रबी सीजन में धान की खेती करना चाहते हैं? एक्सपर्ट ने बताईं ये बेस्ट वैरायटी, उत्पादन होगा बेहतर

छत्तीसगढ़ के कई किसान भाई रबी मौसम में भी धान लगाने का मन बना रहे हैं। सरकार तो दलहन और तिलहन जैसी फसलें बोने की सलाह दे रही है, लेकिन अगर आप धान ही लेना चाहते हैं तो घबराएं नहीं। बिलासपुर के ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर कृषि महाविद्यालय के रोग विशेषज्ञ डॉ विनोद निर्मलकर ने कुछ ऐसे आसान और कारगर टिप्स दिए हैं, जिन्हें अपनाकर आप अच्छी फसल ले सकते हैं। इससे न सिर्फ पैदावार ठीक रहेगी, बल्कि खरीफ सीजन की तैयारी के लिए भी पूरा समय मिल जाएगा। डॉ साहब कहते हैं कि सही किस्म चुनें, समय पर काम करें और बीजों की अच्छी देखभाल करें तो रबी धान से भी अच्छा फायदा हो सकता है।

जल्दी पकने वाली किस्में चुनें, कीट-रोग का डर कम

डॉ विनोद निर्मलकर का साफ कहना है कि रबी में देर से पकने वाली किस्में न लगाएं। इसके बजाय अर्ली वैरायटी यानी हरोहन टाइप की किस्में बेहतर रहेंगी। जैसे महामाया, 1010 और इंदिरा राजेश्वरी। ये किस्में कम दिनों में तैयार हो जाती हैं, कीट और बीमारियों का हमला भी इन पर कम होता है। साथ ही पैदावार भी संतोषजनक मिलती है। अगर आप इनका चुनाव करेंगे तो फसल जल्दी कट जाएगी और खेत खाली होकर खरीफ धान के लिए तैयार हो जाएगा। कई किसानों ने पिछले सालों में इन्हीं किस्मों से अच्छा अनुभव लिया है।

ये भी पढ़ें- ठंड में खेती के लिए बेस्ट है तोरई की ये वैरायटी, मात्र 30 रुपये में यहां से खरीदें बीज

नर्सरी और रोपाई का सही समय न चूकें

रबी में ठंड की वजह से धान के पौधे देर से निकलते हैं, इसलिए समय का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। डॉ साहब सलाह देते हैं कि दिसंबर के आखिरी हफ्ते में ही नर्सरी यानी थरहा तैयार कर लें। फिर जनवरी के पहले या दूसरे हफ्ते में रोपाई कर दें। 14 जनवरी के बाद जैसे-जैसे मौसम गर्म होने लगता है, पौधों की बढ़वार तेज हो जाती है। अगर रोपाई देर हुई तो फसल लेट हो सकती है और खरीफ की बुवाई प्रभावित हो जाएगी। सही टाइमिंग से फसल अच्छी तरह पकती है और दाने भी भरपूर बनते हैं।

बीज उपचार से फसल को मजबूत बनाएं

धान की खेती में सबसे बड़ा खतरा बीज गलन और शुरुआती रोगों का होता है। इसलिए बुवाई से पहले बीजों का अच्छा उपचार जरूर करें। डॉ निर्मलकर बताते हैं कि रासायनिक तरीके से थीरम, कैप्टान या कार्बेन्डाजिम जैसे फफूंदनाशक इस्तेमाल करें। साथ ही जैविक तरीके से ट्राइकोडर्मा या स्यूडोमोनास से भी बीजों को ट्रीट कर सकते हैं। इससे पौधे मजबूत निकलते हैं, गलन की समस्या नहीं आती और कीटों का प्रकोप भी कम रहता है। ये छोटा सा काम करके आप बड़ी मुसीबत से बच सकते हैं।

कुल मिलाकर अगर आप रबी में धान लगा रहे हैं तो इन बातों का पालन करें। सरकार की सलाह तो अलग है, लेकिन वैज्ञानिक तरीके अपनाकर आप नुकसान से बच सकते हैं और अच्छी कमाई कर सकते हैं। अपने इलाके के कृषि विशेषज्ञ से भी संपर्क करके और जानकारी ले लें।

ये भी पढ़ें- किसानों को अब दिन में भी मिलेगी बिजली, किसान सूर्योदय योजना से 19.69 लाख किसानों को फायदा, मार्च 2026 तक 100% कवरेज

Author

  • Shashikant

    नमस्ते, मैं शशिकांत। मैं 2 साल से पत्रकारिता कर रहा हूं। मुझे खेती से सम्बंधित सभी विषय में विशेषज्ञता प्राप्‍त है। मैं आपको खेती-किसानी से जुड़ी एकदम सटीक ताजा खबरें बताऊंगा। मेरा उद्देश्य यही है कि मैं आपको 'काम की खबर' दे सकूं। जिससे आप समय के साथ अपडेट रहे, और अपने जीवन में बेहतर कर सके। ताजा खबरों के लिए आप Krishitak.com के साथ जुड़े रहिए।

    View all posts

Leave a Comment