किसान भाइयों, रबी मौसम में सरसों की खेती तिलहन फसलों में सबसे अहम है, जो मुनाफे का बड़ा जरिया है। अगर आप अक्टूबर में अगेती बुवाई कर जल्दी और रोगमुक्त फसल चाहते हैं, तो RH-0749 आपके लिए शानदार विकल्प है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार द्वारा विकसित यह अगैती किस्म 135-140 दिन में पककर 22-24 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज देती है।
इसके बीजों में 40-41% तेल की मात्रा इसे तेल उद्योगों के लिए खास बनाती है। हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, और मध्य भारत में यह किस्म खूब उगाई जाती है। पंजाब के पटियाला के किसान बलविंदर सिंह ने बताया कि इसकी खेती से उनकी फसल फरवरी में तैयार हुई और 5,700 रुपये/क्विंटल के दाम से 90,000 रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ। यह किस्म मजबूत तने और रोग प्रतिरोध के साथ किसानों का भरोसा जीत रही है।
RH-0749 की बेजोड़ खासियतें
RH-0749 अगेती सरसों की सबसे बड़ी ताकत इसकी उच्च तेल मात्रा और रोगों से लड़ने की क्षमता है। यह 135-140 दिन में कटाई के लिए तैयार हो जाती है, जिससे किसान फरवरी-मार्च में बाजार में अच्छे दाम पा सकते हैं। इसके दाने मध्यम आकार के, चमकदार काले-भूरे, और फलियाँ मजबूत होती हैं, जो पकने पर कम झड़ती हैं।
यह सफेद रतुआ, स्क्लेरोशियम रॉट, और झुलसा रोग के प्रति सहनशील है, साथ ही चूर्णिल फफूंद के प्रति भी मध्यम प्रतिरोधी है। अनुकूल परिस्थितियों में यह 25 क्विंटल/हेक्टेयर तक उपज दे सकती है। हरियाणा के रोहतक में किसानों ने इसकी खेती से प्रति हेक्टेयर 1.4 लाख रुपये तक कमाए। इसका 40-41% तेल कंटेंट इसे तेल मिलों और खल उद्योगों में पसंदीदा बनाता है।
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खेती का वैज्ञानिक ढंग
RH-0749 अगेती सरसों की खेती के लिए दोमट या रेतीली दोमट मिट्टी आदर्श है, जिसमें जल निकास अच्छा हो। खेत को दो-तीन बार जोतकर समतल करें और 20 टन गोबर खाद प्रति हेक्टेयर डालें। बुवाई के लिए 4-5 किलो प्रमाणित बीज प्रति हेक्टेयर लें। बीज को ट्राइकोडर्मा (5 ग्राम/किलो) या थायरम (3 ग्राम/किलो) से उपचारित करें, ताकि बीजजनित रोगों से बचाव हो। 1 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक अगेती बुवाई करें। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखें।
उर्वरक के लिए 80 किलो नाइट्रोजन, 40 किलो फॉस्फोरस, 40 किलो पोटाश, और 20 किलो सल्फर प्रति हेक्टेयर डालें। आधी नाइट्रोजन बुवाई के समय और बाकी 30 दिन बाद टॉप ड्रेसिंग में दें। तीन सिंचाइयाँ करें: बुवाई के 25-30 दिन बाद, फूल आने के समय, और दाना बनने के समय। राजस्थान के गंगानगर में इस तकनीक से उपज 20% बढ़ी।
कीट और रोगों से रक्षा कवच
RH-0749 अगेती सरसों सफेद रतुआ, स्क्लेरोशियम रॉट, और झुलसा रोग के प्रति सहनशील है, लेकिन सतर्कता जरूरी है। सफेद रतुआ के लिए मैनकोजेब (2.5 ग्राम/लीटर) या प्रोपिकोनाजोल (1 मिली/लीटर) का छिड़काव 35-40 दिन बाद करें। स्क्लेरोशियम रॉट के लिए ट्राइकोडर्मा से बीज उपचार और मिट्टी में जैविक कारक मिलाएँ। तेला (एफिड) के लिए इमिडाक्लोप्रिड (0.3 मिली/लीटर) का छिड़काव करें।
झुलसा रोग के लिए मैनकोजेब (2.5 ग्राम/लीटर) या ब्लाइटॉक्स (3 ग्राम/लीटर) का 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें। खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 15-20 दिन बाद निराई-गुड़ाई करें या पेंडिमेथालिन (1 किलो/हेक्टेयर) का प्री-इमर्जेंस छिड़काव करें। उत्तर प्रदेश के बरेली में इन उपायों से उपज 22% बढ़ी। फसल को 135-140 दिन में काटें, जब फलियाँ पीली पड़ने लगें।
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बाजार में मांग
RH-0749 अगेती सरसों के दानों का 40-41% तेल कंटेंट इसे तेल उद्योगों के लिए बेहद आकर्षक बनाता है। उचित भंडारण में, 8-10% नमी स्तर पर, यह 3-4 महीने तक बिना खराब हुए रहता है। इसके चमकदार काले-भूरे दाने तेल मिलों और खल उद्योगों में खूब पसंद किए जाते हैं। फरवरी-मार्च में सरसों की मांग बढ़ने से यह 5,500-6,000 रुपये/क्विंटल का दाम पाती है। हरियाणा के सिरसा में किसानों ने इसके तेल कंटेंट और बाजार मांग की तारीफ की।
मुनाफे का नया रास्ता
RH-0749 की अगेती बुवाई से किसान फरवरी-मार्च में फसल बेचकर 5,500-6,000 रुपये/क्विंटल का दाम पा सकते हैं। 22-24 क्विंटल/हेक्टेयर उपज से 1.2-1.4 लाख रुपये की कमाई हो सकती है। लागत 45,000-50,000 रुपये/हेक्टेयर आती है, जिसमें बीज, खाद, और मजदूरी शामिल है। शुद्ध मुनाफा 70,000-90,000 रुपये तक हो सकता है।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के अनुसार, इस किस्म ने उत्तर भारत में सरसों की खेती को 16% अधिक लाभकारी बनाया। किसान भाई हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार, या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से प्रमाणित बीज और सलाह लें। RH-0749 से कम समय में बड़ा मुनाफा कमाएँ।
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