किसान भाइयों, अगर आप अपनी खेती में कुछ नया और फायदेमंद उगाना चाहते हैं, तो पूसा रुधीरा गाजर आपके लिए वरदान हो सकती है। इस गाजर की लंबी लाल जड़ें और उच्च पोषण मूल्य इसे खास बनाते हैं। इसमें कैरोटिनॉयड और फेनॉल जैसे तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो सेहत और फसल दोनों के लिए लाभकारी हैं। यह गाजर न सिर्फ हमारे खेतों की पैदावार बढ़ाती है, बल्कि बाजार में भी अच्छी कीमत दिलाती है। आइए, इस लाल सोने की खेती और फायदों को करीब से जानें।
लंबी लाल जड़ों का कमाल
पूसा रुधीरा गाजर की सबसे बड़ी खासियत है इसके लंबे और गहरे लाल रंग की जड़ें, जो आंखों को आकर्षित करती हैं। यह किस्म भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) द्वारा विकसित की गई है और इसके लाल रंग में कैरोटिनॉयड और लाइकोपीन जैसे तत्व छिपे हैं। ये जड़ें न सिर्फ स्वादिष्ट होती हैं, बल्कि इनकी बनावट भी मजबूत होती है, जो इसे बाजार में मांग बढ़ाती है। किसान भाइयों के लिए यह फसल कम मेहनत में अच्छा मुनाफा दे सकती है, अगर सही तरीके से उगाई जाए।
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पोषण का खजाना
इस गाजर में कैरोटिनॉयड और फेनॉल की मौजूदगी इसे स्वास्थ्य का खजाना बनाती है। कैरोटिनॉयड आंखों की रोशनी बढ़ाने और इम्यूनिटी मजबूत करने में मदद करते हैं, जबकि फेनॉल एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कैंसर जैसे रोगों से बचाव करते हैं। हर 100 ग्राम पूसा रुधीरा में 7.41 मिलीग्राम कैरोटिनॉयड और 45.15 मिलीग्राम फेनॉल पाया गया है, जो इसे आम गाजर से बेहतर बनाता है। इसे कच्चा खाने, जूस बनाने, या सब्जी में डालने से परिवार की सेहत को फायदा होगा। स्थानीय इलाकों में इसे मुरब्बा और अचार बनाने में भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
खेती के आसान टिप्स
पूसा रुधीरा गाजर उगाना आसान है, लेकिन सही देखभाल जरूरी है। इसे मध्य सितंबर से अक्टूबर के बीच बोना सबसे अच्छा रहता है, क्योंकि यह गर्मी से बचकर ठंड में अच्छी पैदावार देती है। हल्की और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में इसे बोएँ और प्रति हेक्टेयर 6-8 किलोग्राम बीज का इस्तेमाल करें। सिंचाई नियमित रखें, लेकिन पानी जमा न होने दें। 90-110 दिन में यह फसल तैयार हो जाती है, और औसतन 30 टन प्रति हेक्टर पैदावार मिल सकती है। गोबर खाद या वर्मी कंपोस्ट डालने से जड़ों की लंबाई और रंग और बेहतर होता है।
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बाजार में बढ़ती मांग
इस गाजर की मांग दिल्ली, एनसीआर, और अन्य शहरों में तेजी से बढ़ रही है। इसके लाल रंग, मिठास, और पोषण के कारण इसे अच्छी कीमत मिलती है। किसान भाइयों ने इसे उगाकर 30-40% अधिक मुनाफा कमाया है। इसे साफ करने के लिए मशीनें इस्तेमाल कर सकते हैं, जो नुकसान कम करती हैं और बिक्री को आसान बनाती हैं। e-NAM पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करके आप इसे सीधे बड़े व्यापारियों तक पहुँचा सकते हैं। यह फसल न सिर्फ खेतों को समृद्ध करती है, बल्कि घर का बजट भी संभालती है।
सेहत और खेती का संतुलन
पूसा रुधीरा गाजर हमारे खेतों और सेहत दोनों के लिए फायदेमंद है। इसे उगाकर किसान भाई अपनी आय बढ़ा सकते हैं, और घर में इसे खाकर परिवार स्वस्थ रह सकता है। इसे सलाद, जूस, या हलवा बनाने में इस्तेमाल करें। अगर फसल को नुकसान से बचाना हो, तो PMFBY (प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना) में रजिस्टर करें। नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से बीज और खेती की सलाह लें। अपनी खेती की कहानी साझा करें और इस लाल गाजर से फायदा उठाएँ।
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