जानिए RH-725 सरसों की खेती का फार्मूला, जो दिलाएगा बंपर कमाई

किसान भाइयों, सरसों की खेती हमारे खेतों की शान है। अगर सही समय पर बढ़िया बीज बोए जाएँ, तो ये फसल मुनाफे का खज़ाना बन सकती है। RH-725 सरसों की किस्म ने अपने शानदार गुणों से पूरे देश में धूम मचा रखी है। ये किस्म कम समय में ज़्यादा उपज देती है और कम लागत में बड़ा मुनाफा दिलाती है। सितंबर से नवंबर का समय इसकी बुवाई के लिए सबसे सही है। आइए, जानें कि RH-725 सरसों की खेती कैसे आपके खेतों को समृद्ध बना सकती है और इसे कैसे शुरू करें।

RH-725, किसानों की पहली पसंद

RH-725 सरसों की किस्म हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार ने विकसित की है। ये अपने मोटे दानों और लंबी फलियों के लिए मशहूर है। हर फली में 17-18 दाने होते हैं, और ये सिर्फ़ 135-140 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। प्रति हेक्टेयर 25-27 क्विंटल उपज देती है, जो उत्तर प्रदेश, बिहार, और पंजाब जैसे राज्यों के लिए आदर्श है। इसकी खासियत है कि ये गेहूँ और धान वाले खेतों में आसानी से उगाई जा सकती है। रोगों के प्रति इसकी मज़बूत प्रतिरोधक क्षमता इसे छोटे और बड़े किसानों के लिए भरोसेमंद बनाती है।

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बुवाई का सही समय और मिट्टी की तैयारी

सरसों की बुवाई का सबसे अच्छा समय सितंबर के आखिरी हफ्ते से नवंबर के मध्य तक है। इस दौरान तापमान 20-25 डिग्री सेल्सियस रहता है, जो पौधों के लिए अनुकूल है। दोमट या रेतीली दोमट मिट्टी, जिसका पी.एच. मान 6.5 से 7.5 के बीच हो, इसके लिए सबसे अच्छी है। खेत को तैयार करने के लिए पहले मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करें, फिर दो बार देसी हल से खेत समतल करें। प्रति हेक्टेयर 10-12 टन सड़ी गोबर खाद या वर्मी कंपोस्ट डालें। इससे मिट्टी उपजाऊ बनेगी और फसल को शुरुआती ताकत मिलेगी। जल निकासी की व्यवस्था रखें, ताकि बारिश में पानी खेत में जमा न हो।

बीज उपचार और बुवाई का आसान तरीका

सरसो के बीजों को बोने से पहले उपचार ज़रूरी है, ताकि रोगों से बचाव हो। 50 ग्राम ट्राइकोडर्मा विरिडी को 10 लीटर जीवामृत या पानी में मिलाकर बीज को 15-20 मिनट भिगोएँ। फिर छाँव में सुखाकर बोएँ। प्रति एकड़ 1 किलो बीज काफी है। बीज को 45 सेंटीमीटर की दूरी पर और 4-5 सेंटीमीटर गहराई में बोएँ। मेड़ विधि या समतल खेत में बुवाई कर सकते हैं। बुवाई के बाद हल्की सिंचाई करें, ताकि बीज अच्छे से जम जाएँ। अगर मिट्टी में पहले से नमी हो, तो 3-5 दिन बाद पहली सिंचाई करें। सही तरीके से बुवाई करने से फसल मज़बूत और स्वस्थ होगी।

देखभाल और कीटों से बचाव के देसी नुस्खे

RH-725 सरसों की फसल को कम पानी की ज़रूरत होती है। पूरे सीज़न में 2-3 सिंचाई काफी हैं, खासकर फूल आने (45-55 दिन) और दाने बनने के समय। ड्रिप सिंचाई अपनाने से पानी की बचत होती है। खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 20-25 दिन बाद निराई-गुडाई करें। माहूँ और अन्य कीटों से बचने के लिए नीम का तेल (5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करें। गोमूत्र (10 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी) भी फफूंद और कीटों से बचाता है। अगर रोग की आशंका हो, तो नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें। कटाई 135-145 दिनों में करें, जब फलियाँ पीली पड़ जाएँ और दाने मज़बूत हो जाएँ।

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बीज कैसे प्राप्त करें

RH-725 के प्रमाणित बीज नेशनल सीड्स कॉरपोरेशन (NSC) से आसानी से मिल सकते हैं। NSC 2 किलो का पैक सिर्फ़ 300 रुपये में दे रहा है, जो छोटे और सीमांत किसानों के लिए किफायती है। आप NSC की आधिकारिक वेबसाइट या नज़दीकी स्टोर से बीज ऑर्डर कर सकते हैं। पूरे भारत में मुफ्त डिलीवरी की सुविधा है। ऑर्डर करने से पहले पैकेट पर सर्टिफिकेशन लेबल और बैच नंबर ज़रूर चेक करें। अगर बीज में कोई दिक्कत हो, तो टोल-फ्री नंबर 1800-180-1551 पर शिकायत दर्ज करें। ये प्रमाणित बीज आपके खेतों में बंपर उपज की गारंटी हैं।

मुनाफे की राह, सरसों की कमाई

इस सरसों की खेती से प्रति एकड़ 12 क्विंटल तक उपज मिल सकती है। बाज़ार में सरसों 6,000-8,000 रुपये प्रति क्विंटल बिकती है, जिससे एक एकड़ से 70,000-90,000 रुपये की कमाई हो सकती है। लागत कम करने के लिए जैविक खाद, जैसे गोबर खाद और वर्मी कंपोस्ट, का इस्तेमाल करें। इस किस्म के मोटे दाने और मज़बूत फलियाँ तेल और मसाले दोनों के लिए माँग में रहते हैं, जिससे मुनाफा पक्का है।

RH-725 सरसों की खेती आपके खेतों को समृद्धि की राह दिखा सकती है। सही समय पर प्रमाणित बीजों से बुवाई शुरू करें। ये किस्म कम पानी, कम लागत, और ज़्यादा मुनाफे का वादा करती है। मिट्टी की जाँच और सलाह के लिए नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें। अगर कोई परेशानी हो, तो टोल-फ्री नंबर 1800-180-1551 पर मदद लें।

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  • Dharmendra

    मै धर्मेन्द्र एक कृषि विशेषज्ञ हूं जिसे खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी साझा करना और नई-नई तकनीकों को समझना बेहद पसंद है। कृषि से संबंधित लेख पढ़ना और लिखना मेरा जुनून है। मेरा उद्देश्य है कि किसानों तक सही और उपयोगी जानकारी पहुंचे ताकि वे अधिक उत्पादन कर सकें और खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बना सकें।

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