Musturd Farming: उत्तर प्रदेश में सरसों की खेती किसानों की कमाई का बड़ा जरिया है। यहां की जलवायु और मिट्टी सरसों की अगेती, मध्यम, और पछेती सभी किस्मों के लिए एकदम सही है। अगर किसान सही किस्म का चुनाव करें, तो उन्हें अच्छी पैदावार, ज्यादा तेल, और रोगों से सुरक्षा मिल सकती है। रबी सीजन में सरसों की खेती न सिर्फ मिट्टी की सेहत को बनाए रखती है, बल्कि बाजार में अच्छी कीमत भी दिलाती है। इस लेख में हम उत्तर प्रदेश के लिए कुछ बेहतरीन सरसों की किस्मों के बारे में बताएंगे, जो किसानों की मेहनत को दोगुना फल दे सकती हैं। आइए जानते हैं इन किस्मों की खासियतें और इन्हें कैसे अपनाएं।
1. पंत पियूष
पंत पियूष सरसों की एक ऐसी किस्म है, जो अगेती बुवाई के लिए बहुत मुफीद है। यह 115-120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और प्रति हेक्टेयर 18-20 क्विंटल तक पैदावार देती है। इसमें तेल की मात्रा 38-40% तक होती है, जो तेल उद्योग के लिए फायदेमंद है। यह किस्म खास तौर पर उन किसानों के लिए अच्छी है, जो धान की कटाई के तुरंत बाद सरसों बोना चाहते हैं। इसकी पैदावार स्थिर रहती है, और यह उत्तर प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में अच्छा प्रदर्शन करती है। रबी सीजन की शुरुआत में इसे बोने से किसान समय पर फसल काटकर बाजार में अच्छा दाम पा सकते हैं।
2. वर्धन
वर्धन (RGN-48) एक ऐसी किस्म है, जो 120-125 दिनों में तैयार हो जाती है। यह प्रति हेक्टेयर 20-22 क्विंटल की पैदावार देती है और इसमें 39% तेल होता है। यह किस्म मध्यम से देर तक बुवाई के लिए उपयुक्त है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसका रोग प्रतिरोधी होना। यह तिल्ली रोग और अन्य कीटों से लड़ने में सक्षम है। उत्तर प्रदेश के उन किसानों के लिए यह किस्म बहुत अच्छी है, जो कम लागत में ज्यादा मुनाफा चाहते हैं। इसका बीज आसानी से उपलब्ध है, और इसे बोने से फसल की गुणवत्ता भी बनी रहती है।
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3. पूसा तारक
पूसा तारक एक और शानदार किस्म है, जो 120-125 दिनों में पकती है। यह प्रति हेक्टेयर 18-20 क्विंटल तक उपज देती है और इसमें तेल की मात्रा 40% तक होती है। यह किस्म तिल्ली रोग (Alternaria blight) और सफेद गेरूआ रोग (White rust) के खिलाफ मजबूत है। उत्तर प्रदेश के उन इलाकों में, जहां ये रोग आम हैं, पूसा तारक किसानों के लिए वरदान है। इसकी बुवाई मध्यम समय पर की जा सकती है, और यह मिट्टी की अलग-अलग परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन करती है। यह किस्म खेत में कम देखभाल में भी अच्छी पैदावार देती है।
4. RH-749
RH-749 उन किसानों के लिए बेहतरीन है, जो देर से बुवाई करते हैं। यह 135-140 दिनों में पककर तैयार होती है और प्रति हेक्टेयर 22-24 क्विंटल तक पैदावार देती है। इसमें 38-39% तेल होता है। यह किस्म पछेती बुवाई के बावजूद अच्छी पैदावार देने के लिए जानी जाती है। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, जौनपुर, और वाराणसी जैसे इलाकों में यह किस्म खूब पसंद की जाती है। इसकी मजबूत बनावट और रोगों से लड़ने की क्षमता इसे किसानों की पहली पसंद बनाती है। रबी सीजन में देर से बुवाई करने वाले किसान इसे आजमाकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
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5. NRCHB-101
NRCHB-101 एक उन्नत किस्म है, जो 130-135 दिनों में तैयार हो जाती है। यह प्रति हेक्टेयर 20-22 क्विंटल की पैदावार देती है और इसमें 40% तक तेल होता है। यह तिल्ली और सफेद गेरूआ रोगों के खिलाफ मजबूत है। यह किस्म उत्तर प्रदेश की मिट्टी और जलवायु के लिए बहुत अनुकूल है। इसके बीज से न सिर्फ पैदावार बढ़ती है, बल्कि तेल की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है। यह किस्म उन किसानों के लिए फायदेमंद है, जो ज्यादा तेल उत्पादन और रोगमुक्त फसल चाहते हैं।
तुलना तालिका
किस्म का नाम | अवधि (दिन) | औसत उपज (क्विं./हे.) | तेल प्रतिशत | विशेषता |
---|---|---|---|---|
पंत पियूष | 115-120 | 18-20 | 38-40% | अगेती बोनी के लिए श्रेष्ठ |
वर्धन (RGN-48) | 120-125 | 20-22 | 39% | जल्दी पकने वाली, रोग प्रतिरोधक |
पूसा तारक | 120-125 | 18-20 | 40% | रोग प्रतिरोधक, स्थिर पैदावार |
RH-749 | 135-140 | 22-24 | 38-39% | पछेती बोनी में सफल |
NRCHB-101 | 130-135 | 20-22 | 40% | रोग प्रतिरोधक, ज्यादा तेल वाली |
किसानों के लिए सलाह
किसान भाइयों, सरसों की खेती में सही किस्म का चुनाव बहुत जरूरी है। अपने खेत की मिट्टी और बुवाई के समय के हिसाब से इनमें से कोई एक किस्म चुनें। पंत पियूष और पूसा तारक अगेती और मध्यम बुवाई के लिए अच्छी हैं, जबकि RH-749 और NRCHB-101 देर से बुवाई के लिए सही हैं। बुवाई से पहले मिट्टी की जांच करवाएं और संतुलित खाद का इस्तेमाल करें। अपने नजदीकी कृषि केंद्र से इन उन्नत किस्मों के बीज लें और समय पर बुवाई करें। खेत की नियमित देखभाल और रोगों से बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह लें। सही किस्म और देखभाल से आपकी सरसों की फसल लहलहाएगी और कमाई भी बढ़ेगी।
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