Pusa Scientists Advice: गाँवों में सब्जियों की खेती किसानों की कमाई का बड़ा जरिया है। मौसम बदलते ही फसलों की तैयारी भी नए सिरे से शुरू होती है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा के वैज्ञानिकों ने सब्जियों की खेती के लिए ताजा सलाह दी है। इसमें भिंडी, फ्रेंच बीन, मूली और टमाटर जैसी फसलों को लेकर जरूरी बातें बताई गई हैं। ये सलाह मौसम को ध्यान में रखकर दी गई है, ताकि गाँव के किसान अच्छी पैदावार ले सकें। कीटों और रोगों से बचाव के लिए भी आसान तरीके सुझाए गए हैं। आइए, इन सलाह को विस्तार से समझते हैं, ताकि मेहनत का पूरा फल मिले।
भिंडी की बुवाई का सही तरीका
वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम को देखते हुए भिंडी की अगेती बुवाई शुरू कर देनी चाहिए। इसके लिए ए-4, परबनी क्रांति और अर्का अनामिका जैसी किस्में बेस्ट हैं। बुवाई से पहले खेत में अच्छी नमी होनी चाहिए, ताकि बीज जल्दी अंकुरित हो। प्रति एकड़ 10-15 किलो बीज काफी है। भिंडी की ये किस्में जल्दी तैयार होती हैं और बाजार में अच्छा दाम भी दिलाती हैं।
फ्रेंच बीन और मूली की खेती
अभी का तापमान फ्रेंच बीन और गर्मी वाली मूली की सीधी बुवाई के लिए ठीक है। ये मौसम बीजों के अंकुरण के लिए मुफीद है। वैज्ञानिकों की सलाह है कि उन्नत बीज किसी भरोसेमंद जगह से ही लें, ताकि पैदावार अच्छी हो। खेत को हल्का भुरभुरा कर लें और नमी का ध्यान रखें। ये दोनों फसलें कम समय में तैयार होकर मंडी तक पहुँच सकती हैं।
टमाटर और दूसरी सब्जियों की रोपाई
मौसम के हिसाब से टमाटर, मिर्च और कद्दू वाली सब्जियों की तैयार पौध इस हफ्ते रोप दी जा सकती है। नर्सरी में तैयार पौधों को खेत में लगाने से पहले मिट्टी में गोबर की खाद मिला लें। पानी का इंतजाम भी रखें, ताकि पौधे जल्दी जड़ पकड़ लें। ये फसलें थोड़ी मेहनत माँगती हैं, मगर फायदा भी अच्छा देती हैं।
प्याज में नीला धब्बा रोग से बचाव
प्याज की फसल अगर समय से बोई गई है, तो उसमें नीला धब्बा रोग का खतरा हो सकता है। वैज्ञानिक सलाह देते हैं कि फसल पर नजर रखें। अगर रोग के निशान दिखें, तो डाएथेन-एम-45 को 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें। इसमें 1 ग्राम टीपोल जैसा चिपकने वाला पदार्थ डालें और साफ मौसम में छिड़काव करें। इससे प्याज की गुणवत्ता भी बनी रहती है।
टमाटर को फल छेदक कीट से बचाएँ
टमाटर में फल छेदक कीट का खतरा बढ़ सकता है। इसके लिए खेत में पक्षी बसेरा लगाएँ, ताकि पक्षी कीटों को खा लें। खराब फलों को इकट्ठा करके जमीन में दबा दें। कीट की निगरानी के लिए फिरोमोन ट्रैप 2-3 प्रति एकड़ लगाएँ। गाँव में ये तरीका पहले भी आजमाया जाता था। वैज्ञानिक कहते हैं कि प्राकृतिक और आसान उपायों से फसल को नुकसान कम हो सकता है। टमाटर का सही दाम पाने के लिए ये सावधानी जरूरी है।
बैंगन की फसल की देखभाल
बैंगन में प्ररोह और फल छेदक कीट परेशान कर सकता है। ग्रसित फल और टहनियों को तोड़कर नष्ट कर दें। अगर कीट ज्यादा हों, तो स्पिनोसेड 48 ई.सी. को 1 मिलीलीटर प्रति 4 लीटर पानी में मिलाकर साफ मौसम में छिड़कें। ये उपाय बैंगन को स्वस्थ रखने में मदद करेंगे।
गेंदे में फूल सड़न रोग से सावधानी
इस मौसम में गेंदे की फसल में फूल सड़न रोग लग सकता है। फसल पर नजर रखें और लक्षण दिखते ही बाविस्टिन को 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। ये साफ मौसम में करें। गाँव में गेंदा फूल बाजार में अच्छा बिकता है, तो इसकी सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। वैज्ञानिकों की सलाह से फूलों की चमक और कीमत दोनों बची रहेंगी।
चेपा कीट से बचाव
सभी सब्जियों और सरसों की फसल में चेपा कीट का खतरा रहता है। इसकी निगरानी करें। सब्जियों में इमिडाक्लोप्रिड को 0.25-0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर तुड़ाई के बाद छिड़कें। छिड़काव के बाद एक हफ्ते तक फसल न तोड़ें। बीज वाली सब्जियों पर खास ध्यान दें।
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