Strawberry Farming Tips: स्ट्रॉबेरी की खेती में अपनाएं ये उपाय! फल तेजी से बढ़ेंगे, साइज होगा बड़ा और चमकदार

Strawberry Farming Tips: स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाले किसान भाइयों के लिए एक बहुत अच्छी खबर है। वैज्ञानिकों ने नई तकनीक खोजी है जिससे फल बड़े, मीठे और चमकदार बनते हैं। इस तकनीक से पैदावार में 25 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है और बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं। कई किसान भाई पहले छोटे और कम मीठे फलों की शिकायत करते थे, लेकिन अब ये समस्या दूर हो सकती है।

वैज्ञानिकों ने पाया कि स्ट्रॉबेरी के फलों का आकार और स्वाद मुख्य रूप से हार्मोन और पोषक तत्वों के संतुलन पर निर्भर करता है। अगर फूल आने के समय और फल बनने की शुरुआत में सही पोषण मिले तो फल बड़े और गुणवत्ता वाले होते हैं। इस तकनीक में मुख्य रूप से जिबरेलिक एसिड (GA3), बोरॉन, कैल्शियम और पोटाश का सही समय पर इस्तेमाल किया जाता है। ये सब घरेलू या आसानी से मिलने वाले पदार्थ हैं, इसलिए लागत बहुत कम रहती है।

फलों को बड़ा बनाने के लिए क्या करें

वैज्ञानिकों की सलाह है कि फूल आने से ठीक पहले और फल बनने की शुरुआत में कुछ खास काम करें। सबसे पहले जिबरेलिक एसिड (GA3) का हल्का छिड़काव करें। 20-30 ppm की मात्रा में GA3 पानी में घोलकर पौधों पर स्प्रे करें। ये हार्मोन फलों के विकास को तेज करता है और आकार बढ़ाता है। लेकिन ज्यादा मात्रा न डालें, वरना फल खराब हो सकते हैं।

दूसरा महत्वपूर्ण पोषक तत्व है बोरॉन। फूल आने के समय बोरॉन की कमी से फल छोटे और टेढ़े-मेढ़े रह जाते हैं। 0.5 से 1 ग्राम बोरॉन प्रति लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करें। कैल्शियम का भी छिड़काव जरूरी है क्योंकि ये फलों की त्वचा मजबूत बनाता है और सड़न से बचाता है। कैल्शियम नाइट्रेट या बोरॉन-कैल्शियम मिश्रण का इस्तेमाल करें।

पोटाश भी फलों की मिठास और चमक के लिए बहुत जरूरी है। फल बनने की शुरुआत में पोटाश युक्त खाद दें। ये फलों में शुगर बढ़ाता है और स्वाद मीठा बनाता है। सिंचाई का भी खास ध्यान रखें। फूल और फल बनने के समय मिट्टी में नमी बनी रहनी चाहिए लेकिन जलभराव न हो।

रोग और कीट से बचाव

बड़े फलों के साथ रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि फल बनने के समय ग्रे मोल्ड या पाउडरी मिल्ड्यू का प्रकोप हो सकता है। इसके लिए नीम तेल या ट्राइकोडर्मा का छिड़काव करें। अगर रोग ज्यादा दिखे तो कार्बेन्डाजिम या हेक्साकोनाजोल का इस्तेमाल करें। लेकिन हमेशा जैविक तरीके पहले अपनाएं ताकि फल स्वस्थ और सुरक्षित रहें।

पौधों की अच्छी छंटाई करें। ज्यादा घने पौधों में हवा नहीं जाती और रोग फैलते हैं। पौधों के बीच दूरी रखें और समय पर निराई-गुड़ाई करें।

बड़े और मीठे स्ट्रॉबेरी के फल बाजार में 150 से 250 रुपये किलो तक बिकते हैं। अगर एक एकड़ में 8-10 टन पैदावार हुई तो अच्छे दाम पर लाखों रुपये की कमाई हो सकती है। कई किसान भाई इस तकनीक से पहले से ही अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

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