RH 1975 variety of Mustard: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (CCS HAU) ने सरसों की खेती को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम किया है। विश्वविद्यालय को इसके शानदार शोध और सरसों की उन्नत किस्मों के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने सर्वश्रेष्ठ केंद्र अवार्ड से सम्मानित किया है। यह अवार्ड ग्वालियर में आयोजित 32वीं अखिल भारतीय राया और सरसों अनुसंधान कार्यकर्ताओं की बैठक में सहायक महानिदेशक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने प्रदान किया। विश्वविद्यालय की नई किस्में, खासकर RH 1975, किसानों के बीच बहुत लोकप्रिय हो रही हैं। यह किस्में न सिर्फ पैदावार बढ़ाएंगी, बल्कि किसानों की जेब भी भरेंगी। आइए जानते हैं इन नई किस्मों और उनके फायदों के बारे में।
सरसों की RH 1975: ज्यादा पैदावार, ज्यादा तेल
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने बताया कि पिछले साल सिंचित क्षेत्रों के लिए सरसों की RH 1975 किस्म विकसित की गई है। यह किस्म किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसकी औसत पैदावार 11 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ है, और अच्छी देखभाल के साथ यह 14 से 15 क्विंटल तक जा सकती है।
सबसे खास बात यह है कि इसमें 39.5% तेल की मात्रा है, जो तेल निकालने वालों के लिए बड़ा फायदा है। यह किस्म रबी के मौसम में बुवाई के लिए एकदम सही है, और इसका बीज इस साल किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। कुलपति ने बताया कि यह किस्म हरियाणा, राजस्थान, और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में खूब पसंद की जा रही है।
ये भी पढ़ें- अगेती सरसों की ये 5 उन्नत किस्में देंगी 100 दिन में बम्पर पैदावार, तेल भी ज्यादा और मुनाफा भी
नई हाइब्रिड किस्में
RH 1975 के अलावा विश्वविद्यालय ने तीन और हाइब्रिड किस्में विकसित की हैं RAHH 2101, RH 1424, और RH 1706। ये किस्में भी सरसों की पैदावार बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाएंगी। अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने कहा कि ये किस्में अपनी खास खूबियों के कारण सरसों उत्पादक राज्यों में जल्द ही लोकप्रिय हो जाएंगी। ये किस्में मिट्टी और मौसम की अलग-अलग परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन करती हैं। इनके बीज न सिर्फ ज्यादा पैदावार देते हैं, बल्कि फसल को कीटों और बीमारियों से भी बचाने में मदद करते हैं। इससे किसानों को कम लागत में ज्यादा मुनाफा मिलेगा।
विश्वविद्यालय का गौरवशाली इतिहास
विश्वविद्यालय के तिलहन अनुभाग को चौथी बार सर्वश्रेष्ठ केंद्र अवार्ड मिला है, जो पूरे हरियाणा के लिए गर्व की बात है। तिलहन अनुभाग के वैज्ञानिक डॉ. राम अवतार ने बताया कि उनकी टीम ने अब तक राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सरसों की 23 किस्में विकसित की हैं। इनमें से RH 725, जो 2018 में विकसित की गई थी, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, और बिहार में बहुत लोकप्रिय है। इस किस्म से किसान 25 से 30 मण (10-12 क्विंटल) प्रति एकड़ की पैदावार आसानी से ले रहे हैं। विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एस.के. पाहुजा ने बताया कि वैज्ञानिकों की मेहनत और शोध ने सरसों की खेती को नया मुकाम दिया है।
ये भी पढ़ें- झुमका सरसों की खेती से किसानों की चांदी! साधारण सरसों से ज्यादा तेल, कम मेहनत में लाखों की कमाई
किसानों के लिए बड़ा मौका
सरसों की ये नई किस्में किसानों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं हैं। ज्यादा पैदावार और तेल की मात्रा के कारण ये किस्में न सिर्फ स्थानीय बाजार में, बल्कि तेल उद्योग के लिए भी फायदेमंद हैं। विश्वविद्यालय लगातार किसानों को नई तकनीकों और बीजों की जानकारी दे रहा है। प्रो. काम्बोज ने वैज्ञानिकों की टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और कहा कि यह शोध किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में बड़ा योगदान देगा। रबी के मौसम में बुवाई के लिए तैयार रहें और अपने नजदीकी कृषि केंद्र से RH 1975 और अन्य उन्नत किस्मों के बीज लेने की व्यवस्था करें।
खेती को बनाएं और लाभकारी
सरसों की ये उन्नत किस्में मिट्टी की सेहत को बनाए रखने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद करेंगी। अगर आप हरियाणा, राजस्थान, या उत्तर प्रदेश के किसान हैं, तो इन नई किस्मों को जरूर आजमाएं। अपने खेत की मिट्टी की जांच करवाएं और सही समय पर बुवाई करें। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की सलाह लें, ताकि आपकी फसल लहलहाए और आपकी मेहनत का पूरा फल मिले। यह नई किस्में सरसों की खेती को और आसान और लाभकारी बनाएंगी।
ये भी पढ़ें- सरसों की बदली हुई नस्ल से बंपर पैदावार! जानें जीएम सरसों की पूरी सच्चाई