Beans Ki Kheti: पारंपरिक खेती के साथ-साथ किसान भाई अब बींस की खेती करके मोटी कमाई कर रहे हैं। बाजार में बींस की मांग साल भर रहती है, और सही समय पर बुवाई करने से इसका दाम भी अच्छा मिलता है। सितंबर का महीना बींस की खेती के लिए सबसे बढ़िया समय है, क्योंकि इस समय की जलवायु इसके पौधों की बढ़वार के लिए एकदम सही है। बींस की उन्नत किस्में जैसे पूसा पार्वती, अर्का संपूर्ण, कोहिनूर 51, एच जी-365, और सुपर एक्स-7 कम लागत में बंपर पैदावार देती हैं। जिला कृषि अधिकारियों का कहना है कि बींस की खेती छोटे और बड़े दोनों तरह के किसानों के लिए फायदे का सौदा है।
पूसा पार्वती
पूसा पार्वती बींस की ऐसी किस्म है, जो अपनी मुलायम और लंबी फलियों के लिए मशहूर है। इसकी फलियाँ हरे रंग की, गोल, और बिना रेशे की होती हैं, जो बाजार में खूब पसंद की जाती हैं। भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बैंगलोर ने इस किस्म को विकसित किया है। पूसा पार्वती की खेती से प्रति हेक्टेयर 18 से 20 टन तक उपज मिल सकती है। यह किस्म बुवाई के 50-60 दिन बाद फल देने लगती है, और इसकी फलियाँ ताजा और स्वादिष्ट होती हैं। सितंबर में इसकी बुवाई करने से रबी सीजन में बढ़िया मुनाफा मिलता है। इसकी खेती के लिए जैविक खाद का इस्तेमाल करें, ताकि मिट्टी की सेहत बनी रहे और लागत कम हो।
अर्का संपूर्ण
अर्का संपूर्ण बींस की एक और उन्नत किस्म है, जो रोगों से लड़ने में माहिर है। इस किस्म पर रतुआ और चूर्णिल फफूंद जैसे रोग नहीं लगते, जिससे कीटनाशकों का खर्च बच जाता है। अर्का संपूर्ण की फलियाँ बुवाई के 50 से 60 दिन बाद तोड़ने लायक हो जाती हैं। प्रति हेक्टेयर इसकी उपज 8 से 10 टन तक होती है, जो छोटे किसानों के लिए भी फायदेमंद है। इसकी फलियाँ बाजार में अच्छा दाम लाती हैं, क्योंकि ये ताजी और चमकदार होती हैं। सितंबर में बुवाई करने से यह किस्म रबी और जायद सीजन में बंपर कमाई दे सकती है।
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कोहिनूर 51
कोहिनूर 51 बींस की ऐसी किस्म है, जो अपनी लंबी और हरी फलियों के लिए जानी जाती है। यह भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बैंगलोर की देन है। इसकी खासियत यह है कि इसे रबी, खरीफ, और जायद तीनों सीजन में उगाया जा सकता है। बुवाई के 48-58 दिन बाद इसकी पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है, और 90-100 दिन में फसल पूरी तरह तैयार हो जाती है। कोहिनूर 51 की फलियाँ अन्य किस्मों से ज्यादा लंबी होती हैं, जिससे बाजार में इनका रेट भी अच्छा मिलता है। प्रति हेक्टेयर 10-12 टन तक उपज मिल सकती है। सितंबर में बुवाई करने से यह किस्म बढ़िया मुनाफा देती है।
एच जी-365
एच जी-365 बींस की एक प्रमाणित उन्नत किस्म है, जो अपनी तेज बढ़वार और ज्यादा शाखाओं के लिए मशहूर है। यह किस्म 60-70 दिन में पककर तैयार हो जाती है, जिससे किसान जल्दी मुनाफा कमा सकते हैं। प्रति हेक्टेयर इसकी उपज 18-20 क्विंटल तक हो सकती है। यह किस्म बिहार की मिट्टी और जलवायु के लिए एकदम सही है। जैविक खाद और नियमित सिंचाई से इसकी पैदावार और बढ़ सकती है। सितंबर में बुवाई करने से यह रबी सीजन में बंपर फसल देती है, और बाजार में इसकी फलियाँ खूब बिकती हैं। इसकी खेती छोटे खेतों में भी आसानी से की जा सकती है।
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सुपर एक्स-7
सुपर एक्स-7 बींस की ऐसी किस्म है, जो 90-100 सेंटीमीटर ऊँचे पौधों के साथ आती है। यह किस्म ब्लाइट और जड़ गलन जैसे रोगों के प्रति सहनशील है, जिससे कीटनाशकों का खर्च कम होता है। इसे सिंचित और असिंचित दोनों तरह की जमीन में उगाया जा सकता है। बुवाई के 80-100 दिन बाद यह फसल तैयार हो जाती है, और प्रति एकड़ 6-8 क्विंटल की उपज देती है। इसकी फलियाँ हरी और चमकदार होती हैं, जो बाजार में अच्छा दाम लाती हैं। सितंबर में बुवाई करने से यह किस्म रबी सीजन में बढ़िया मुनाफा दे सकती है।
बींस की खेती किसानों के लिए कमाई का शानदार रास्ता है। पूसा पार्वती, अर्का संपूर्ण, कोहिनूर 51, एच जी-365, और सुपर एक्स-7 जैसी उन्नत किस्में कम लागत में बंपर पैदावार देती हैं। सितंबर में बुवाई करें, जैविक खाद का इस्तेमाल करें, और बाजार की मांग का फायदा उठाएँ। यह फसल न सिर्फ आपकी जेब भरेगी, बल्कि खेत की सेहत भी बनाए रखेगी। अपने नजदीकी कृषि केंद्र से इन किस्मों के बीज लें और आज ही बींस की खेती शुरू करें। लाखों की कमाई अब आपके हाथ में है!
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