Supari Ki Kheti Kaise karen: किसान भाइयों, अगर आप पारंपरिक खेती से हटकर कुछ ऐसा करना चाहते हैं, जो सालों-साल मुनाफा दे और मेहनत भी कम लगे, तो सुपारी की खेती आपके लिए सुनहरा मौका है। भारत दुनिया में सुपारी का सबसे बड़ा उत्पादक है, और इसका 50% उत्पादन यहीं होता है। पूजा-पाठ से लेकर पान, गुटखा, और औषधीय उपयोग तक, सुपारी की माँग कभी कम नहीं होती।
सबसे खास बात, एक बार सुपारी का पेड़ लगाने के बाद ये 70 साल तक फल देता है। ऊपर से सरकार प्लांटेशन क्रॉप डेवलपमेंट स्कीम (PCDS) के तहत बीज सामग्री और पॉलिपाइप्स पर 50% सब्सिडी भी दे रही है। आइए, जानें सुपारी की खेती कैसे करें, कितना मुनाफा मिलेगा, और सब्सिडी का फायदा कैसे उठाएँ।
सुपारी की खेती क्यों फायदेमंद
सुपारी की खेती लंबे समय तक मुनाफा देने वाली खेती है। इसके पेड़ नारियल जैसे 50-70 फीट लंबे होते हैं और 7-8 साल में फल देना शुरू करते हैं। एक बार पेड़ तैयार हो जाए, तो ये 70 साल तक हर साल 15-30 किलो सुपारी देता है। बाजार में सुपारी की कीमत 400-700 रुपये प्रति किलो तक होती है, हालाँकि कुछ मंडियों में ये 285-290 रुपये प्रति किलो भी बिकती है।
अगर आप एक एकड़ में 400 पेड़ लगाते हैं और प्रति पेड़ 20 किलो सुपारी भी मिले, तो 400 रुपये प्रति किलो के हिसाब से 32 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है। कर्नाटक, केरल, असम, और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में ये खेती खूब होती है, और अब बिहार के किसान भी इसे अपना रहे हैं।
खेत की तैयारी और नर्सरी तकनीक- Supari Ki Kheti Kaise karen
सुपारी की खेती के लिए दोमट चिकनी मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है, हालाँकि ये किसी भी मिट्टी में उग सकती है। खेत की गहरी जुताई करें और पुरानी जड़ें या खरपतवार हटाएँ। जल निकासी की अच्छी व्यवस्था करें, क्योंकि ज्यादा पानी सुपारी के पौधों को नुकसान पहुँचाता है। इसके लिए खेत में छोटी-छोटी नालियाँ बनाएँ। सुपारी के बीज को पहले नर्सरी में तैयार करें।
बीज को 2-3 मिनट के लिए प्रति लीटर पानी में डुबोएँ, फिर क्यारियों में बोएँ। 12-18 महीने में पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं। जुलाई का महीना, जब मॉनसून शुरू होता है, रोपाई के लिए सबसे सही है। पौधों को 2.7 मीटर की दूरी पर लगाएँ, ताकि हवा और धूप अच्छे से मिले। देसी किसान गड्ढों में 10-15 किलो गोबर की खाद और 1 किलो नीम की खली मिलाते हैं, जो पौधों को मज़बूत बनाता है।
देखभाल और खाद का देसी नुस्खा
सुपारी के पौधों को शुरुआती 15 दिन तक रोज़ पानी दें, फिर मिट्टी की नमी के हिसाब से हफ्ते में एक बार सिंचाई करें। पौधों के चारों ओर सूखी घास या पुआल बिछाएँ, ताकि नमी बनी रहे और खरपतवार कम उगें। हर साल 10-20 किलो गोबर की खाद और 100 ग्राम नाइट्रोजन, 40 ग्राम फॉस्फोरस, और 140 ग्राम पोटाश प्रति पेड़ डालें।
किसान जीवामृत, जिसमें गोमूत्र, गोबर, और गुड़ मिलाया जाता है, हर 15 दिन में डालते हैं। ये फल की गुणवत्ता और मिठास बढ़ाता है। साल में 2-3 बार गुड़ाई करें, ताकि मिट्टी भुरभुरी रहे। कीटों से बचाव के लिए नीम तेल और लहसुन का घोल छिड़कें। फल की तुड़ाई तब करें, जब तीन-चौथाई हिस्सा पक जाए, ताकि बाजार में अच्छा दाम मिले।
50% सब्सिडी का फायदा
सुपारी की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्लांटेशन क्रॉप डेवलपमेंट स्कीम (PCDS) के तहत बीज सामग्री और पॉलिपाइप्स पर 50% सब्सिडी दे रही है। उदाहरण के लिए, अगर बीज और पॉलिपाइप्स की लागत 20,000 रुपये है, तो आपको सिर्फ़ 10,000 रुपये खर्च करने होंगे, बाकी सरकार देगी। ये योजना कर्नाटक, केरल, असम, और बिहार जैसे राज्यों में लागू है। सब्सिडी का लाभ लेने के लिए अपने नज़दीकी कृषि या बागवानी विभाग से संपर्क करें। आपको ज़मीन के कागज़, आधार कार्ड, और बैंक खाता विवरण जैसे दस्तावेज़ देने होंगे। कुछ राज्य ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी देते हैं, जैसे बिहार में http://horticulturebihar.gov.in पर। जल्दी आवेदन करें, क्योंकि ये योजना “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर है।
मुनाफे की संभावनाएँ और प्रोसेसिंग
सुपारी की खेती से मुनाफा कई तरह से कमा सकते हैं। एक पेड़ से औसतन 20 किलो सुपारी मिले और 400 रुपये प्रति किलो का दाम मिले, तो एक पेड़ से 8,000 रुपये की कमाई हो सकती है। अगर एक एकड़ में 400 पेड़ हों, तो 32 लाख रुपये तक का मुनाफा संभव है। बाजार में सुपारी की कीमत 285-700 रुपये प्रति किलो के बीच रहती है, जो क्वालिटी और मंडी पर निर्भर करता है।
प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर आप सुपारी को सुखाकर, ग्रेडिंग करके, या पान मसाले के लिए तैयार करके दाम बढ़ा सकते हैं। कर्नाटक के किसान प्रोसेसिंग यूनिट से दोगुना मुनाफा कमा रहे हैं। बिहार में भी ऐसी यूनिट शुरू करने की संभावना है। सुपारी को बाँस की टोकरियों में पुआल के साथ पैक करें, ताकि ये ताज़ा रहे और लागत कम हो।
सावधानियाँ और देसी टिप्स
सुपारी की खेती में धैर्य की ज़रूरत है, क्योंकि फल आने में 7-8 साल लगते हैं। खेत में जलभराव न होने दें, वरना पौधे सड़ सकते हैं। पेड़ों को हवा और धूप के लिए पर्याप्त जगह दें। कीटों, जैसे स्टिंक बग, से बचाव के लिए नीम का अर्क और गोमूत्र का छिड़काव करें। फल पकने के समय पक्षियों से बचाव के लिए जाल लगाएँ। देसी किसान पेड़ के तने पर गोबर और मिट्टी का लेप लगाते हैं, जो कीटों को दूर रखता है। उन्नत किस्में, जैसे मंगला, सुमंगला, और वीटीएलएच-1, चुनें, जो ज़्यादा पैदावार देती हैं। खेती शुरू करने से पहले स्थानीय कृषि केंद्र से मिट्टी की जाँच कराएँ और विशेषज्ञ की सलाह लें।
70 साल तक कमाई
सुपारी की खेती एक बार शुरू करने के बाद 70 साल तक मुनाफा देती है। सरकार की 50% सब्सिडी लागत को आधा करती है, और गोबर, नीम, और जीवामृत जैसे देसी नुस्खे खेती को सस्ता और बेहतर बनाते हैं। भारत में सुपारी की माँग पान, गुटखा, और पूजा-पाठ में हमेशा बनी रहती है। अगर आप बिहार, कर्नाटक, या किसी अन्य राज्य में खेती करते हैं, तो सुपारी का बाग लगाकर अपनी और अगली पीढ़ी की कमाई सुरक्षित कर सकते हैं। अपने नज़दीकी कृषि केंद्र से संपर्क करें, सब्सिडी के लिए आवेदन करें, और सुपारी की खेती से लाखों की कमाई शुरू करें।
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