नाइट्रोजन कितने प्रकार का होता है, जानें कौन सा नाइट्रोजन फसलों में कब देना है, जिससे की उत्पादन हो जबरदस्त

किसान साथियों, नाइट्रोजन फसलों का सबसे जरूरी पोषक तत्व है, ये पत्तियों को हरा-भरा करता है, पौधों को मजबूत बनाता है, और पैदावार को आसमान तक ले जाता है, अगर इसे सही समय, सही मात्रा में न दें, तो फसल कमजोर रहती है, और मेहनत बेकार हो सकती है, आपके लिए इसे आसान बनाता है, ये कई रूपों में आता है, जैसे जैविक, रासायनिक, तरल और वायुमंडलीय, हर रूप का सही इस्तेमाल आपकी फसल को नई ताकत दे सकता है, बस तरीका समझें, और खेत को लहलहाने दें, ये न सिर्फ फसल बढ़ाता है, बल्कि मिट्टी की सेहत भी सुधारता है, तो इसे सही ढंग से अपनाएँ, और कमाई का नया रास्ता खोलें।

नाइट्रोजन के अलग-अलग रूप

नाइट्रोजन चार मुख्य प्रकारों में मिलता है, जैविक नाइट्रोजन गोबर, हरी खाद से आता है, रासायनिक नाइट्रोजन यूरिया, डीएपी जैसे उर्वरकों से मिलता है, तरल नाइट्रोजन लिक्विड यूरिया के रूप में होता है, और वायुमंडलीय नाइट्रोजन हवा से फलीदार फसलें सोखती हैं, हर प्रकार का अपना खास फायदा है, जैविक मिट्टी को लंबे समय तक पोषण देता है, रासायनिक तुरंत असर दिखाता है, तरल सूखे में मदद करता है, और वायुमंडलीय मुफ्त में मिट्टी को ताकत देता है, इनका सही चयन फसल की जरूरत पर निर्भर करता है, गेहूं, धान में रासायनिक, सब्जियों में तरल, और चना, मूंग से वायुमंडलीय नाइट्रोजन ले सकते हैं, ये सभी फसलों को हरा-भरा रखने का कमाल करते हैं।

जैविक नाइट्रोजन : मिट्टी का पोषण

जैविक नाइट्रोजन गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, ढैंचा, मूंग जैसी हरी खाद से मिलता है, इसमें 0.5-3% नाइट्रोजन होता है, जो धीरे-धीरे रिलीज होता है, और मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाता है, बुआई से पहले 5-10 टन खाद प्रति एकड़ डालें, या हरी खाद को 40-50 दिन बाद काटकर मिट्टी में मिलाएँ, ये गेहूं, धान, सब्जियों के लिए शानदार है, क्योंकि ये प्राकृतिक तरीके से पौधों को ताकत देता है, पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाता, और मिट्टी को सालों तक स्वस्थ रखता है, इसे शुरू में डालें, ताकि फसल की जड़ें मजबूत हों, और पैदावार लंबे समय तक अच्छी रहे, ये तरीका सस्ता भी है, और मेहनत का पूरा फल देता है।

रासायनिक नाइट्रोजन, तेजी से ताकत

रासायनिक नाइट्रोजन यूरिया (46%), अमोनियम सल्फेट (21%), डीएपी (18%) जैसे उर्वरकों से मिलता है, ये तेजी से काम करता है, पौधों को तुरंत हरा-भरा करता है, और पैदावार को जल्दी बढ़ाता है, बुआई के समय 20-25 किलो यूरिया प्रति एकड़ डालें, फिर 25-30 दिन बाद 20 किलो और दें, मक्का, बाजरा में फूल आने पर 15-20 किलो इस्तेमाल करें, इसे पानी के साथ मिलाकर डालें, ताकि नाइट्रोजन मिट्टी में रिसे नहीं, और पौधों को पूरा फायदा मिले, ये गन्ना, कपास जैसी फसलों के लिए भी बेस्ट है, सही मात्रा में डालें, तो फसल में जान आ जाती है, और बाजार में अच्छा दाम मिलता है।

तरल नाइट्रोजन, सूखे में संजीवनी

तरल नाइट्रोजन लिक्विड यूरिया, अमोनिया सॉल्यूशन के रूप में आता है, इसमें 20-30% नाइट्रोजन होता है, जो पत्तियों से सीधे सोख लिया जाता है, और सूखे में फसलों को बचाता है, 5-10 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर पत्तियों पर छिड़कें, या ड्रिप सिस्टम से 1-2 लीटर प्रति एकड़ डालें, टमाटर, मिर्च, भिंडी में फूल आने पर 2-3 बार दें, ये गर्मी, सूखे में तुरंत ताकत देता है, सुबह या शाम छिड़काव करें, ताकि पत्तियाँ न जलें, और नाइट्रोजन बर्बाद न हो, फलों के पेड़ों में भी इसका कमाल दिखता है, ये तरीका आसान है, और कम समय में असर दिखाता है।

फसलों को नाइट्रोजन, सही समय और तरीका

फसलों को नाइट्रोजन सही समय पर देना जरूरी है, गेहूं में बुआई के समय और 25-30 दिन बाद 20-25 किलो यूरिया डालें, धान में रोपाई के बाद और फूल आने पर 15-20 किलो दें, सब्जियों में हर 15-20 दिन बाद हल्का छिड़काव करें, जैविक से शुरू करें, रासायनिक से तेजी लाएँ, तरल से सूखे में मदद लें, मूंग, चना बोकर वायुमंडलीय नाइट्रोजन लें, मिट्टी का टेस्ट कराएँ, अगर कमी हो तो मात्रा बढ़ाएँ, लेकिन ज्यादा न डालें, वरना फसल जल सकती है, सही तरीके से दें, तो पैदावार दोगुनी होगी, और लागत भी बचेगी।

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  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

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