अब एक किसान ID से मिलेगा लोन, बीमा और पीएम किसान का लाभ, कागजी झंझट खत्म, जानें पूरी जानकारी!

केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर 2025 में किसानों के लिए डिजिटल क्रांति लाने में जुटी है। किसान पहचान पत्र और डिजिटल फसल सर्वेक्षण (DCS) जैसी पहलें किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से और बिना कागजी कार्रवाई के दिला रही हैं। इन योजनाओं में PM किसान सम्मान निधि, डिजिटल कृषि ऋण, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, और मृदा स्वास्थ्य कार्ड शामिल हैं। कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, एग्रीस्टैक पहल के तहत डिजिटल तकनीक का उपयोग कर किसानों की पहचान और फसल डेटा को सत्यापित किया जा रहा है, जिससे योजनाओं का लाभ सही हकदार तक पहुँच रहा है। यह कदम कागजी बोझ को कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने में भी मददगार है।

64 मिलियन किसानों को डिजिटल पहचान

केंद्र सरकार ने 2023 में शुरू की गई एग्रीस्टैक पहल के तहत अब तक 14 राज्यों में 64 मिलियन से अधिक किसानों को किसान पहचान पत्र प्रदान किया है। इनमें से 43 मिलियन से अधिक ID को PM किसान योजना से जोड़ा गया है। 2025 की शुरुआत में PM किसान के नए लाभार्थियों के लिए किसान पहचान पत्र को अनिवार्य कर दिया गया था। इसके अलावा, 8.6 मिलियन से अधिक ID को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जोड़ा गया है। अधिकारी के अनुसार, यह डिजिटल पहचान पत्र किसानों को बिना कागजी दस्तावेजों के तुरंत सरकारी सेवाएँ, जैसे फसल बीमा और कृषि ऋण, प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।

डिजिटल फसल सर्वेक्षण

डिजिटल फसल सर्वेक्षण (DCS) के माध्यम से बोई गई फसलों का सटीक डेटा एकत्र किया जा रहा है, जिसका उपयोग PM किसान, फसल बीमा, और कृषि ऋण के सत्यापन में हो रहा है। यह डेटा यह सुनिश्चित करता है कि किसान ने वही फसल उगाई है, जिसके लिए उसने ऋण या बीमा का दावा किया है।

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12 राज्यों बिहार, गुजरात, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, और केरल में DCS डेटा का उपयोग फसल रकबे के अनुमान के लिए शुरू हो चुका है। 2024-25 के रबी सीजन में 17 राज्यों में DCS संचालित किया गया था। वर्तमान में 29 राज्यों ने एग्रीस्टैक कार्यान्वयन के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं, सिवाय पश्चिम बंगाल और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के।

PM-आशा और डिजिटल खरीद

एग्रीस्टैक के तहत डिजिटल फसल सर्वेक्षण और किसान रजिस्ट्री का उपयोग PM-आशा योजना में दलहन और तिलहन की खरीद के लिए भी किया जा रहा है। नैफेड और NCCF ने अरहर और मसूर की खेती करने वाले किसानों की पहचान के लिए इस डेटा का सहारा लिया। यह प्रक्रिया खरीद को पारदर्शी और लक्षित बनाती है, जिससे सही किसानों को MSP का लाभ मिलता है। हाल ही में कृषि मंत्रालय ने महाराष्ट्र, केरल, बिहार, और ओडिशा के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ किसान रजिस्ट्री से प्रमाणीकरण के लिए समझौता किया, ताकि ऋण सेवाएँ आसानी से उपलब्ध हों।

डिजिटल ऋण और मृदा स्वास्थ्य कार्ड

किसान पहचान पत्र और भू-स्थानिक गांव मानचित्र के आधार पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, और गुजरात में मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाए जा रहे हैं। यह कार्ड मिट्टी की उर्वरता के आधार पर उर्वरकों के उपयोग की सलाह देता है, जिससे फसल उत्पादकता बढ़ती है। E-KCC (इलेक्ट्रॉनिक किसान क्रेडिट कार्ड) के तहत उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, और मध्य प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जहाँ किसानों को एक घंटे में फसल ऋण मंजूर किया जा रहा है। यह सुविधा भी एग्रीस्टैक का हिस्सा है, जो डिजिटल सत्यापन के जरिए तेजी से ऋण वितरण सुनिश्चित करती है।

चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार ने एग्रीस्टैक के तहत किसान रजिस्ट्री और कानूनी उत्तराधिकारी प्रणाली विकसित करने के लिए ₹4,000 करोड़ और डिजिटल फसल सर्वेक्षण के लिए ₹2,000 करोड़ का आवंटन किया है। इसका उद्देश्य राज्यों को डिजिटल उपकरण अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। कृषि मंत्रालय का लक्ष्य है कि देशभर में DCS का विस्तार हो और अधिक राज्यों को इस पहल में शामिल किया जाए। यह डिजिटल ढांचा न केवल योजनाओं के कार्यान्वयन को आसान बनाएगा, बल्कि फसल उत्पादन के सटीक अनुमान और नीति निर्माण में भी मदद करेगा।

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