किसान भाई अपने घर पर कैसे बनाएं साइलेज चारा ? पशुओं के लिए सर्वोत्तम, बनाने का देसी तरीका

Silage making: किसान साथियों, पशुपालन में साइलेज चारा पशुओं की सेहत और दूध के लिए एकदम बढ़िया साबित हो रहा है। साइलेज यानी हरा चारा, जिसे किण्वन के जरिए संरक्षित करते हैं, ताकि सालभर पशुओं को ताज़ा और पौष्टिक खाना मिले। ये सूखे चारे से ज्यादा रसीला और पचने में आसान होता है। अपने इलाके में मक्का, ज्वार या घास से साइलेज बनाया जा सकता है। मार्च का महीना चल रहा है, और गर्मी में इसे बनाने की तैयारी शुरू करने का सही वक्त है। आइए, समझें कि साइलेज कैसे बनाएँ और पशुओं को इसका फायदा कैसे दें।

साइलेज की खासियत और जरूरत

साइलेज चारा इसलिए खास है, क्यूँकि ये पशुओं को प्रोटीन, विटामिन और ऊर्जा से भरपूर खुराक देता है। हमारे यहाँ ये दूध की मात्रा को 20-30% तक बढ़ा सकता है। सूखा चारा खिलाने से पशुओं को पानी की कमी हो सकती है, लेकिन साइलेज रसदार होने की वजह से इसकी भरपाई करता है। अपने खेतों में इसे बनाकर सालभर स्टोर कर सकते हैं, जिससे सूखे मौसम में चारे की टेंशन खत्म हो जाती है। ये पाचन को दुरुस्त रखता है और पशुओं को तंदुरुस्त बनाता है। हमारे यहाँ ये पुराना ढंग अब नई सोच के साथ मेहनत को फायदे में बदल रहा है। पशुपालकों के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं।

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सही फसल का चुनाव और तैयारी

साइलेज के लिए मक्का अपने इलाके में सबसे बढ़िया फसल है, क्यूँकि ये जल्दी बढ़ता है और चीनी से भरपूर होता है, जो किण्वन के लिए जरूरी है। ज्वार और बाजरा भी अच्छे विकल्प हैं। मार्च-अप्रैल में मक्का बोया जा सकता है, जो 60-70 दिन में तैयार हो जाता है। अपने खेतों में फसल को तब काटें, जब वो हरी हो और दाने दूधिया अवस्था में हों—ये साइलेज की गुणवत्ता को बढ़िया बनाता है। घास जैसे बरसीम, लूसर्न या नेपियर को भी मिला सकते हैं। हमारे यहाँ 1 टन साइलेज के लिए 1.5-2 टन हरा चारा चाहिए। सही फसल चुनने से साइलेज पौष्टिक बनता है और पशु इसे चटखारे लेकर खाते हैं।

साइलेज बनाने का देसी तरीका

साइलेज बनाने (Silage making) के लिए सबसे पहले हरा चारा काटकर छोटे-छोटे टुकड़ों (2-3 सेमी) में तैयार करें। अपने आसपास एक गड्ढा खोदें—10x5x5 फीट का गड्ढा 1 टन साइलेज के लिए काफी है। गड्ढे में प्लास्टिक शीट बिछाएँ, फिर चारा डालें और हर परत को अच्छे से दबाएँ, ताकि हवा न रहे। 1 टन चारे में 1-2 किलो गुड़ का घोल (1 किलो गुड़ 5 लीटर पानी में) छिड़कें—ये किण्वन को तेज करता है। ऊपर से मिट्टी, पत्थर या भारी चीज से ढक दें और प्लास्टिक को कसकर बंद करें। हमारे यहाँ 30-40 दिन बाद साइलेज तैयार हो जाता है। इसकी गंध खट्टी और रंग हल्का भूरा होगा।

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इस्तेमाल का तरीका और देखभाल

साइलेज को गड्ढे से निकालते वक्त ऊपर से थोड़ा-थोड़ा खोलें और रोज़ 20-30 किलो प्रति पशु दें। अपने इलाके में इसे सूखे चारे या खल के साथ मिलाकर खिलाएँ, ताकि पशुओं को पूरा पोषण मिले। निकालने के बाद गड्ढे को फिर से ढक दें, वरना हवा लगने से खराब हो सकता है। हमारे यहाँ इसे सुबह-शाम खिलाने से पशु तरोताज़ा रहते हैं। अगर सही ढंग से बनाया जाए, तो ये 6-12 महीने तक चलता है। खराब होने से बचाने के लिए गड्ढे में पानी न जाने दें। ये छोटी सावधानी साइलेज को बेकार होने से बचाती है और पशुओं को फायदा देती है।

फायदे और कमाई का हिसाब

एक गाय या भैंस से साइलेज खिलाने पर दूध 2-3 लीटर बढ़ सकता है, यानी 50-100 रुपये की अतिरिक्त कमाई रोज़। अपने आसपास 1 टन साइलेज बनाने का खर्च 1,000-1,500 रुपये पड़ता है, जो 2-3 महीने चलता है। अगर 10 पशु हों, तो महीने में 15,000-30,000 रुपये का फायदा हो सकता है। सूखा चारा 20-25 रुपये किलो बिकता है, लेकिन साइलेज सस्ता और पौष्टिक पड़ता है। हमारे यहाँ ये तरीका जेब बचाता है और पशुओं की सेहत को चमकाता है। ये मेहनत का पूरा फल दूध और मुनाफे से देता है।

साइलेज से पशुओं को तंदुरुस्त बनाएँ

अपने इलाके में साइलेज इसलिए खास है, क्यूँकि ये सालभर ताज़ा चारा देता है और खेती-पशुपालन को जोड़ता है। मार्च-अप्रैल में फसल बोएँ और मई-जून में साइलेज बनाएँ, तो पशुओं की ताकत बनी रहेगी। गाँव के लोग कहते हैं कि अच्छा दूध पशुओं की सेहत से आता है। तो भाइयों, साइलेज चारा बनाएँ, पशुओं को तंदुरुस्त रखें और मेहनत का फल ढेर सारा पाएँ। ये देसी नुस्खा आपकी खेती और पशुपालन को सोना बना देगा!

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  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

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