Sugarcane Ratoon: गन्ने की पेड़ी से होगी बंपर कमाई! सही तरीके से अपनाएं ये टिप्स, मुख्य फसल से भी ज्यादा मुनाफा

Sugarcane Ratoon: गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए “पेड़ी” एक ऐसा तरीका है, जो कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने का दम रखता है। मुख्य फसल की कटाई के बाद खेत में बचे ठूंठों से दोबारा फसल लेना ही पेड़ी कहलाता है। यही वजह है कि इस पद्धति में न तो नए सिरे से खेत तैयार करने का खर्च आता है और न ही दोबारा बीज की जरूरत पड़ती है। विशेषज्ञों के मुताबिक पेड़ी की खेती मुख्य फसल की तुलना में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक सस्ती पड़ती है और यह जल्दी तैयार होकर कटाई के लिए आ जाती है। कई इलाकों में देखा गया है कि सही मैनेजमेंट के साथ पेड़ी से मुख्य फसल के बराबर या उससे अधिक उत्पादन भी लिया जा सकता है।

पेड़ी की सबसे बड़ी ताकत यह है कि फसल की शुरुआत पहले से तैयार जड़ों और ठूंठों से होती है, इसलिए पौधे जल्दी बढ़ते हैं और खेत जल्दी हरा हो जाता है। इसके अलावा पेड़ी के गन्ने में रस की गुणवत्ता और चीनी की मात्रा भी अच्छी पाई जाती है। लेकिन ध्यान रखना जरूरी है कि पेड़ी की सफलता पूरी तरह किस्म और शुरुआती प्रबंधन पर निर्भर करती है। इसलिए वही किस्म पेड़ी के लिए लें जो विशेषज्ञों द्वारा अनुमोदित हो और आपके इलाके की जलवायु के लिए सही मानी जाती हो।

पेड़ी की शुरुआत में गलती न करें

पेड़ी की अच्छी फसल की शुरुआत मुख्य फसल की सही कटाई से होती है। गन्ने की कटाई करते समय धारदार औजार का उपयोग करना जरूरी है ताकि ठूंठ जमीन की सतह के बराबर कटे। जब ठूंठ ऊँचा या टेढ़ा कटता है तो नीचे की कलिकाएँ सही तरीके से नहीं फूटतीं और पौध कमजोर रह जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि ठूंठ जितना साफ और बराबर कटेगा, उतनी तेजी से नई कलिकाएँ निकलेंगी और जड़ें जमीन में गहराई तक जाएँगी। इससे पौधे मजबूत होते हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है।

कटाई के तुरंत बाद “स्टबल शेविंग” यानी ठूंठों की छंटाई एक जरूरी काम माना जाता है। इस प्रक्रिया में पुराने और बेकार हिस्से हट जाते हैं और नई स्वस्थ कलिकाओं को निकलने का मौका मिलता है। बहुत से किसान इसी स्टेप को छोड़ देते हैं, जिससे पेड़ी की पैदावार घट जाती है। अगर आप पेड़ी का असली लाभ चाहते हैं तो स्टबल शेविंग को कभी नजरअंदाज न करें।

खाली जगह भरना जरूरी

कटाई के बाद मजदूरों और मशीनों की आवाजाही से खेत में कई जगह खाली पट्टियाँ बन जाती हैं। यह नुकसान छोटा लगता है, लेकिन पेड़ी की कुल पैदावार इसी कारण बहुत कम हो जाती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि खाली जगहों को भरने के लिए पॉलीबैग में तैयार किए गए 35 से 40 दिन पुराने पौधों का उपयोग करना चाहिए। अगर ठूंठों की छंटाई के साथ गैप फिलिंग भी सही समय पर कर दी जाए, तो पेड़ी की उपज में जबरदस्त बढ़ोतरी होती है और खेत का पौध स्टैंड एकसमान रहता है।

पेड़ी में खाद-पानी का सही फॉर्मूला अपनाएँ

पेड़ी की फसल मुख्य फसल के मुकाबले थोड़ी अधिक नाइट्रोजन मांगती है। इसलिए खाद प्रबंधन में ढील देने से फसल कमजोर हो सकती है। वैज्ञानिक अनुशंसा के अनुसार प्रति एकड़ 3 बैग यूरिया, 5 बैग सुपर फास्फेट और 1.50 बैग पोटाश का उपयोग पेड़ी में लाभदायक माना जाता है। इसके साथ एज़ोस्पिरीलम और फास्फोबैक्टर जैसे जैव उर्वरक मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद करते हैं और जड़ों की मजबूती बढ़ाते हैं। जब मिट्टी की ताकत अच्छी होती है तो पेड़ी की फसल भी बेहतर निकलती है।

सिंचाई में अगर ड्रिप विधि संभव हो तो यह पेड़ी के लिए सबसे बढ़िया तरीका है, क्योंकि इसमें पानी की बचत होती है और जड़ों तक नमी लगातार बनी रहती है। जिन किसानों के पास ड्रिप की सुविधा नहीं है, वे “एकांतर कूड़” विधि से सिंचाई कर सकते हैं। इसमें भी पानी का उपयोग कम होता है और फसल को पर्याप्त नमी मिलती रहती है।

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पत्तियाँ जलाना बंद करें

कई किसान कटाई के बाद गन्ने की सूखी पत्तियाँ खेत में जला देते हैं, लेकिन यह आदत पेड़ी के लिए नुकसानदायक है। सूखी पत्तियों को जलाने की जगह कतारों के बीच बिछाना ज्यादा फायदेमंद है। इससे खेत में नमी बनी रहती है, खरपतवार कम उगते हैं और मिट्टी की ऊपरी परत में तापमान संतुलित रहता है। यही पत्तियाँ बाद में सड़कर प्राकृतिक खाद बन जाती हैं और मिट्टी को नाइट्रोजन व पोटाश भी देती हैं।

खरपतवार नियंत्रण के लिए पेड़ी शुरू होने के 1, 4 और 7 सप्ताह बाद निराई-गुड़ाई करना जरूरी है। इससे फसल को शुरू में ही बढ़ने का पूरा मौका मिलता है। मजदूरों की कमी होने पर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार एट्राजीन का उपयोग किया जा सकता है। मल्चिंग का एक अतिरिक्त फायदा यह भी है कि इससे अगेती तना छेदक जैसे कीटों का हमला कम होता है।

सहफसली खेती से होगा डबल फायदा

पेड़ी की कतारों के बीच काफी जगह खाली रहती है, और यही जगह किसानों की अतिरिक्त कमाई का रास्ता बन सकती है। किसान इस खाली जगह में मूंग, उड़द जैसी दलहन फसल या फ्रेंच बीन जैसी सब्जियाँ उगा सकते हैं। इससे एक तरफ किसान को अतिरिक्त आय मिलती है और दूसरी तरफ मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है। दलहन फसलें जमीन में नाइट्रोजन जोड़ती हैं, जो गन्ने के लिए भी फायदेमंद होता है।

श्रम की समस्या को देखते हुए ICAR-IISR ने एक ऐसी मशीन भी विकसित की है जो ठूंठ छंटाई, खाद डालने और मिट्टी चढ़ाने का काम एक साथ कर देती है। इस मशीन के उपयोग से समय और मजदूरी दोनों बचते हैं और पेड़ी का काम आसान हो जाता है।

पेड़ी की फसल कब तैयार होगी

एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि पेड़ी की फसल मुख्य फसल से लगभग 1 महीना पहले कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसका मतलब किसान को जल्दी भुगतान और जल्दी बिक्री का मौका मिलता है। सही तकनीक अपनाने से पेड़ी किसानों के लिए एक ऐसी खेती साबित हो सकती है जो कम लागत में ज्यादा मुनाफा देती है।

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