राजस्थान के किसानों के लिए अच्छी खबर है! टोडाभीम क्षेत्र में सरसों की बुवाई का समय नजदीक आते ही सहकारी समितियों में डीएपी खाद के कट्टे पहुंचने शुरू हो गए हैं। यह खाद सरसों और दूसरी रबी फसलों के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि इसमें फास्फोरस होता है, जो पौधों की जड़ों को मजबूत करता है। इस बार सरकार और सहकारी समितियों ने समय रहते खाद की व्यवस्था की है, ताकि किसानों को बुवाई में किसी तरह की दिक्कत न हो। आइए जानते हैं कि टोडाभीम में डीएपी खाद का वितरण कैसे हो रहा है और यह किसानों के लिए क्यों जरूरी है।
सहकारी समितियों में डीएपी की आपूर्ति
टोडाभीम क्षेत्र की कई ग्राम सेवा सहकारी समितियों में डीएपी खाद के ट्रक पहुंच चुके हैं। सांकरवाड़ा ग्राम सेवा सहकारी समिति में 400 कट्टे खाद उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा, पाडला, भजेड़ा, नांगललाट, और माता सूला जैसी अन्य सहकारी समितियों में भी 400-400 कट्टे डीएपी खाद भेजी गई है। इन कट्टों को किसानों को 1350 रुपये प्रति कट्टा की दर से वितरित किया जाएगा। टोडाभीम क्रय विक्रय सहकारी समिति के मैनेजर सुरेंद्र सिंह ने बताया कि बाकी सहकारी समितियों में भी जल्द ही खाद पहुंचने वाली है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सरसों की बुवाई के समय किसी भी किसान को खाद की कमी न झेलनी पड़े।
डीएपी यानी डाय-अमोनियम फॉस्फेट एक ऐसी खाद है, जो सरसों और गेहूं जैसी रबी फसलों के लिए बहुत जरूरी है। इसमें 46% फास्फोरस और 18% नाइट्रोजन होता है, जो पौधों की जड़ों को मजबूत करता है और फसल को तेजी से बढ़ने में मदद करता है। टोडाभीम और करौली जैसे इलाकों में सरसों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। यहां की मिट्टी में फास्फोरस की कमी को पूरा करने के लिए डीएपी का इस्तेमाल बुवाई के समय किया जाता है। अगर यह खाद समय पर नहीं मिले, तो फसल की पैदावार कम हो सकती है। इसलिए सरकार ने इस बार पहले से ही खाद की आपूर्ति शुरू कर दी है, ताकि किसानों को परेशानी न हो।
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किसानों के लिए राहत की बात
पिछले कुछ सालों में राजस्थान के कई हिस्सों, खासकर करौली, भरतपुर, और सवाई माधोपुर जैसे जिलों में डीएपी खाद की कमी की खबरें आई थीं। किसानों को लंबी लाइनों में इंतजार करना पड़ता था, और कई बार कालाबाजारी के कारण खाद की कीमतें बढ़ जाती थीं। लेकिन इस बार टोडाभीम में सहकारी समितियों ने समय पर खाद की व्यवस्था करके किसानों को बड़ी राहत दी है। 1350 रुपये प्रति कट्टा की कीमत तय की गई है, जो बाजार में उपलब्ध खाद की तुलना में किफायती है। साथ ही, सहकारी समितियों के जरिए वितरण होने से कालाबाजारी की आशंका भी कम है।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान अपनी जरूरत के हिसाब से डीएपी खाद समय पर ले लें। सरसों की बुवाई अक्टूबर और नवंबर में शुरू होती है, इसलिए अभी से खाद का इंतजाम कर लेना चाहिए। एक एकड़ खेत के लिए औसतन 45 किलो का एक कट्टा डीएपी काफी होता है। अगर डीएपी की कमी हो, तो किसान सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसमें सल्फर और कैल्शियम होता है। यह सरसों की फसल के लिए फायदेमंद हो सकता है। किसानों को अपने नजदीकी सहकारी समिति से संपर्क करके खाद की उपलब्धता की जानकारी लेनी चाहिए और बुवाई से पहले खेत तैयार कर लेना चाहिए।
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