Table of Contents
Toggleहॉपर कीट क्या करता है पेड़ के साथ
हॉपर कीट आम की कोमल पत्तियों, फूलों की मंजरियों और छोटे फलों का रस चूसता है। जब यह रस चूसता है, तो पौधे कमजोर होने लगते हैं। इससे भी बड़ी समस्या यह है कि यह कीट एक चिपचिपा पदार्थ छोड़ता है, जिस पर काली फफूंदी जम जाती है। यह काली परत पत्तियों तक धूप नहीं पहुंचने देती। धूप न मिलने से पौधे की भोजन बनाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और पेड़ की ताकत घट जाती है। नतीजा यह होता है कि मंजरियां सूख जाती हैं, छोटे फल गिर जाते हैं और पैदावार काफी कम हो सकती है।
तापमान बढ़ते ही बढ़ता है खतरा
सर्दी कम होते ही जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, यह कीट तेजी से सक्रिय होता है। अभी यह पेड़ों के तनों और दरारों में छिपा रहता है। फरवरी में हल्की गर्मी मिलते ही यह बाहर निकलकर तेजी से बढ़ना शुरू कर देता है। अगर किसान इस समय सतर्क नहीं हुए तो कीट का प्रकोप बढ़ते देर नहीं लगती।
सिर्फ पत्तियों पर छिड़काव काफी नहीं
कई किसान दवा का छिड़काव तो करते हैं, लेकिन सही तरीके से नहीं। वे पत्तियों और फूलों पर दवा डालते हैं, जबकि हॉपर का बड़ा हिस्सा तने की दरारों और मोटी टहनियों में छिपा होता है। इसलिए जब तक दवा वहां तक नहीं पहुंचेगी, कीट पूरी तरह खत्म नहीं होगा। छिड़काव करते समय महीन फवारा रखना जरूरी है ताकि दवा हर हिस्से तक पहुंच सके।
बाग की सफाई भी है उतनी ही जरूरी
बाग में ज्यादा घास और झाड़ियां कीटों के छिपने की जगह बनती हैं। इसलिए बौर आने से पहले बाग की अच्छी तरह सफाई कर लेनी चाहिए। इससे कीटों का ठिकाना कम होता है और दवा का असर भी बेहतर पड़ता है। साफ-सुथरा बाग हमेशा कम रोग और कम कीट प्रकोप वाला होता है।
समय पर निगरानी से बच सकती है फसल
बौर निकलते समय पेड़ों की नियमित निगरानी जरूरी है। पत्तियों और मंजरियों पर कीट की हलचल दिखे तो तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। शुरुआती अवस्था में नियंत्रण आसान होता है, लेकिन देर होने पर नुकसान ज्यादा होता है। स्वस्थ बौर ही आगे चलकर अच्छे फल बनाते हैं, इसलिए इस समय की देखभाल पूरी फसल की किस्मत तय करती है।
अगर किसान फरवरी के इस संवेदनशील समय में तनों, टहनियों और मंजरियों की सही देखभाल करें और समय पर छिड़काव करें, तो हॉपर के नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है और बंपर आम की पैदावार ली जा सकती है।
ये भी पढ़ें- आम के बौरे झड़ रहे हैं? बस तुरंत करें ये 2 आसान उपाय, फलों से लद जाएगा पेड़
Author
-
View all posts
नमस्ते, मैं शशिकांत। मैं 2 साल से पत्रकारिता कर रहा हूं। मुझे खेती से सम्बंधित सभी विषय में विशेषज्ञता प्राप्त है। मैं आपको खेती-किसानी से जुड़ी एकदम सटीक ताजा खबरें बताऊंगा। मेरा उद्देश्य यही है कि मैं आपको 'काम की खबर' दे सकूं। जिससे आप समय के साथ अपडेट रहे, और अपने जीवन में बेहतर कर सके। ताजा खबरों के लिए आप Krishitak.com के साथ जुड़े रहिए।