गन्ने की खेती भारत में एक महत्वपूर्ण फसल है, जिससे किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। बसंतकालीन गन्ने की बिजाई के लिए सबसे उपयुक्त समय मध्य फरवरी से मार्च के अंत तक का होता है। इस समय तापमान 30-35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, जो गन्ने के अंकुरण और विकास के लिए आदर्श माना जाता है। इस अवधि में बिजाई करने से कम समय और कम लागत में अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। आइए, जानते हैं कि बसंतकालीन गन्ने की खेती के लिए सही किस्म, मिट्टी का चयन, बीज उपचार और बिजाई का तरीका क्या है।
मिट्टी का चयन
गन्ने की खेती लगभग सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन दोमट और काली दोमट मिट्टी इसके लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। ये मिट्टियां नमी को अच्छी तरह से बनाए रखती हैं और पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं, जो गन्ने के विकास के लिए जरूरी हैं। बलुई मिट्टी में भी गन्ने की खेती की जा सकती है, लेकिन इसके लिए सिंचाई की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। मिट्टी की तैयारी के लिए खेत की गहरी जुताई करें और गोबर की खाद डालकर मिट्टी को उपजाऊ बनाएं। मिट्टी को एक हफ्ते तक सूखने दें और फिर बिजाई करें।
बीज का चयन और उपचार
अच्छी पैदावार के लिए स्वस्थ और उन्नत किस्म के बीजों का चयन करना बहुत जरूरी है। गन्ने के बीज के रूप में तीन आंख वाले टुकड़ों का उपयोग किया जाता है। बिजाई से पहले बीजों को उपचारित करना चाहिए। बीज उपचार के लिए 250 ग्राम एरिटान को 100 लीटर पानी में घोलें और बीजों को इस घोल में 5 मिनट तक डुबोकर रखें। इससे बीजों में रोगों का खतरा कम हो जाता है।
बिजाई का तरीका
बसंतकालीन गन्ने की बिजाई 15-20 मार्च तक पूरी कर लेनी चाहिए। बिजाई के लिए खेत में 75-90 सेंटीमीटर की दूरी पर कूंड़ बनाए जाते हैं। इन कूंड़ों में गन्ने के टुकड़ों को 10 सेंटीमीटर की गहराई पर बोया जाता है। एक हेक्टेयर खेत के लिए बीज की मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि आप एक आंख, दो आंख या तीन आंख वाले टुकड़ों का उपयोग कर रहे हैं। एक आंख वाले टुकड़ों के लिए 1,33,750 टुकड़े, दो आंख वाले के लिए 60,000-65,000 टुकड़े और तीन आंख वाले के लिए 40,000-45,000 टुकड़े प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होते हैं।
गन्ने की उन्नत किस्में
गन्ने की खेती के लिए उन्नत किस्मों का चयन करना बहुत जरूरी है। ये किस्में क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों के लिए शीघ्र पकने वाली किस्में जैसे सीओ 98014 (करन – 1), सीओ 0118 (करन 2), सीओ 0238 (करन – 4), सीओ 0214 (करन-5), सीओ 0238 (करन – 6), और सीओ 0237 (करन – 8) उपयुक्त हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए को. शा. 8436 और को. शा. 687 किस्में बेहतर मानी जाती हैं। पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के लिए मध्य और देर से पकने वाली किस्में जैसे सी. ओ. एच. – 110, सी.ओ.एस. – 767, सी. ओ. एच. – 1148, सी.ओ.एच.-199, सी.ओ.एच.-99, और सी.ओ. एस. – 8436 अच्छी पैदावार देती हैं।
गन्ने की खेती से अधिक मुनाफा कैसे कमाएं?
बसंतकालीन गन्ने की खेती से अच्छा मुनाफा कमाने के लिए सही समय पर बिजाई, उन्नत किस्मों का चयन और उचित देखभाल बहुत जरूरी है। दोमट या काली दोमट मिट्टी में गोबर की खाद डालकर खेत तैयार करें। बीजों को एरिटान के घोल से उपचारित करें और नियमित सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण करें। सही तरीके से खेती करके किसान गन्ने की पैदावार बढ़ा सकते हैं और अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें- मियाजाकी आम की खेती: कैसे करें शुरुआत और कमाएं लाखों रुपये