और 45-60 दिन में फसल तैयार होती है।
जैविक खाद और देखभाल का तरीका
जैविक खेती में रासायनिक खाद, कीटनाशक वर्जित हैं, रोपाई के 15 दिन बाद 2 टन वर्मी कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर डालें, हर 10-15 दिन में जीवामृत (200 लीटर प्रति हेक्टेयर) या गोमूत्र (10% घोल) छिड़कें, गर्मी में 5-7 दिन, मॉनसून में 10-12 दिन के अंतर पर सिंचाई करें, ड्रिप सिस्टम से पानी की 20-30% बचत होती है, कीट जैसे फल मक्खी, कद्दू बीटल से बचाने के लिए नीम का तेल (5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी) इस्तेमाल करें, फफूंद रोग के लिए बवेरिया बैसिलस (10 ग्राम प्रति लीटर) छिड़कें, 20-25 दिन बाद गुड़ाई करें, खरपतवार हटाएँ, सही देखभाल से एक पौधा 5-10 किलो फल देता है।
कटाई का समय, मेहनत का फल
पीले कद्दू या जुकिनी की कटाई 45-60 दिन में शुरू करें, जब फल हरे-पीले, चमकदार, 15-20 सेमी लंबे हों, सुबह के समय काटें, ताकि ताजगी बनी रहे, हर 3-5 दिन में कटाई करें, क्योंकि ज्यादा पकने से स्वाद, क्वालिटी कम होती है, एक हेक्टेयर से 20-30 टन फल मिलते हैं, कटाई के बाद फलों को छाया में बंडल करें, और 2-3 दिन में बाजार भेजें, जैविक फसल होने से शहरी बाजारों, सुपरमार्केट में डिमांड ज्यादा रहती है, सही समय पर कटाई से 40-80 रुपये प्रति किलो दाम मिलता है, ये मेहनत को कई गुना फायदा देता है।
मुनाफा और बाजार, लाखों की कमाई
जैविक पीले कद्दू या जुकिनी की खेती से मोटी कमाई संभव है, एक हेक्टेयर में लागत 30-40 हजार रुपये लगती है, और 20-30 टन फल मिलते हैं, 40-80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से 8-24 लाख रुपये की कमाई हो सकती है, लागत निकालकर 7-23 लाख मुनाफा बचता है, जैविक सर्टिफिकेशन से दाम 20-30% बढ़ते हैं, लोकल मार्केट, मंडी, होटल, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, या निर्यात करें, गर्मियों, मॉनसून में डिमांड बढ़ने से दाम ऊँचे रहते हैं, सरकार की जैविक खेती सब्सिडी, प्रशिक्षण का फायदा उठाएँ, छोटे स्तर पर 0.5 हेक्टेयर से शुरू करें, ये खेती मेहनत को लाखों में बदल देती है।
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