सितंबर का महीना शुरू हो गया है, और उत्तर भारत के किसानों के लिए फूलगोभी की खेती मुनाफे का सुनहरा मौका लाया है। अगर सही समय पर अगेती किस्मों की बुवाई की जाए, तो फसल जल्दी तैयार होती है और बाजार में ऊंचा दाम मिलता है। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि सितंबर के पहले सप्ताह में फूलगोभी की बुवाई करने से किसानों की कमाई दोगुनी हो सकती है। उन्नत किस्में जैसे पूसा शुभ्रा, काशी अघैनी, और पूसा हाइब्रिड-2 ज्यादा पैदावार और रोगों से सुरक्षा देती हैं।
सितंबर में बुवाई नवंबर में कमाई
फूलगोभी की खेती में समय का खेल बहुत जरूरी है। सितंबर के पहले सप्ताह में बुवाई करने से फसल नवंबर तक तैयार हो जाती है, जब बाजार में इसकी मांग और कीमत दोनों चरम पर होती हैं। डॉ. पाठक के मुताबिक, पौधों के बीच 45 सेंटीमीटर और लाइनों के बीच 60 सेंटीमीटर की दूरी रखें। 5-6 सप्ताह पुरानी पौध लगाएं और संतुलित खाद का इस्तेमाल करें। इससे पौधे मजबूत बनते हैं और फूल की गुणवत्ता बढ़ती है। सही देखभाल से पैदावार 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है, जो किसानों की जेब भर सकती है।
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पूसा शुभ्रा और पंत शुभ्रा
पूसा शुभ्रा, जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) ने विकसित किया है, उत्तर भारत के लिए शानदार किस्म है। यह ब्लैक रॉट और कर्ल ब्लाइट जैसे रोगों से लड़ सकती है। यह प्रति हेक्टेयर 250 क्विंटल तक पैदावार देती है। पंत शुभ्रा भी उत्तरी भारत की जलवायु के लिए मुफीद है। यह अगस्त-सितंबर में बोई जाती है और 200-250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज देती है। इसके फूल सफेद और ठोस होते हैं, जो बाजार में खूब पसंद किए जाते हैं। ये दोनों किस्में जल्दी तैयार होती हैं और रोगों से कम प्रभावित होती हैं।
काशी अघैनी और पूसा हाइब्रिड-2
काशी अघैनी, जिसे भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी ने बनाया है, सितंबर की बुवाई के लिए बेस्ट है। यह नवंबर तक तैयार हो जाती है और प्रति हेक्टेयर 250-260 क्विंटल उपज देती है। इसके फूल 500-800 ग्राम के होते हैं और झुलसा रोग से लड़ने की क्षमता रखते हैं। पूसा हाइब्रिड-2 भी IARI की उन्नत किस्म है, जो 60-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके फूल 500-750 ग्राम के होते हैं और 250-270 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार देती है। इसकी पत्तियां फूल को धूप से बचाती हैं, जिससे रंग सफेद और गुणवत्ता टॉप रहती है।
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पूसा शरद
पूसा शरद मध्यम-विलंब से तैयार होने वाली किस्म है, जिसकी बुवाई अगस्त के अंत से सितंबर के मध्य तक की जा सकती है। इसके फूल 700-900 ग्राम के होते हैं और प्रति हेक्टेयर 250 क्विंटल तक पैदावार देती है। यह झुलसा रोग और सिर की शिराओं के गलने जैसी बीमारियों से लड़ सकती है। यह सीधी बुवाई और रोपाई दोनों के लिए उपयुक्त है। किसान इस किस्म को अपनाकर देर से बुवाई में भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
किसान भाइयों, सितंबर में फूलगोभी की बुवाई आपके लिए मुनाफे का बड़ा मौका है। पूसा शुभ्रा, काशी अघैनी, या पूसा हाइब्रिड-2 जैसी अगेती किस्में चुनें। मिट्टी की जांच करवाएं, संतुलित खाद डालें, और खेत की नियमित निगरानी करें। अपने नजदीकी कृषि केंद्र से उन्नत बीज लें और सही समय पर बुवाई करें। रोगों से बचाव के लिए विशेषज्ञों की सलाह लें। सही देखभाल से आपकी फूलगोभी बाजार में ऊंचा दाम लाएगी।
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