भारत में दूध उत्पादन हर साल नई ऊंचाइयां छू रहा है। देश का कोई भी राज्य ऐसा नहीं है, जहां दूध का उत्पादन बढ़ न रहा हो। रेगिस्तान और सूखे के लिए जाना जाने वाला राजस्थान दूध उत्पादन में तीसरे स्थान पर है, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। दूध देने वाले पशुओं की संख्या और दूध उत्पादन के मामले में भारत दुनिया में पहले स्थान पर है। दूध और उससे बने उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर पैकेटबंद घी, पनीर, और दही जैसे उत्पादों की।
ऐसे में केंद्र सरकार की राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) और नेशनल लाइवस्टॉक मिशन (NLM) योजनाएं डेयरी कारोबार को बढ़ाने का सुनहरा मौका दे रही हैं। इस लेख में भारत के दूध उत्पादन की स्थिति, इन योजनाओं की खासियत, और डेयरी कारोबार के फायदों के बारे में बताया गया है।
भारत में दूध उत्पादन की बढ़त
भारत में दूध उत्पादन पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है। आठ साल पहले दुधारू पशुओं की संख्या 8 करोड़ थी, जो अब 12 करोड़ तक पहुंच चुकी है। राजस्थान जैसे सूखाग्रस्त राज्य का तीसरे स्थान पर होना दिखाता है कि मेहनत और सही दिशा से हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। दूध और उससे बने उत्पादों की मांग बढ़ रही है, क्योंकि लोग प्रोटीन युक्त भोजन की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। शहरों में पैकेटबंद दूध उत्पादों, जैसे दही, पनीर, और घी की डिमांड ने डेयरी कारोबार को और आकर्षक बना दिया है। जो लोग डेयरी व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए सरकारी योजनाएं एक मजबूत सहारा दे रही हैं।
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राष्ट्रीय गोकुल मिशन
राष्ट्रीय गोकुल मिशन का मुख्य लक्ष्य गाय और भैंस की देसी नस्लों, जैसे साहिवाल, गिर, और जाफराबादी, का संरक्षण और विकास करना है। इस योजना के तहत देसी पशुओं की गुणवत्ता को बढ़ाने और दूध उत्पादन में वृद्धि पर जोर दिया जाता है। देसी नस्लों का दूध फैट में उच्च होता है, जो घी, मक्खन, और पनीर जैसे उत्पादों के लिए बहुत कीमती है। RGM के जरिए पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने और उनकी आनुवंशिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। ये योजना किसानों को देसी नस्लों के पशुपालन के लिए प्रोत्साहित करती है, ताकि वे बढ़ती मांग को पूरा कर सकें और ज्यादा मुनाफा कमा सकें।
नेशनल लाइवस्टॉक मिशन
नेशनल लाइवस्टॉक मिशन का मकसद पशुपालन को एक बड़े कारोबार का रूप देना है। इस योजना के तहत गाय, भैंस, भेड़, और बकरी जैसी नस्लों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर काम किया जाता है। साथ ही, दूध, मांस, अंडा, और ऊन जैसे उत्पादों का उत्पादन बढ़ाने के लिए कई सुविधाएं दी जाती हैं। NLM के तहत चारा और फीड उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाता है। चारा ब्लॉक, साइलेज, और घास बांधने की इकाइयों की स्थापना के लिए 50 लाख रुपये तक की 50 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है। इसके अलावा, पशुधन बीमा और अनुसंधान के लिए भी सहायता दी जाती है। ये योजना डेयरी कारोबार को कम लागत में ज्यादा फायदेमंद बनाने का रास्ता दिखाती है।
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डेयरी कारोबार क्यों है खास
डेयरी कारोबार आज भारत में सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक है। बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण ने दूध और उसके उत्पादों की मांग को बढ़ाया है। देसी नस्लों का दूध, जो फैट में उच्च होता है, बाजार में अच्छा दाम दिलाता है। राजस्थान जैसे राज्य, जहां पानी की कमी है, वहां भी डेयरी ने किसानों की आय को कई गुना बढ़ाया है। RGM और NLM योजनाएं देसी नस्लों को बढ़ावा देकर दूध उत्पादन को और मजबूत कर रही हैं। ये योजनाएं छोटे और मझोले किसानों को बड़ा कारोबारी बनने का मौका देती हैं। साथ ही, पैकेटबंद दूध उत्पादों की बढ़ती मांग ने डेयरी को एक स्थायी और लाभकारी व्यवसाय बना दिया है।
सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे लें
RGM और NLM योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों को कुछ आसान कदम उठाने होंगे। सबसे पहले, www.udyamimitra.in पोर्टल पर जाकर उपलब्ध सब्सिडी और योजनाओं की जानकारी लेनी चाहिए। इसके लिए पहचान पत्र, जमीन के कागज, बैंक खाता विवरण, और प्रोजेक्ट प्रस्ताव जैसे दस्तावेज तैयार रखें। आवेदन ऑनलाइन जमा करने के बाद, राज्य स्तरीय समिति और केंद्र सरकार इसे मंजूर करती है। मंजूरी के बाद सब्सिडी सीधे बैंक खाते में पहुंचती है। नजदीकी पशुपालन विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, या डेयरी सहकारी समितियों से और जानकारी ली जा सकती है। कई राज्यों में डेयरी विकास के लिए अतिरिक्त योजनाएं भी हैं, जो लोन और सब्सिडी देती हैं।
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