शकरकंदी की खेती से लाखों की कमाई का रहे मुजफ्फरपुर के किसान, महज 700 रुपए है लागत जानें तरीका

Sweet Potato Farming: भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां खेती-किसानी बड़ी आबादी का मुख्य व्यवसाय है। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के किसान फेंकू पासवान ने परंपरागत खेती से हटकर शकरकंद की खेती को अपनाकर एक नई मिसाल कायम की है। उनकी यह पहल न केवल उनके परिवार की आमदनी बढ़ा रही है, बल्कि अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रही है। आइए जानते हैं, शकरकंद की खेती के फायदों और इसकी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से।

शकरकंद: पारंपरिक फसलों का बेहतर विकल्प

शकरकंद, जिसे बिहार में “अल्हुआ” के नाम से भी जाना जाता है, एक ऐसी फसल है जो कम लागत में अधिक मुनाफा देती है। यह फसल किसानों के लिए पारंपरिक खेती का एक शानदार विकल्प बनती जा रही है। फेंकू पासवान के अनुभव के अनुसार, एक कट्ठा जमीन पर शकरकंद की खेती करने में मात्र 500-700 रुपये की लागत आती है। इतनी लागत में वे 300 किलो शकरकंद उगा लेते हैं। बाजार में शकरकंद की कीमत 20 रुपये प्रति किलो होने पर भी यह 1 कट्ठा से 6,000 रुपये तक की आय प्रदान करती है।

शकरकंद की खेती का तरीका

फेंकू पासवान के अनुसार, शकरकंद की खेती करना बहुत ही सरल और कम मेहनत वाला कार्य है। इस खेती के लिए किसी विशेष तकनीक की आवश्यकता नहीं होती। खेत की मिट्टी को तैयार कर शकरकंद की लत्ती को रोपा जाता है। इसके बाद नियमित सिंचाई और जैविक खाद का प्रयोग किया जाता है। फसल पकने में 120-130 दिन का समय लगता है। जब पौधे की पत्तियां पीली होने लगती हैं, तब यह संकेत होता है कि कंद खोदने का समय आ गया है।

उत्पादन क्षमता और मुनाफा

फेंकू पासवान के अनुसार, 1 हेक्टेयर भूमि पर शकरकंद की खेती से लगभग 25 टन फसल प्राप्त होती है। यदि इसे 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाए तो 1.25 लाख रुपये की शुद्ध आय होती है।

शकरकंद का साइज 500-750 ग्राम तक होता है और 1 कट्ठा भूमि पर 5 क्विंटल तक उत्पादन हो सकता है।

शकरकंद की खासियत

शकरकंद एक पोषक तत्वों से भरपूर फसल है। इसमें कई प्रकार के विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं। यह मधुमेह रोगियों के लिए भी लाभकारी है। इसे लोग दूध या नमक के साथ खाना पसंद करते हैं। यह न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि पाचन तंत्र को भी दुरुस्त करता है।

मुजफ्फरपुर में शकरकंद की खेती का बढ़ता चलन

फेंकू पासवान की सफलता देखकर गांव के अन्य किसान भी शकरकंद की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कम लागत और ज्यादा मुनाफे के कारण यह फसल उनके लिए फायदेमंद साबित हो रही है।

फेंकू पासवान ने अपनी मेहनत और सूझबूझ से यह दिखा दिया कि पारंपरिक खेती से हटकर नई फसलों को अपनाने से कैसे बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। उनकी इस पहल ने उन्हें गांव में एक “कृषि उद्यमी” का दर्जा दिला दिया है।

सरकार की योजनाएं

बिहार सरकार किसानों को शकरकंद जैसी फसलों के लिए प्रोत्साहित कर रही है। जैविक खाद और बीज के लिए सब्सिडी, नई तकनीकों की जानकारी और सरकारी मंडियों में उचित मूल्य जैसी योजनाएं शकरकंद की खेती को बढ़ावा दे रही हैं।

मुजफ्फरपुर के किसान फेंकू पासवान की कहानी यह साबित करती है कि नई सोच और मेहनत से खेती को भी एक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। शकरकंद की खेती पारंपरिक फसलों के मुकाबले बेहतर मुनाफा देती है और इसके लिए ज्यादा लागत की भी जरूरत नहीं होती। यदि आप भी खेती-किसानी में नए विकल्प तलाश रहे हैं, तो शकरकंद की खेती एक बेहतरीन शुरुआत हो सकती है। फेंकू पासवान की इस कहानी से प्रेरणा लेकर अन्य किसान भी अपनी आमदनी को दोगुना कर सकते हैं।

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  • Shashikant

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