सफेद मूसली की खेती से, जानें कैसे करें 5 महीने में 4-5 लाख की कमाई

Safed Musli ki kheti in Hindi : भारत में प्राचीन काल से आयुर्वेदिक और यूनानी दवाएँ बनाने में महारथ हासिल रही है। हमारे पूर्वजों ने आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से कई लाइलाज बीमारियों की दवाएँ बनाईं, जिसके चलते देश को आयुर्वेद का विश्व गुरु माना जाता है। ये देश विभिन्नताओं से भरा है, और हर हिस्से में अलग-अलग जलवायु मिलती है। इसी जलवायु विभिन्नता के कारण देश के लगभग हर कोने में कई औषधीय जड़ी-बूटियाँ पाई जाती हैं।

इनमें से एक है सफेद मूसली, जिसे वैज्ञानिक नाम क्लोरोफाइटम बोरीविलियेनम से जाना जाता है। ये कुदरती तौर पर जंगलों में उगती है, खासकर बरसात के मौसम में उष्ण कटिबंधीय जंगलों में। जड़ी-बूटी के जानकार इसे जंगलों से पहचान कर लाते हैं और इससे कई दवाएँ बनाते हैं। औषधीय गुणों के कारण सफेद मूसली की माँग पूरी दुनिया में तेज़ी से बढ़ रही है, जिसके चलते अब इसकी व्यावसायिक खेती शुरू हो गई है।

भारत के कई राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल और वेस्ट बंगाल में किसान इसे उगा रहे हैं। सरकार भी इसकी खेती के लिए अनुदान देती है, जिसकी जानकारी आप अपने जिला उद्यान कार्यालय से ले सकते हैं।

किसानों का कहना है कि एक एकड़ में सफेद मूसली की खेती से 4-5 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है। कम लागत में ये फसल किसानों को लखपति बना सकती है। आइए जानते हैं कि सफेद मूसली की खेती कैसे करें और इसके क्या फायदे हैं।

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सफेद मूसली क्या है?

सफेद मूसली एक औषधीय जड़ी-बूटी है, जो प्राकृतिक रूप से बरसात के मौसम में जंगलों में उगती है। इसका पौधा करीब 1.5 फुट लंबा होता है और ये सालाना फसल है। इसकी मांसल जड़ें जमीन के अंदर 8-10 सेंटीमीटर तक बढ़ती हैं। सफेद मूसली दो प्रकार की होती है सफेद और काली। जड़ी-बूटी के जानकारों के मुताबिक, सफेद मूसली ज्यादा उपयोगी है। इसकी तैयार जड़ें भूरे रंग की होती हैं। औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण ये दवा बनाने में खास जगह रखती है। इसमें सेपोनिन और सेपोजिनिन जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो इसे खास बनाते हैं।

सफेद मूसली के औषधीय गुण

औषधीय गुणों के लिहाज से सफेद मूसली बेहद अहम पौधा है। दुनिया भर की दवा कंपनियाँ इसे खरीदती हैं और इससे कई आयुर्वेदिक दवाएँ बनाती हैं। इसका इस्तेमाल खास तौर पर यौवनवर्धक, शक्तिवर्धक और वीर्यवर्धक दवाएँ बनाने में होता है। सफेद मूसली यौन क्षमता और शारीरिक ताकत बढ़ाने में मदद करती है। इसका सेवन मानसिक तनाव दूर करने और दिमाग की कार्यक्षमता बेहतर करने में भी फायदेमंद है। इसी वजह से इसकी माँग बहुत ज्यादा है, लेकिन उत्पादन माँग के मुकाबले कम होने से कभी-कभी दिक्कत होती है। अब भारत के कई राज्यों में किसान इसकी खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

एक एकड़ में 4-5 लाख की कमाई

जड़ी-बूटी के जानकार बताते हैं कि सफेद मूसली एक बहुमूल्य औषधीय फसल है, जो करीब 150 दिनों यानी पांच महीनों में तैयार हो जाती है। एक एकड़ खेत से 4-5 क्विंटल पैदावार मिल सकती है। बाज़ार में इसका औसत भाव 1000 से 1500 रुपये प्रति किलो रहता है। इस हिसाब से एक एकड़ की उपज से 4-5 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है। इसमें करीब 30 हज़ार रुपये की लागत लगती है। इसकी उपयोगिता और कीमत को देखते हुए ये खेती किसानों के लिए शानदार विकल्प है।

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सफेद मूसली की खेती कैसे करें? – Safed Musli ki kheti in Hindi

किसान और उद्यानिकी विशेषज्ञों के मुताबिक, सफेद मूसली की बुवाई के लिए जून का पहला या दूसरा हफ्ता सबसे सही समय है। बरसात से पहले यानी मई में खेत को एक-दो बार जोतकर सिंचाई करें, ताकि मिट्टी में नमी आ जाए। इसके बाद सफेद मूसली के बीज या कंद रोपे जाते हैं। प्रति हेक्टेयर 4-5 क्विंटल बीज की ज़रूरत होती है। बुवाई हाथ से या सीड ड्रिल मशीन से की जा सकती है।

पिछले साल की फसल से निकाले गए कंदों को बीज के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। एक पौधे में अगर 20 फिंगर्स हों, तो उससे 20 बीज बन सकते हैं। छोटे कंदों को बीज के रूप में रोपा जाता है। एक एकड़ में करीब 80 हज़ार पौधे लगाए जाते हैं।

सफेद मूसली की प्रजातियाँ

सफेद मूसली की कई प्रजातियाँ होती हैं, लेकिन एमसीबी-405, एमसीबी-412, एमसीटी-405, एमडीबी-13 और एमडीबी-14 को सबसे अच्छा माना जाता है। इनकी जड़ें एकसमान मोटाई की होती हैं, जिससे बाज़ार में अच्छी कीमत मिलती है। इसके अलावा क्लोरोफाइटम टयूवरोजम, क्लोरोफाइटम एटेनुएटम, क्लोरोफाइटम बोरिमिलियनम और क्लोरोफाइटम वोरिविलिएनम भी इसकी मुख्य प्रजातियाँ हैं। यहाँ एक टेबल में जानकारी दी गई है:

प्रजाति का नाम खासियत
एमसीबी-405 एकसमान जड़ें, अच्छी कीमत
एमसीबी-412 उच्च पैदावार
एमसीटी-405 रोग प्रतिरोधी
एमडीबी-13 और 14 बाज़ार में माँग
क्लोरोफाइटम टयूवरोजम औषधीय गुण

इन प्रजातियों को जलवायु और मिट्टी के हिसाब से चुनें।

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खेती के लिए जलवायु और मिट्टी

सफेद मूसली की खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु चाहिए, जहाँ सालाना बारिश 60 से 115 सेंटीमीटर तक हो। दोमट, रेतीली दोमट, लाल दोमट और कपास वाली लाल मिट्टी इसके लिए अच्छी है, बशर्ते उसमें जीवाश्म की मात्रा ज्यादा हो। मिट्टी का pH 7.5 तक होना चाहिए। ज्यादा pH वाली जमीन से बचें, वरना पैदावार प्रभावित हो सकती है।

खेत की तैयारी और देखभाल

सफेद मूसली की खेती जुलाई में शुरू होती है, लेकिन खेत को मई-जून में तैयार करना चाहिए। खेत की दो-तीन गहरी जुताई करें और उसे ऐसे ही छोड़ दें। बरसात शुरू होने पर 200-250 क्विंटल गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर डालकर दोबारा जुताई करें, ताकि खाद मिट्टी में मिल जाए। इसके बाद दो-तीन हल्की जुताई कर पाटा लगाएँ और क्यारियाँ बना लें। क्यारियों के बीच 30-40 सेंटीमीटर की दूरी रखें। बीजों को 13 सेंटीमीटर की दूरी पर इस तरह रोपें कि हर जगह 3-4 बीज हों।

रोपाई के समय 50 किलो नाइट्रोजन, 100 किलो फॉस्फोरस और 50 किलो पोटाश डालें। खरपतवार को काबू करने के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें। पौधों में कवक और फफूंद जैसे रोग दिखें, तो बायोपैकूनील या बायोधन का छिड़काव करें। ट्राईकोडर्मा (3 किलो) को गोबर की खाद में मिलाकर खेत में डालना भी फायदेमंद है।

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सिंचाई और देखभाल

पहली सिंचाई रोपाई के तुरंत बाद करें। इसके बाद मिट्टी की नमी के हिसाब से हर 10-15 दिन में पानी दें। बरसात के दिनों में सिंचाई की ज़रूरत नहीं होती। खेत में नमी बनाए रखने के लिए ड्रिप सिंचाई का इंतज़ाम करें। नमी और देखभाल सही हो, तो पैदावार अच्छी होगी।

कटाई और मुनाफा

सफेद मूसली की फसल पांच महीने में तैयार हो जाती है। जब पत्तियाँ सूख जाएँ और जड़ें पूरी तरह विकसित हों, तो कटाई करें। एक एकड़ से 4-5 क्विंटल जड़ें मिल सकती हैं। बाज़ार में 1000-1500 रुपये प्रति किलो के हिसाब से 4-5 लाख रुपये की कमाई होती है। लागत 30 हज़ार रुपये के आसपास रहती है, जिसके बाद शुद्ध मुनाफा 3.5-4.5 लाख रुपये तक हो सकता है।

सफेद मूसली की खेती किसानों के लिए कम लागत में लाखों की कमाई का शानदार मौका है। इसके औषधीय गुण और बाज़ार माँग इसे खास बनाते हैं। सही तरीके और देखभाल से आप बंपर पैदावार ले सकते हैं। तो इसकी खेती का प्लान बनाएँ और अच्छा मुनाफा कमाएँ। किसी सवाल के लिए नज़दीकी उद्यान कार्यालय से सलाह लें।

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  • Shashikant

    नमस्ते, मैं शशिकांत। मैं 2 साल से पत्रकारिता कर रहा हूं। मुझे खेती से सम्बंधित सभी विषय में विशेषज्ञता प्राप्‍त है। मैं आपको खेती-किसानी से जुड़ी एकदम सटीक ताजा खबरें बताऊंगा। मेरा उद्देश्य यही है कि मैं आपको 'काम की खबर' दे सकूं। जिससे आप समय के साथ अपडेट रहे, और अपने जीवन में बेहतर कर सके। ताजा खबरों के लिए आप Krishitak.com के साथ जुड़े रहिए।

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