किसानों के लिए वरदान बना रामदाना 2 बीघे में लागत सिर्फ 5 हजार, कमाई 1 लाख, ढाई महीने में होती है तैयार

किसान साथियों, रामदाना एक ऐसी फसल है, जो कम मेहनत, कम पानी में उग जाती है, और सिर्फ कुछ दिनों में हरे साग के लिए तैयार हो सकती है। इसे चौलाई, राजगिरा या मारसा भी कहते हैं, इसके पत्ते सब्जी में, दाने लड्डू, खीर में काम आते हैं। दाने के लिए 75-120 दिन लगते हैं, लेकिन जल्दी कमाई चाहिए, तो हरे पत्तों की कटाई 30 दिन में शुरू कर सकते हैं। बाजार में हरा रामदाना 50-80 रुपये किलो बिकता है, और ये सेहत के लिए भी शानदार है। तो चलिए, जानते हैं।

जमीन और मौसम की तैयारी

रामदाना हर तरह की मिट्टी में उग जाता है, दोमट, बलुई या हल्की मिट्टी इसके लिए सबसे अच्छी है। पानी रुकने वाली जगह से बचें, जल निकासी का इंतजाम करें। गर्मी और बारिश का मौसम, यानी मार्च से अगस्त, इसके लिए सही समय है। खेत की एक-दो बार जुताई करें, मिट्टी को भुरभुरा बनाएं। प्रति एकड़ 3-4 टन गोबर की खाद डालें, थोड़ी यूरिया (10-15 किलो) मिलाएं। मिट्टी तैयार हो जाए, तो बुआई शुरू करने का रास्ता खुल जाता है। 30 दिन में साग चाहिए, तो सही समय चुनना जरूरी है।

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बीज और बुआई का तरीका

इसके बीज छोटे होते हैं, नजदीकी दुकानों से या ऑनलाइन इंडिया मार्ट से लें। हरे साग के लिए प्रति एकड़ 1-1.5 किलो बीज काफी है, बीज को बारीक मिट्टी या राख में मिलाएं। खेत में 20-25 सेंटीमीटर की दूरी पर लाइनें बनाएं, बीज को हल्के हाथ से छिड़कें, ऊपर से पतली मिट्टी डाल दें। बुआई के बाद हल्का पानी छिड़कें, 5-7 दिन में अंकुर निकल आएंगे। जल्दी चाहिए, तो घनी बुआई करें, ताकि 30 दिन में पत्तियाँ तैयार हों। बीज को बाविस्टिन (2 ग्राम प्रति किलो) से उपचारित करें, अंकुरण बेहतर होगा।

देखभाल के आसान टिप्स

रामदाना को ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं, शुरू में मिट्टी को नम रखें, हर 4-5 दिन में हल्की सिंचाई करें। गर्मी में पानी थोड़ा बढ़ाएं, बारिश हो तो जरूरत कम पड़ती है। खरपतवार दिखें, तो 15-20 दिन बाद हल्की गुड़ाई करें, पौधों को हवा मिलेगी। कीड़ों से बचाने के लिए नीम का तेल (5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी) छिड़कें, सुंडी, चेपा भाग जाएंगे। गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट डालें, पत्तियाँ रसीली, हरी-भरी होंगी। 30 दिन में साग के लिए पौधे 20-25 सेंटीमीटर हों, तो कटाई शुरू करें।

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कटाई और उत्पादन

रामदाना का हरा साग कुछ दिनों में तैयार हो जाता है, पौधे 20-25 सेंटीमीटर लंबे हों, तो कैंची से ऊपरी पत्तियाँ काट लें। जमीन से 5-7 सेंटीमीटर ऊपर काटें, ताकि फिर से पत्तियाँ उग आएं। सुबह जल्दी काटें, पत्तियाँ ताजी रहेंगी। एक एकड़ से 20-30 क्विंटल हरा साग मिल सकता है, सही देखभाल करें, तो और बढ़ेगा। कटाई के बाद हल्का पानी दें, 15-20 दिन में दूसरी कटाई संभव है। दाने चाहिए, तो 75-100 दिन इंतजार करें।

मुनाफा कैसे बढ़ाएं

हरे रामदाने की पत्तियाँ बाजार में 50-80 रुपये किलो बिकती हैं, ढाबों, दुकानों को बेचें। शहर में डिमांड ज्यादा है, वहाँ सप्लाई करें, 100 रुपये किलो तक मिल सकता है। एक एकड़ से 20-30 क्विंटल साग बिके, तो 50-70 हजार की कमाई होगी। लागत 5-10 हजार निकालकर 40-60 हजार मुनाफा बचता है, दूसरी कटाई से और फायदा होगा। मिलकर बेचें, दाम बढ़ेगा। सूखे दाने भी बेच सकते हैं, 80-100 रुपये किलो मिलते हैं।

सावधानियाँ और सुझाव

खेत में पानी ज्यादा न रुके, जड़ें सड़ सकती हैं, गर्मी में पौधे मुरझाएं, तो हल्का पानी दें। रसायन कम डालें, जैविक खाद से साग स्वादिष्ट, सेहतमंद रहेगा। बीज बोने से पहले मिट्टी में नमी चेक करें, सूखी मिट्टी में अंकुरण कम होता है। कटाई के बाद साग को जल्दी बेचें, ताजगी बनी रहेगी। कृषि केंद्र से सलाह लें, अच्छे बीज, टिप्स मिलेंगे। छोटे खेत से शुरू करें, फिर बढ़ाएं।

रामदाना की खेती आसान, फायदेमंद है, सिर्फ 30 दिनों में हरा साग तैयार हो जाता है, और बाजार में अच्छा दाम लाता है। कम लागत, कम मेहनत में ये बंपर कमाई का रास्ता खोलता है। इसे अपने खेत में आजमाएं, और देखें कैसे ये छोटी फसल बड़ा मुनाफा देती है। मेहनत करें, तरीका सही रखें, फिर लाभ अपने आप आएगा।

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  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

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