गेहूं की तीसरी-चौथी पत्ती पीली? ये हैं जिंक की कमी के संकेत, तुरंत डालें ये 2 दवा

Plant Protection Tips: किसान भाइयों भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गेहूं बोने वाले किसानों के लिए खास सलाह जारी की है। मौसम में बदलाव और बारिश की संभावना को देखते हुए खेतों में सावधानी बरतने को कहा गया है। गेहूं, सरसों, बरसीम, मक्का और सब्जियों की फसलों की सही देखभाल के लिए ये एडवाइजरी आपके काम आएगी। चलिए, एक-एक करके समझते हैं कि क्या करना है।

गेहूं की फसल की देखभाल

IMD ने गेहूं बोने वाले किसानों को बताया कि अगर बुवाई के वक्त जिंक सल्फेट नहीं डाला गया, तो बुवाई के 45 दिन बाद और 60 दिन बाद 0.5% जिंक सल्फेट के साथ 2.5% यूरिया या 0.25% बुझा हुआ चूना मिलाकर छिड़काव करें। अगर पौधों की तीसरी-चौथी पत्ती पीली दिखे, जो जिंक की कमी का संकेत है, तो 2.5% यूरिया में 0.5% जिंक सल्फेट मिलाकर छिड़कें।

बुवाई के 30-35 दिन बाद जंगली पालक जैसे चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार रोकने के लिए मेटसल्फ्यूरॉन (एल्ग्रिप जी. पा या जी. ग्रैन) 8 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 200-250 लीटर पानी में मिलाकर हवा बंद होने पर फ्लैट फैन नोजल से छिड़काव करें। बारिश का अनुमान है, इसलिए अभी सिंचाई, उर्वरक या दूसरा काम न करें। पीला रतुआ रोग की निगरानी रखें और नए-छोटे पौधों पर बाजरे या गन्ने का शेड बनाएँ ताकि फसल सुरक्षित रहे।

सरसों की फसल का ध्यान

सरसों में सिंचाई हल्की करें, खेत में पानी जमा न होने दें, वरना पौधे मर सकते हैं। मौसम सफेद रतुआ रोग और सरसों एफिड के लिए अनुकूल है, इसलिए खेत की निगरानी करें। अगर प्रकोप शुरू हो तो प्रभावित हिस्से को नष्ट कर दें। जिन इलाकों में तना सड़न हर साल होती है, वहाँ बुवाई के 45-50 दिन बाद 0.1% कार्बेन्डाजिम का पहला छिड़काव करें और 65-70 दिन बाद दूसरा छिड़काव करें। अगर सफेद रतुआ पक्का हो जाए, तो 600-800 ग्राम मैन्कोजेब (डाइथेन एम-45) को 250-300 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ 15 दिन के अंतराल पर 2-3 बार छिड़कें।

बरसीम की खेती के टिप्स

बरसीम में जरूरत के हिसाब से ही पानी दें। जिन किसानों ने अभी तक बुवाई नहीं की, वे जल्दी करें, क्योंकि मौसम इसके लिए ठीक है। 8 से 10 किलो बीज प्रति एकड़ की दर से बोएँ। चारे की अच्छी पैदावार के लिए बुवाई से पहले प्रति एकड़ 10 किलो नाइट्रोजन और 28 किलो फास्फोरस डालें। सही समय पर बुवाई और खाद से फसल लहलहाएगी।

मक्का की देखभाल

मक्के में दूसरी फसलों की इंटर क्रॉपिंग के लिए खेत की नमी देखकर ही ट्रैक्टर या उपकरण चलाएँ। मक्का बोरर को रोकने के लिए नैपसेक स्प्रेयर से प्रति एकड़ 60 लीटर पानी में 30 मिली कोराजन 18.5 एससी (क्लोरएंट्रानिलिप्रोले) का छिड़काव करें। बायोएजेंट ट्राइकोग्रामा चिलोनिस भी इस कीट को काबू में कर सकता है। पानी जमने से नुकसान को कम करने के लिए साप्ताहिक अंतराल पर 3% यूरिया घोल के दो छिड़काव करें या पानी हटने के बाद मध्यम से गंभीर नुकसान में प्रति एकड़ 12-24 किलो अतिरिक्त नाइट्रोजन डालें। फॉल आर्मीवर्म के लिए मौसम साफ होने पर कोराजन 18.5 एससी 0.4 मिली प्रति लीटर पानी से छिड़कें और नोजल को प्रभावित हिस्से की ओर रखें।

सब्जी फसलों की सलाह

सब्जियों की अच्छी पैदावार के लिए कद्दूवर्गीय फसलें और टमाटर, मिर्च, बैंगन, भिंडी की नियमित कटाई करें। लौकी, करेला, टिंडा की बुवाई के लिए 2 किलो बीज प्रति एकड़ और वंगा के लिए 1 किलो बीज इस्तेमाल करें। भिंडी में जैसिड को काबू करने के लिए 80 मिली नीम आधारित इकोटिन (एजाडिरेक्टिन 5%) को 100 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ 15 दिन के अंतराल पर 1-2 बार छिड़कें। मौसम प्याज की बुवाई के लिए सही है, 10 किलो प्रति हेक्टेयर बीज बोएँ और बुवाई से पहले कैप्टान 2.5 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचार करें। आलू के पौधे 15-22 सेमी ऊँचे हों तो बुवाई के 30-35 दिन बाद मिट्टी चढ़ाएँ।

किसानों के लिए जरूरी सलाह

किसान भाइयों, IMD ने साफ कहा है कि बारिश का अनुमान है, इसलिए अभी खेत में सिंचाई या उर्वरक का काम टाल दें। फसलों की निगरानी रखें और रोग-कीट दिखें तो तुरंत कदम उठाएँ। अपने नजदीकी कृषि केंद्र से सलाह लें और मौसम के हिसाब से तैयारी करें। ये टिप्स आपकी मेहनत को बर्बाद नहीं होने देंगे और फसल से अच्छा मुनाफा दिलाएंगे। अभी से सावधानी बरतें ताकि फसल लहलहाए।

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  • Shashikant

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