केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस साल विकसित कृषि संकल्प अभियान को बड़ी सफलता बताया। इस अभियान के ज़रिए देश भर के 1 करोड़ 12 लाख से ज़्यादा किसानों से सीधा संवाद हुआ। बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में चौहान ने बताया कि इस अभियान से बहुत कुछ सीखने को मिला। अब इन सबकों के आधार पर किसानों की कमाई बढ़ाने और खेती को आधुनिक बनाने के लिए काम होगा। उन्होंने 10 बड़े फैसले लिए, ताकि वैज्ञानिक और किसान मिलकर खेती में नई क्रांति ला सकें।
अभियान से मिली सीख
चौहान ने बताया कि अभियान से तीन बड़ी बातें सामने आईं। पहली, सिर्फ़ दिल्ली में बैठकर खेती के लिए योजनाएँ नहीं बनाई जा सकतीं। इसके लिए खेतों में जाना होगा और किसानों से बात करनी होगी। दूसरी, कई किसान अपनी ज़मीन पर नए-नए प्रयोग करते हैं। ऐसे प्रयोगों को बढ़ावा देना होगा। तीसरी, किसानों के सामने कई समस्याएँ हैं, जैसे पानी की कमी और कीटों का प्रकोप। इन समस्याओं को समझकर उनका हल निकालना होगा। ये सबक अब खेती को बेहतर बनाने की दिशा दिखाएँगे।
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वैज्ञानिक खेतों में जाएँगे
किसानों को नई तकनीक और शोध का फायदा देने के लिए चौहान ने कई बड़े कदम उठाए। उन्होंने कहा कि अब कृषि विज्ञान केंद्र यानी केवीके को पहले से ज़्यादा सक्रिय करना होगा। हर जिले में केवीके को नोडल एजेंसी बनाया जाएगा, जो एक टीम की तरह काम करेगी। सभी केवीके का स्वरूप एक जैसा होगा, ताकि हर जगह किसानों को एकसमान मदद मिले। केवीके के वैज्ञानिकों को अब हर हफ्ते तीन दिन खेतों में जाना होगा और किसानों से बात करनी होगी। चौहान ने कहा कि वह खुद भी हर हफ्ते दो दिन खेतों में जाएँगे और किसानों की समस्याएँ सुनेंगे। साथ ही, कृषि विभाग के अफसरों को भी खेतों में जाने के लिए कहा गया है।
खेती में नया रोडमैप
चौहान ने बताया कि खेती को आधुनिक बनाने के लिए सभी विभागों को एक साथ काम करना होगा। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय बढ़ाया जाएगा। हर राज्य के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR की ओर से एक नोडल अफसर नियुक्त होगा। यह अफसर वैज्ञानिक तरीकों से उस राज्य की खेती की समस्याओं का हल निकालेगा। साथ ही, हर राज्य के साथ मिलकर खेती के लिए एक रोडमैप तैयार किया जाएगा। इससे खेती की लागत कम होगी और किसानों की कमाई बढ़ेगी। चौहान ने कहा कि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच का फासला कम करना होगा, ताकि लैब की तकनीक खेतों तक पहुँचे।
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