Sweet Potato Organic Farming: शकरकंद एक पोषक तत्वों से भरपूर फसल है, जिसकी खेती भारत में बड़े पैमाने पर की जाती है। यह न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। ऑर्गेनिक खेती के माध्यम से शकरकंद उगाने से इसकी गुणवत्ता बेहतर होती है और रसायनों से मुक्त रहने के कारण बाजार में इसकी मांग भी अधिक होती है। यदि आप शकरकंद की जैविक खेती करना चाहते हैं, तो इस लेख में आपको पूरी जानकारी मिलेगी।
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Toggleशकरकंद की आर्गेनिक खेती (Sweet potato organic farming) के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी
शकरकंद को गर्म और आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है। इसकी अच्छी पैदावार के लिए 21°C से 29°C तक का तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह फसल भरपूर धूप में तेजी से बढ़ती है और उष्णकटिबंधीय व उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में इसकी खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है।
मिट्टी की बात करें तो बलुई दोमट मिट्टी सबसे अधिक उपयुक्त होती है, जिसमें पानी का निकास अच्छा हो। यदि मिट्टी बहुत भारी या जलभराव वाली होगी, तो कंदों के सड़ने का खतरा बढ़ जाता है। मिट्टी का pH मान 5.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। जैविक खेती के लिए मिट्टी में जैविक खाद जैसे गोबर की खाद, हरी खाद और वर्मीकंपोस्ट मिलाना जरूरी होता है, ताकि मिट्टी उपजाऊ बनी रहे।
शकरकंद की उन्नत किस्में
भारत में शकरकंद की कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं, जिनमें पूसा सफेद, पूसा रेड, कोवई सवरूप और सतारका प्रमुख हैं। यदि आप ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं, तो देशी बीजों का ही चयन करें, क्योंकि ये अधिक रोग प्रतिरोधी होते हैं और स्थानीय जलवायु के अनुकूल होते हैं।

खेत की तैयारी और जैविक खाद का प्रयोग
खेत की अच्छी तैयारी शकरकंद की बेहतर उपज के लिए आवश्यक होती है। सबसे पहले खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए और इसे 10-15 दिन तक खुला छोड़ देना चाहिए, ताकि हानिकारक कीट और फफूंद नष्ट हो जाएं।
मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए प्रति हेक्टेयर 15-20 टन गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट मिलाना जरूरी है। इसके अलावा, नीम खली और जैविक फास्फोरस का प्रयोग किया जा सकता है। खेत को ऊंची क्यारियों में तैयार करना चाहिए, जिससे जलभराव की समस्या न हो और फसल का विकास सही तरीके से हो सके।
शकरकंद की बुवाई का सही तरीका
शकरकंद को बीज से नहीं, बल्कि बेलों या कंदों के माध्यम से उगाया जाता है। इसकी बुवाई के लिए फरवरी-मार्च और जून-जुलाई का समय सबसे अच्छा होता है।बेलों को 20-25 सेमी लंबे टुकड़ों में काटकर नर्सरी में तैयार किया जाता है, और फिर इन्हें मुख्य खेत में लगाया जाता है। पौधों के बीच 30-40 सेमी और पंक्तियों के बीच 60-75 सेमी की दूरी रखनी चाहिए, ताकि फसल को उचित मात्रा में पोषक तत्व और जगह मिल सके।
सिंचाई और जल प्रबंधन
शकरकंद की फसल के लिए संतुलित सिंचाई बहुत जरूरी होती है। बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए और फिर हर 7-10 दिन के अंतराल पर पानी देना चाहिए। अत्यधिक पानी देने से जड़ों के सड़ने का खतरा रहता है, इसलिए जल निकासी का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। फूल आने और कंद बनने की अवस्था में पर्याप्त नमी बनाए रखना आवश्यक होता है, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर बनी रहे।
जैविक खाद का प्रयोग
शकरकंद की जैविक खेती (Sweet potato organic farming) में रासायनिक उर्वरकों की जगह प्राकृतिक खाद का प्रयोग किया जाता है। गोबर की खाद, वर्मीकंपोस्ट, नीम खली और जीवामृत जैसे जैविक खादों का उपयोग करने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और फसल को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं।
कीट एवं रोग नियंत्रण के जैविक उपाय
शकरकंद की खेती में कई प्रकार के कीट और रोग नुकसान पहुंचा सकते हैं। जैविक खेती में रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता, इसलिए प्राकृतिक उपाय अपनाने चाहिए।
शकरकंद की मक्खी से बचाव के लिए नीम तेल का छिड़काव किया जा सकता है। जड़ गलन रोग से बचने के लिए ट्राइकोडर्मा और जैविक फफूंदनाशक का प्रयोग करना चाहिए। फफूंद जनित रोगों के लिए छाछ के घोल का छिड़काव एक प्रभावी उपाय है।
शकरकंद की कटाई और उत्पादन
शकरकंद की फसल 90-120 दिनों में तैयार हो जाती है। कटाई से पहले खेत में हल्की सिंचाई करने से मिट्टी नरम हो जाती है, जिससे कंद आसानी से निकाले जा सकते हैं। कटाई के बाद कंदों को छाया में सुखाना चाहिए, ताकि उनकी गुणवत्ता बनी रहे और भंडारण में कोई समस्या न हो।
शकरकंद का भंडारण और विपणन
शकरकंद को ठंडी और हवादार जगह में 2-3 महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है। जैविक उत्पादों की मांग अधिक होने के कारण इसे ऑर्गेनिक स्टोर्स, लोकल मार्केट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचा जा सकता है।इसके अलावा, शकरकंद से आटा, चिप्स और अन्य स्नैक्स तैयार कर बाजार में बेचे जा सकते हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त मुनाफा मिल सकता है।
शकरकंद की जैविक खेती (Sweet potato organic farming) न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है, बल्कि यह एक सफल व्यावसायिक मॉडल भी है। जैविक विधियों से खेती करने पर फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचता। यदि आप सही तकनीकों और जैविक तरीकों का पालन करें, तो शकरकंद की खेती से अच्छी पैदावार और बढ़िया मुनाफा कमा सकते है.
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मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।
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