Sugarcane Farming Tips: गन्ना खेती की सबसे बड़ी नकदी फसलों में से एक है, लेकिन इसे कीटों और रोगों का खतरा हमेशा बना रहता है। अगर सही समय पर सही कदम न उठाए जाएँ, तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है। इस बार चीनी मिलों ने गन्ने की कम आपूर्ति और कीटों के हमले की शिकायत की है, जिससे चीनी उत्पादन में कमी के आसार हैं। लेकिन किसान भाइयों के लिए अच्छी खबर यह है कि कुछ आसान और वैज्ञानिक तरीकों से गन्ने की फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है और मुनाफा बढ़ाया जा सकता है। आइए, बुवाई से लेकर कटाई तक के जरूरी उपाय जानते हैं।
खेत की तैयारी का सही तरीका
गन्ने की खेती शुरू करने से पहले खेत को अच्छे से तैयार करना जरूरी है। सबसे पहले खेत को 45 सेंटीमीटर गहराई तक जोत लें, ताकि मिट्टी नरम और भुरभुरी हो जाए। इसके बाद प्रति हेक्टेयर 25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालें। खाद को मिट्टी में अच्छे से मिलाने के लिए ट्रैक्टर से एक बार गहरी जुताई करें। फिर 80 सेंटीमीटर की दूरी पर मेड और खांचे बनाएँ। मेड की ऊँचाई 20 सेंटीमीटर और लंबाई 10 मीटर रखें। तैयार खांचों में प्रति हेक्टेयर 375 किलो सुपर फॉस्फेट डाल दें। यह शुरुआती तैयारी फसल को मजबूत नींव देगी।
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बुवाई के दिन ये करें
बुवाई का दिन गन्ने की खेती में बहुत अहम होता है। 6-8 महीने पुरानी नर्सरी से प्रति हेक्टेयर 75,000 दो-कली वाले गन्ने के टुकड़े लें। चाहें तो एक-कली वाले टुकड़ों को पॉलिथीन बैग में लगाकर पौधे तैयार किए जा सकते हैं। बुवाई से पहले गन्ने के टुकड़ों को 50 लीटर पानी में 2.5 किलो यूरिया और 2.5 किलो चूने का घोल बनाकर 10 मिनट तक डुबोएँ। इससे बीज रोगमुक्त होंगे। इन टुकड़ों को 2 सेंटीमीटर गहराई पर खांचों में बो दें। हर 10 खांचों में से एक में दो पंक्तियों में गन्ने के टुकड़े लगाएँ।
खरपतवार पर रखें नजर
बुवाई के बाद खरपतवार फसल की बढ़त को रोक सकते हैं। रोपण के तीसरे दिन 500 लीटर पानी में 2.5 किलो एट्राटाफ मिलाकर स्प्रेयर से छिड़काव करें। इससे खरपतवार नियंत्रित रहेंगे। बुवाई के 25वें दिन कुछ जगहों पर पौधे न उगने की समस्या हो सकती है। इसके लिए पहले से पॉलिथीन बैग में तैयार पौधों से खाली जगहों को भर लें। रोपण के 30वें दिन 5 किलो एजोस्पिरिलम और 5 किलो फॉस्फोबैक्टीरियम को 250 किलो सड़ी खाद में मिलाकर पौधों के नीचे डालें और तुरंत पानी दें। यह मिट्टी को पोषण देगा और जड़ें मजबूत होंगी।
सिंचाई और कीटों से सुरक्षा
रोपण के 35वें से 100वें दिन तक हर 7-10 दिन में सिंचाई करें। इस दौरान छेदक कीट फसल को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इन्हें रोकने के लिए पौधों पर सल्फर का छिड़काव करें और मिट्टी से ढक दें। अगर 25-30% पौधे प्रभावित हों, तो हर 100 मीटर खांचे में सल्फर मिलाकर कीटों के ऊपरी और निचले हिस्से पर छिड़काव करें। 45वें दिन खेत में हाथ से निराई करें और प्रति हेक्टेयर 110 किलो नाइट्रोजन, 60 किलो पोटाश, और 35 किलो नीम केक डालें। यह फसल को ताकत देगा और कीटों से बचाएगा।
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फसल की आगे की देखभाल
रोपण के 60वें, 90वें, और 120वें दिन खास ध्यान देना जरूरी है। सूखे की स्थिति में 2.5% यूरिया और 2.5% पोटेशियम क्लोराइड का मिश्रण छिड़कें। 60वें दिन 5 किलो एजोस्पिरिलम, 5 किलो फॉस्फोबैक्टीरियम, और 250 किलो सड़ी खाद डालकर पानी दें। 90वें दिन फिर से निराई करें और मिट्टी चढ़ाएँ। इसके बाद 110 किलो नाइट्रोजन, 60 किलो पोटाश, और 35 किलो नीम केक डालें। 120वें दिन 60 किलो पोटेशियम डालकर तुरंत सिंचाई करें। ये कदम फसल को स्वस्थ और मजबूत रखेंगे।
कीटों का अंतिम प्रबंधन और कटाई
रोपण के 225वें दिन मीली बग, सफेद मक्खी, और स्केल कीटों से बचने के लिए 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में एसिटामिप्रिड या थियामेथोक्सम का छिड़काव करें। 260वें दिन पाइरिला और चूसने वाले कीटों के लिए पत्तियों के नीचे 50 ग्राम प्रति लीटर इमामेक्टिन बेंजोएट छिड़कें। 170वें से 360वें दिन तक हर 15 दिन में पानी दें। कटाई से 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें, ताकि गन्ने में चीनी की मात्रा बढ़े। इन तरीकों से फसल सुरक्षित रहेगी और मुनाफा बढ़ेगा।
किसानों के लिए सलाह
किसान भाइयों, गन्ने की खेती में कीटों और रोगों से बचने के लिए समय पर ये आसान कदम उठाएँ। नजदीकी कृषि केंद्र से अच्छे बीज और सलाह लें। खेत की मिट्टी की जाँच करवाएँ और खाद का सही इस्तेमाल करें। इन देसी और वैज्ञानिक तरीकों से न सिर्फ फसल बचेगी, बल्कि चीनी मिलों को अच्छी आपूर्ति देकर अच्छा मुनाफा भी कमाया जा सकता है।
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