Types Of Mulching Paper: भाइयों, हमारे यहाँ खेती को आसान और फायदेमंद बनाने के लिए मल्चिंग पेपर का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ये मिट्टी को ढकता है, नमी बचाता है, खरपतवार रोकता है और फसल को मौसम की मार से बचाता है। लेकिन सवाल ये है कि कौन सा मल्चिंग पेपर कहाँ लगाएँ, ताकि खेती लहलहाए। मार्च का महीना चल रहा है, और अब गर्मी की फसलों की तैयारी का वक्त है। अलग-अलग रंग और मोटाई के मल्चिंग पेपर अलग-अलग काम करते हैं। आइए, अपनी सहज भाषा में समझें कि कौन सा पेपर कब और कहाँ इस्तेमाल करें।
काला मल्चिंग पेपर
काला मल्चिंग पेपर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। ये सूरज की रोशनी को मिट्टी तक नहीं पहुँचने देता, जिससे खरपतवार नहीं उगते। खेतों में भिंडी, मिर्च, बैंगन या टमाटर जैसी सब्जियों के लिए ये बढ़िया है। मार्च में जब गर्मी बढ़ती है, तो ये मिट्टी को ठंडा रखता है और नमी बनाए रखता है। 25-30 माइक्रोन मोटाई वाला काला पेपर छोटी फसलों के लिए ठीक रहता है। इसे बिछाने से पानी की बचत होती है, और कीटनाशकों का खर्च भी कम होता है। अपने इलाके में इसे ड्रिप सिंचाई के साथ यूज़ करें, तो फसल तेजी से बढ़ती है। ये सस्ता भी है और हर जगह मिल जाता है।
पारदर्शी मल्चिंग पेपर
पारदर्शी मल्चिंग पेपर उन जगहों के लिए बढ़िया है, जहाँ ठंड ज्यादा पड़ती है। ये सूरज की गर्मी को मिट्टी तक पहुँचाता है और खेत को गर्म रखता है। अपने आसपास सर्दियों में स्ट्रॉबेरी, शिमला मिर्च या फूलगोभी की खेती के लिए इसे आजमाएँ। 20-25 माइक्रोन मोटाई वाला पारदर्शी पेपर ठीक रहता है। मार्च में अगर आप पहाड़ी इलाकों में हैं, तो इसे लगाकर फसल को जल्दी तैयार कर सकते हैं। ये मिट्टी को गर्म करता है, लेकिन खरपतवार रोकने में कम असरदार है। इसलिए इसे हल्की ठंड और कम खरपतवार वाले खेतों में डालें। इससे फसल का सीजन थोड़ा आगे बढ़ जाता है।
सिल्वर-काला मल्चिंग पेपर
सिल्वर-काला मल्चिंग पेपर दो रंगों वाला होता है—ऊपर सिल्वर और नीचे काला। सिल्वर हिस्सा कीटों को भगाता है, खासकर सफेद मक्खी और थ्रिप्स को। खेतों में मिर्च, टमाटर या खीरे की खेती में ये बढ़िया काम करता है। काला हिस्सा खरपतवार रोकता है, और सिल्वर हिस्सा कीटों को सूरज की गर्मी से मार देता है। 30-40 माइक्रोन मोटाई वाला ये पेपर गर्मी और मानसून दोनों में फायदेमंद है। अपने यहाँ इसे मार्च में बिछाएँ, तो फसल शुरू से ही सुरक्षित रहती है। ये थोड़ा महँगा है, लेकिन कीटनाशकों की लागत बचाता है और पैदावार बढ़ाता है।
बिछाने का सही तरीका और फसल का चयन
मल्चिंग पेपर को सही ढंग से बिछाना जरूरी है। खेत को जोतकर समतल करें, फिर ड्रिप पाइप बिछाएँ। पेपर को तानकर लगाएँ, लेकिन ज्यादा खींचें नहीं, वरना फट सकता है। किनारों को मिट्टी से दबा दें। इसमें छेद करके पौधे लगाएँ। ये गन्ना, गेहूँ या सरसों जैसी घनी फसलों के लिए नहीं है। सब्जियाँ, फल या मसाले जैसे मिर्च, हल्दी और अदरक के लिए इस्तेमाल करें। अपने इलाके में मौसम और फसल के हिसाब से पेपर चुनें। 90 सेमी चौड़ाई वाला पेपर ज्यादातर खेतों के लिए ठीक रहता है। ऐसा करने से मिट्टी की नमी बनी रहती है और फसल जल्दी तैयार होती है।
फायदा और मुनाफे का हिसाब
मल्चिंग पेपर से पैदावार 20-30% तक बढ़ सकती है। एक बीघे में काला पेपर 800-1,000 रुपये का पड़ता है, और सिल्वर-काला 1,200-1,500 रुपये का। इससे टमाटर या मिर्च से 4-5 क्विंटल ज्यादा निकल सकता है, यानी 8-10 हज़ार रुपये का फायदा। पानी और कीटनाशक का खर्च भी 30-40% कम होता है। खेतों में ये मिट्टी को कटाव से बचाता है और सालभर उन्नति देता है। हमारे यहाँ सब्सिडी भी मिलती है, तो कृषि केंद्र से पूछ लें। ये एक बार का खर्च है, जो फसल को दोगुना फल देता है।
मल्चिंग से खेती को नई उड़ान दें
अपने आसपास मल्चिंग पेपर इसलिए खास है, क्यूँकि ये मेहनत कम करता है और मुनाफा बढ़ाता है। मार्च में सही पेपर चुनकर शुरू करें, तो फसल लहलहाएगी। तो भाइयों, सही मल्चिंग पेपर लगाएँ, खेत को उन्नत करें और खेती को नई उड़ान दें। मेहनत रंग लाएगी, और जेब भरेगी!
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