आम किसानों के लिए अलर्ट! हॉपर कीट से बचाने के लिए अभी करें इस घोल का छिड़काव

पश्चिमी उत्तर प्रदेश को आम की बेल्ट कहा जाता है, लेकिन यहां के बागवान जानते हैं कि फरवरी का महीना सबसे ज्यादा सावधानी मांगता है। इसी समय पेड़ों पर बौर यानी फूल निकलते हैं। यही बौर आगे चलकर फल बनते हैं, इसलिए इस अवस्था में पेड़ की सुरक्षा सबसे जरूरी होती है। जैसे ही बौर आता है, वैसे ही कई कीट सक्रिय हो जाते हैं, जिनमें सबसे खतरनाक माना जाता है हॉपर कीट। स्थानीय किसान इसे फुदका या मच्छर भी कहते हैं। यह कीट छोटा जरूर होता है, लेकिन नुकसान बड़ा कर देता है।

हॉपर कीट क्या करता है पेड़ के साथ

हॉपर कीट आम की कोमल पत्तियों, फूलों की मंजरियों और छोटे फलों का रस चूसता है। जब यह रस चूसता है, तो पौधे कमजोर होने लगते हैं। इससे भी बड़ी समस्या यह है कि यह कीट एक चिपचिपा पदार्थ छोड़ता है, जिस पर काली फफूंदी जम जाती है। यह काली परत पत्तियों तक धूप नहीं पहुंचने देती। धूप न मिलने से पौधे की भोजन बनाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और पेड़ की ताकत घट जाती है। नतीजा यह होता है कि मंजरियां सूख जाती हैं, छोटे फल गिर जाते हैं और पैदावार काफी कम हो सकती है।

तापमान बढ़ते ही बढ़ता है खतरा

सर्दी कम होते ही जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, यह कीट तेजी से सक्रिय होता है। अभी यह पेड़ों के तनों और दरारों में छिपा रहता है। फरवरी में हल्की गर्मी मिलते ही यह बाहर निकलकर तेजी से बढ़ना शुरू कर देता है। अगर किसान इस समय सतर्क नहीं हुए तो कीट का प्रकोप बढ़ते देर नहीं लगती।

सिर्फ पत्तियों पर छिड़काव काफी नहीं

कई किसान दवा का छिड़काव तो करते हैं, लेकिन सही तरीके से नहीं। वे पत्तियों और फूलों पर दवा डालते हैं, जबकि हॉपर का बड़ा हिस्सा तने की दरारों और मोटी टहनियों में छिपा होता है। इसलिए जब तक दवा वहां तक नहीं पहुंचेगी, कीट पूरी तरह खत्म नहीं होगा। छिड़काव करते समय महीन फवारा रखना जरूरी है ताकि दवा हर हिस्से तक पहुंच सके।

बाग की सफाई भी है उतनी ही जरूरी

बाग में ज्यादा घास और झाड़ियां कीटों के छिपने की जगह बनती हैं। इसलिए बौर आने से पहले बाग की अच्छी तरह सफाई कर लेनी चाहिए। इससे कीटों का ठिकाना कम होता है और दवा का असर भी बेहतर पड़ता है। साफ-सुथरा बाग हमेशा कम रोग और कम कीट प्रकोप वाला होता है।

समय पर निगरानी से बच सकती है फसल

बौर निकलते समय पेड़ों की नियमित निगरानी जरूरी है। पत्तियों और मंजरियों पर कीट की हलचल दिखे तो तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। शुरुआती अवस्था में नियंत्रण आसान होता है, लेकिन देर होने पर नुकसान ज्यादा होता है। स्वस्थ बौर ही आगे चलकर अच्छे फल बनाते हैं, इसलिए इस समय की देखभाल पूरी फसल की किस्मत तय करती है।

अगर किसान फरवरी के इस संवेदनशील समय में तनों, टहनियों और मंजरियों की सही देखभाल करें और समय पर छिड़काव करें, तो हॉपर के नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है और बंपर आम की पैदावार ली जा सकती है।

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  • Shashikant

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