खेत की मेड़ पर लगाएं करौंदा की ये 4 वैरायटी! लाल फलों से होगी कमाई और आवारा जानवरों से भी बचेगा खेत

Karonda Farming Tips: किसान भाइयों, उत्तर प्रदेश की मिट्टी खेती और बागवानी के लिए मशहूर है। यहाँ धान-गेहूँ के साथ-साथ बागवानी से भी अच्छी कमाई हो सकती है। बागवानी में एक बार मेहनत करने के बाद सालों तक फायदा मिलता है। इन दिनों करौंदा का बाग लगाना किसानों के लिए सुनहरा मौका है। करौंदा का बाग दो साल में फल देना शुरू कर देता है, और खेत की बाड़ के तौर पर भी काम करता है। इससे आवारा पशु फसलों को नुकसान नहीं पहुँचाते। आइए, जानें कि करौंदा की खेती कैसे शुरू करें और इससे मोटी कमाई कैसे हो सकती है।

करौंदा की खेती का आसान तरीका

करौंदा का बाग लगाना बड़ा आसान है, और इसमें ज्यादा खर्च भी नहीं आता। जून के महीने में ही इसकी तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। बारिश शुरू होते ही, यानी जुलाई में, करौंदा के पौधे लगा देना चाहिए। खेत के किनारे बाड़ के तौर पर पौधे लगाने से खेत की सुरक्षा भी होती है। करौंदा किसी भी मिट्टी में उग जाता है, चाहे वो रेतीली हो या दोमट। बस अच्छी किस्म के पौधे चुनना जरूरी है, ताकि उपज ज्यादा और बेहतर हो। दो साल बाद ये पौधे फल देना शुरू कर देते हैं, और हर साल कमाई का रास्ता खोलते हैं।

पंत सुदर्शन: बढ़िया उपज की गारंटी

पंतनगर यूनिवर्सिटी ने करौंदा की कई उन्नत किस्में तैयार की हैं, जिनमें पंत सुदर्शन सबसे मशहूर है। इस किस्म को लगाने के दो से तीन साल बाद फल मिलना शुरू हो जाता है। एक पौधे से 28 से 30 किलो तक करौंदा मिल सकता है। ये किस्म न सिर्फ ज्यादा उपज देती है, बल्कि इसके फल बाजार में अच्छी कीमत भी लाते हैं। किसान भाई इस किस्म को चुनकर अपने खेत में कम लागत में बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं।

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पंत स्वर्णा कृष्णा और पंत मनोहर की खासियत

पंत स्वर्णा कृष्णा भी एक शानदार किस्म है, जो दो साल में तैयार हो जाती है। इस किस्म से एक पौधे से 25 से 27 किलो करौंदा मिलता है। इसके फल रसीले और स्वादिष्ट होते हैं, जो बाजार में खूब पसंद किए जाते हैं। दूसरी ओर, पंत मनोहर किस्म भी दो साल में फल देना शुरू कर देती है। इसकी खास बात ये है कि एक पौधे से 27 किलो तक उपज मिल सकती है। ये दोनों किस्में उत्तर प्रदेश की मिट्टी और मौसम के लिए एकदम सही हैं।

कोकण बोल्ड: जल्दी फल देने वाली किस्म

अगर जल्दी उपज चाहिए, तो कोकण बोल्ड किस्म सबसे अच्छी है। ये किस्म दो साल से पहले ही फल देना शुरू कर देती है। एक पौधे से 15 से 20 किलो करौंदा मिलता है। भले ही इसकी उपज दूसरी किस्मों से थोड़ी कम हो, लेकिन जल्दी फल देने की वजह से किसान इसे लगाकर तेजी से कमाई शुरू कर सकते हैं। ये किस्म खासकर छोटे खेतों वाले किसानों के लिए फायदेमंद है।

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करौंदा की खेती से फायदा

करौंदा की खेती में लागत कम लगती है, और मुनाफा ज्यादा मिलता है। पौधे एक बार लगाने के बाद कई साल तक फल देते हैं। खेत की बाड़ के तौर पर लगाने से ये आवारा पशुओं से फसलों की रक्षा करते हैं। करौंदा के फल बाजार में अच्छी कीमत पर बिकते हैं, और इनसे अचार, जूस, और जैम जैसी चीजें भी बनती हैं। उत्तर प्रदेश के किसान भाई इस खेती को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं।

खेती शुरू करने की तैयारी

करौंदा का बाग लगाने के लिए जून में मिट्टी तैयार कर लें। खेत को अच्छे से जुताई करके समतल कर लें। पौधों के लिए गड्ढे खोदें, और उनमें गोबर की खाद डालें। जुलाई में बारिश शुरू होते ही उन्नत किस्मों के पौधे नर्सरी से लाकर लगा दें। पौधों के बीच 2-3 मीटर की दूरी रखें। समय-समय पर पानी और खाद देते रहें। नजदीकी कृषि केंद्र से सलाह लें, ताकि पौधे स्वस्थ रहें। दो साल में फल मिलना शुरू हो जाएगा, और कमाई का रास्ता खुल जाएगा।

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  • Rahul Maurya

    मेरा नाम राहुल है। मैं उत्तर प्रदेश से हूं और मैंने संभावना इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में शिक्षा प्राप्त की है। मैं Krishitak.com का संस्थापक और प्रमुख लेखक हूं। पिछले 3 वर्षों से मैं खेती-किसानी, कृषि योजनाएं, और ग्रामीण भारत से जुड़े विषयों पर लेखन कर रहा हूं।

    Krishitak.com के माध्यम से मेरा उद्देश्य है कि देशभर के किसानों तक सटीक, व्यावहारिक और नई कृषि जानकारी आसान भाषा में पहुँचे। मेरी कोशिश रहती है कि हर लेख पाठकों के लिए ज्ञानवर्धक और उपयोगी साबित हो, जिससे वे खेती में आधुनिकता और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सकें।

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